‘अजमेर दरगाह पर कई बार मुस्लिमों से ज्यादा हिंदू जाते हैं’: गरबा में गैर-हिंदुओं की एंट्री विवाद पर बोले केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले

शारदीय नवरात्रि के शुरू होने से ठीक पहले विभिन्न राज्यों में गरबा और डांडिया आयोजनों में गैर-हिंदुओं (विशेषकर मुस्लिम युवकों) के प्रवेश पर आईडी कार्ड जांचने और पाबंदी लगाने की मांगों को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार के प्रमुख सहयोगी और केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने बड़ा बयान दिया है। आठवले ने धार्मिक आयोजनों में इस प्रकार के भेदभाव का विरोध करते हुए देश की साझी सांस्कृतिक विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब की वकालत की। उन्होंने राजस्थान स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की अजमेर दरगाह का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में आस्था और उत्सवों की कोई दीवार नहीं होनी चाहिए और कई बार अजमेर शरीफ में मुस्लिमों से ज्यादा हिंदू श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं।

‘त्योहारों में सबको शामिल होने का हक’: आठवले का रुख

विहिप (VHP) और बजरंग दल समेत कुछ हिंदू संगठनों द्वारा गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने और ‘लव जिहाद’ का हवाला देकर आधार कार्ड जांचने के फरमान पर पत्रकारों से बात करते हुए रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख रामदास आठवले ने स्पष्ट किया:

“हमारा देश विविधताओं और आपसी भाईचारे का देश है। गरबा मां दुर्गा की आराधना और आनंद का उत्सव है। अगर कोई गैर-हिंदू या मुस्लिम भाई भारतीय संस्कृति और श्रद्धा के तहत गरबा देखने या उसमें शामिल होने आता है, तो उस पर पूरी तरह पाबंदी लगाना सही नहीं है। अजमेर दरगाह पर कई बार मुस्लिमों से ज्यादा हिंदू समाज के लोग चादर चढ़ाने जाते हैं। जब हिंदू दरगाह जा सकते हैं, तो दूसरे धर्मों के लोग भी हमारे उत्सवों का सम्मान करते हुए शामिल हो सकते हैं।'”

कानून-व्यवस्था और उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई का समर्थन

हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने यह भी साफ किया कि उत्सव की आड़ में किसी भी असामाजिक तत्व को माहौल बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए:

  • सख्त पहचान और नियम: आठवले ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत मंशा, पहचान छिपाकर या महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के इरादे से आता है, तो आयोजकों और पुलिस को उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।

  • पहचान पत्र जांचने पर आपत्ति नहीं: उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से पहचान पत्र देखना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन केवल धर्म के आधार पर किसी को उत्सव से बाहर रखना देश के सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ है।

क्यों गरमाया हुआ है गरबा एंट्री का मुद्दा?

नवरात्रि उत्सव से पहले मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में गरबा आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा हुआ है:

  1. हिंदू संगठनों की मांग: संगठनों ने आयोजकों को ज्ञापन सौंपकर पंडालों में केवल सनातनी श्रद्धालुओं को प्रवेश देने, एंट्री गेट पर तिलक लगाने, गंगाजल छिड़कने और क्यूआर कोड/आधार कार्ड से सत्यापन करने की मांग रखी है।

  2. प्रशासन की तैयारी: पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा, सीसीटीवी सर्विलांस और महिला सुरक्षा प्राथमिक है, लेकिन किसी भी संगठन को कानून अपने हाथ में लेने या निजी स्तर पर मॉब लिंचिंग/बदसलूकी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

राजनीतिक हलकों में आठवले के बयान के मायने

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले एनडीए (NDA) के एक ऐसे वरिष्ठ नेता हैं जो अक्सर सामाजिक समरसता, दलित अधिकारों और सांप्रदायिक सौहार्द के मुद्दों पर अपनी बेबाक और संतुलित राय रखने के लिए जाने जाते हैं। गरबा विवाद पर उनके इस बयान को हिंदुत्ववादी संगठनों की आक्रामक राजनीति के बीच एक संतुलनकारी और समावेशी नजरिए के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने सभी समुदायों से एक-दूसरे के धार्मिक पर्वों का सम्मान करने और सामाजिक शांति बनाए रखने की अपील की है।

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