लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: क्या आपका बच्चा खेलकूद के बजाय हर समय थका-थका रहता है? क्या उसका चेहरा पीला पड़ता जा रहा है और भूख कम लगती है? अगर हां, तो इसे महज साधारण कमजोरी समझकर नजरअंदाज करने की गलती न करें। यह थैलेसीमिया (Thalassemia) जैसी गंभीर जेनेटिक बीमारी का संकेत हो सकता है।
हर साल 8 मई को दुनिया भर में ‘वर्ल्ड थैलेसीमिया डे’ मनाया जाता है। इसका मकसद लोगों को इस वंशानुगत रक्त विकार के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और समय पर जांच ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।
आखिर क्या है थैलेसीमिया और यह क्यों होता है?
थैलेसीमिया कोई संक्रमण या छुआछूत की बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है। हमारे रक्त में मौजूद रेड ब्लड सेल्स (RBC) में हीमोग्लोबिन नाम का प्रोटीन होता है, जो पूरे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करता है।
थैलेसीमिया से पीड़ित व्यक्ति का शरीर पर्याप्त मात्रा में या सामान्य हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। नतीजतन, लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी नष्ट होने लगती हैं और शरीर में खून की भारी कमी हो जाती है, जिसे मेडिकल भाषा में एनीमिया कहा जाता है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में दोषपूर्ण जीन के जरिए पहुंचती है।
इन 8 लक्षणों को कभी न करें इग्नोर
थैलेसीमिया के लक्षण अक्सर जन्म के बाद पहले दो सालों के भीतर दिखने लगते हैं। हालांकि, इसके प्रकार (माइनर या मेजर) के आधार पर लक्षणों की गंभीरता बदल सकती है:
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अत्यधिक थकान: ऑक्सीजन की कमी के कारण बच्चा हर समय सुस्त और थका हुआ रहता है।
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पीली त्वचा: शरीर में खून की कमी की वजह से त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ जाता है, जो पीलिया (Jaundice) जैसा लग सकता है।
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हड्डियों की बनावट में बदलाव: हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने के लिए जब बोन मैरो ज्यादा मेहनत करता है, तो चेहरे और माथे की हड्डियों की बनावट असामान्य हो सकती है।
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विकास की धीमी रफ्तार: प्रभावित बच्चों की लंबाई और वजन अन्य बच्चों की तुलना में बहुत धीमी गति से बढ़ता है।
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गहरे रंग का पेशाब: यह शरीर के भीतर रेड ब्लड सेल्स के तेजी से टूटने का संकेत होता है।
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पेट में सूजन: थैलेसीमिया के कारण तिल्ली (Spleen) या लिवर का आकार बढ़ सकता है, जिससे पेट में उभार नजर आता है।
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सांस लेने में दिक्कत: मामूली शारीरिक गतिविधि करने पर भी बच्चा हाफने लगता है।
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भूख न लगना: खाने के प्रति अरुचि और कमजोरी लगातार बनी रहती है।
जागरूकता ही है बचाव का रास्ता
थैलेसीमिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ शादी से पहले या गर्भधारण के दौरान ‘थैलेसीमिया स्क्रीनिंग’ कराने की सलाह देते हैं। यदि माता-पिता दोनों थैलेसीमिया माइनर (कैरियर) हैं, तो बच्चे को थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। आज के दौर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट और नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए इस बीमारी का प्रबंधन संभव है, लेकिन शुरुआती पहचान सबसे महत्वपूर्ण है। इस 8 मई को संकल्प लें कि आप भी इस बीमारी के लक्षणों को समझेंगे और दूसरों को जागरूक करेंगे।
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