Yogi government’s big decision : अब सरकारी कर्मचारी नहीं छिपा सकेंगे शेयर और संपत्ति, कैबिनेट ने नियमों में किया बड़ा बदलाव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और सख्त कर दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956’ में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले के बाद अब प्रदेश के सरकारी सेवकों को अपने निवेश और संपत्ति की पाई-पाई का हिसाब सरकार को देना होगा।

नए नियमों के तहत अब शेयर बाजार में मोटा निवेश करने वालों और कीमती संपत्ति खरीदने वाले कर्मचारियों पर सरकार की सीधी नजर रहेगी।


शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश पर नई गाइडलाइन

अब सरकारी कर्मचारियों के लिए शेयर बाजार में निवेश करना ‘ओपन बुक’ की तरह होगा। कैबिनेट के फैसले के अनुसार:

  • यदि कोई कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने छह महीने के मूल वेतन (Basic Pay) से अधिक की राशि शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर या बॉन्ड में निवेश करता है, तो इसकी जानकारी विभाग को देना अनिवार्य होगा।

  • सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों की ज्ञात आय और उनके खर्चों के बीच पारदर्शिता लाना है।

चल-अचल संपत्ति: अब हर साल देना होगा पूरा ब्योरा

संपत्ति के विवरण को लेकर सरकार ने पुराने नियमों को पूरी तरह बदल दिया है:

  • सालाना रिपोर्ट: अब कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा। पहले यह जानकारी 5 साल में एक बार देनी होती थी।

  • चल संपत्ति (गाड़ी, सोना): यदि कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक की चल संपत्ति (जैसे- कार, गहने आदि) खरीदता है, तो उसे इसकी सूचना देनी होगी। पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन की थी।

  • सजा का प्रावधान: संपत्ति का ब्योरा न देने या गलत जानकारी देने पर कर्मचारियों का प्रमोशन (पदोन्नति) रोका जा सकता है और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

न्यायिक सेवा में भी बड़ा फेरबदल

कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश उच्चतर न्यायिक सेवा नियमावली, 1975’ में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं:

  • प्रमोशन कोटा में बदलाव: सिविल जज (सीनियर डिवीजन) से पदोन्नति का कोटा 65 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

  • विभागीय परीक्षा: सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से होने वाली पदोन्नति का कोटा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके लिए 7 साल की कुल सेवा और 3 साल की निरंतर सेवा अनिवार्य होगी।

भ्रष्टाचार पर डिजिटल प्रहार

कार्मिक विभाग के इस प्रस्ताव का मुख्य लक्ष्य सरकारी तंत्र में ‘अघोषित आय’ और बेनामी संपत्तियों पर लगाम लगाना है। अब डिजिटल माध्यम से कर्मचारियों की आर्थिक गतिविधियों को ट्रैक करना आसान होगा। सरकार का मानना है कि इस पारदर्शिता से ईमानदार कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और भ्रष्ट तत्वों पर शिकंजा कसा जा सकेगा।

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