‘अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा, नेता बनेगा’; रामपुर में असदुद्दीन ओवैसी का अखिलेश यादव और सपा पर तीखा हमला

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और मुस्लिम बहुल जिले रामपुर में चुनावी सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। कभी आजम खान का अभेद्य किला रहे रामपुर की सरजमीं से ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को सियासी भागीदारी और नेतृत्व का नया पाठ पढ़ाने की कोशिश की। ओवैसी ने अपने जाने-पहचाने आक्रामक तेवर में कहा कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष (सेक्युलर) पार्टियों ने दशकों से मुस्लिम समाज को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया है और उन्हें सिर्फ ‘दरी बिछाने’ का काम सौंपा है। हैदराबाद के सांसद ने भारी भीड़ के सामने साफ लफ्जों में ऐलान किया कि अब वक्त बदल चुका है और “अब्दुल अब किसी के जलसे में दरी नहीं बिछाएगा, बल्कि खुद अपने हक के लिए नेता बनेगा।”

‘अब्दुल’ वाले बयान से गरमाई यूपी की राजनीति: सियासी भागीदारी पर दिया जोर

जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सपा के पारंपरिक मुस्लिम-यादव (MY) समीकरण पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब चुनाव आते हैं, तो सेक्युलर दलों को मुस्लिम वोटों की याद आती है, लेकिन जब सत्ता में हिस्सेदारी, टिकट बंटवारे या संकट के समय समाज के साथ खड़े होने की बात आती है, तो ये बड़े नेता अपने घरों से बाहर तक नहीं निकलते। ओवैसी ने अखिलेश यादव का नाम लिए बिना तंज कसा कि अगर यादव समाज का कोई व्यक्ति नेता बन सकता है, तो फिर अब्दुल का बेटा सिर्फ पोस्टर लगाने और कुर्सियां सजाने के लिए ही क्यों रहे? उन्होंने कहा कि जब तक अल्पसंख्यक समाज विधानसभा और संसद में अपना खुद का स्वतंत्र राजनीतिक नेतृत्व खड़ा नहीं करेगा, तब तक कोई भी बड़ी पार्टी उनके जान-माल और संवैधानिक अधिकारों की हिफाजत नहीं कर सकती।

आजम खान की अनदेखी का उठाया मुद्दा: सपा की चुप्पी पर उठाए सवाल

रामपुर की नब्ज को छूते हुए ओवैसी ने आजम खान और उनके परिवार के साथ हुए कानूनी व राजनीतिक घटनाक्रमों का भी परोक्ष रूप से जिक्र किया। उन्होंने स्थानीय लोगों को याद दिलाया कि जब रामपुर के वरिष्ठ नेताओं और आम नौजवानों पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे थे, उनके घर और संपत्तियां तोड़ी जा रही थीं, तब लखनऊ के एसी कमरों में बैठने वाले नेता सड़क पर संघर्ष करने नहीं आए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी ने अपने सबसे वफादार वोट बैंक को जरूरत के समय अकेला छोड़ दिया और अब फिर से हमदर्दी जताकर वोट बटोरने की जुगत में है। उन्होंने जनता से सवाल किया कि आखिर कब तक वे भाजपा के डर के नाम पर ऐसी पार्टियों को एकतरफा वोट देते रहेंगे जो उनके संकट में उनके आंसू तक पोंछने नहीं आतीं।

2027 से पहले सपा के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनावों और 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर असदुद्दीन ओवैसी की यह रणनीति समाजवादी पार्टी के लिए गहरी चिंता का सबब बन सकती है। अखिलेश यादव जहां एक तरफ ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले के जरिए व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ओवैसी इस बात को बार-बार रेखांकित कर रहे हैं कि पीडीए में ‘ए’ यानी अल्पसंख्यकों को उचित हिस्सेदारी नहीं मिल रही है। रामपुर, मुरादाबाद, संभल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल इलाकों में ओवैसी की सभाओं में उमड़ रही युवाओं की भीड़ यह संकेत देती है कि मुस्लिम समाज के भीतर अपनी स्वतंत्र आवाज और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बेचैनी बढ़ रही है।

चुनावी मुकाबले में त्रिकोणीय समीकरण के आसार

ओवैसी के इस तीखे रुख ने रामपुर के स्थानीय चुनावी मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बना दिया है। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने विकास और कानून-व्यवस्था के दावों के साथ मैदान में डटी है, वहीं सपा अपने पुराने प्रभाव को बचाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में AIMIM की सक्रियता और ओवैसी के आक्रामक बयानों से सपा के कोर वोट बैंक में बिखराव की आशंका गहरा गई है। ओवैसी के ‘अब्दुल अब नेता बनेगा’ वाले बयान पर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी पलटवार करते हुए उन्हें ‘भाजपा की बी-टीम’ करार दिया है। लेकिन रामपुर की जनता के बीच ओवैसी के इस भाषण ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की सियासत में मुस्लिम वोटों और नेतृत्व को लेकर घमासान और तेज होने वाला है।

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