अमेरिका के दबाव में हुई बोइंग विमान डील? बांग्लादेशी वकील ने अंतरिम सरकार को भेजा कानूनी नोटिस

पड़ोसी देश बांग्लादेश में विमान खरीद को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय एयरलाइन ‘विमान बांग्लादेश’ द्वारा अमेरिकी कंपनी बोइंग से नए यात्री विमान खरीदने की बहुचर्चित डील अब कानूनी शिकंजे में फंसती नजर आ रही है। बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के एक प्रमुख वकील ने देश की अंतरिम सरकार को औपचारिक कानूनी नोटिस (Legal Notice) भेजते हुए इस पूरे सौदे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नोटिस में सीधे तौर पर आरोप लगाया गया है कि अंतरिम सरकार ने किसी निष्पक्ष वित्तीय मूल्यांकन या प्रतिस्पर्धी बोली (टेंडर प्रक्रिया) के बिना केवल संयुक्त राज्य अमेरिका के भू-राजनीतिक और राजनयिक दबाव में आकर बोइंग के साथ यह समझौता किया है। नोटिस में सरकार से सौदे के हर पहलू का हिसाब-किताब सार्वजनिक करने और जनता के सामने पूरी पारदर्शिता बरतने की मांग की गई है।

कानूनी नोटिस में किन अधिकारियों को बनाया गया पक्षकार?

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता द्वारा भेजे गए इस कानूनी नोटिस में बांग्लादेश सरकार के शीर्ष मंत्रालयों और संबंधित विभागों को जवाबदेह ठहराया गया है। नोटिस में नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय ध्वजवाहक ‘विमान बांग्लादेश एयरलाइंस’ के प्रबंध निदेशक (MD) व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAAB) के अध्यक्ष और विदेश मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।

अधिवक्ता ने नोटिस में सख्त लहजे में कहा है कि अगर तय समयसीमा के भीतर इस विमान खरीद समझौते के सभी तकनीकी, कानूनी और वित्तीय दस्तावेजों का खुलासा नहीं किया गया, तो वे सार्वजनिक हित (PIL) में सीधे उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) में रिट याचिका दायर करेंगे।

अमेरिकी दबाव और एयरबस को नजरअंदाज करने के संगीन आरोप

इस पूरे विवाद की जड़ में यूरोपीय विमान निर्माता कंपनी एयरबस (Airbus) और अमेरिकी कंपनी बोइंग (Boeing) के बीच की प्रतिस्पर्धा है। गौरतलब है कि शेख हसीना सरकार के कार्यकाल के दौरान फ्रांस और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत के बाद एयरबस से अत्याधुनिक A350 विमान खरीदने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी थी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के ढाका दौरे के समय इस दिशा में समझौते पर हस्ताक्षर भी किए गए थे।

हालांकि, शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने और नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद इस नीति में अचानक बड़ा मोड़ आया। कानूनी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि वाशिंगटन से अंतरिम प्रशासन पर रणनीतिक समर्थन के बदले बोइंग विमानों का ऑर्डर देने के लिए भारी दबाव बनाया गया। वकील का तर्क है कि जब देश पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट, घटते विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) और मुद्रास्फीति से जूझ रहा है, तब बिना किसी पारदर्शी मूल्यांकन के अरबों डॉलर का यह विदेशी सौदा देश के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ डालेगा।

सुरक्षा मानकों और तकनीकी समीक्षा पर भी उठे सवाल

कानूनी नोटिस में केवल वित्तीय अनियमितताओं का ही नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों का भी जिक्र किया गया है। अधिवक्ता ने वैश्विक स्तर पर बोइंग 737 मैक्स और अन्य मॉडल्स से जुड़ी तकनीकी खामियों और सुरक्षा जांचों का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या नागरिक उड्डयन विशेषज्ञों द्वारा इस खरीद की स्वतंत्र सुरक्षा समीक्षा (Safety Audit) कराई गई थी?

नोटिस में पूछा गया है कि क्या बांग्लादेश के टैक्सपेयर्स के पैसे से खरीदे जाने वाले इन विमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय निविदा (ग्लोबल टेंडर) जारी की गई थी? यदि नहीं, तो सिंगल-सोर्स डील के तहत बोइंग को प्राथमिकता देने के पीछे क्या ठोस राष्ट्रीय और व्यावसायिक तर्क थे?

अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली पर गहराया अविश्वास

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद अंतरिम प्रशासन ने व्यवस्था में शुचिता, निष्पक्षता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का वादा किया था। लेकिन अमेरिकी विमान कंपनी बोइंग के साथ हुई इस डील को लेकर उठे सवालों ने सरकार की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने इस नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो यह मामला आने वाले दिनों में अदालत के साथ-साथ बांग्लादेश की सड़कों पर भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।

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