
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों—अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक गतिरोध और टैरिफ वॉर में एक बड़ा व ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला है। दोनों देशों ने पारस्परिक संबंधों को स्थिर करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए लगभग 30 अरब डॉलर (30 बिलियन डॉलर) के उत्पादों पर टैरिफ कटौती करने और एक साझा ट्रेड काउंसिल गठित करने पर ऐतिहासिक सहमति जताई है। यह बड़ा फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के तीन दिवसीय अमेरिका दौरे के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वाइट हाउस में हुई मैराथन बैठकों के बाद सामने आया। साल 2015 के बाद शी जिनपिंग का यह पहला वाशिंगटन दौरा था, जहां दोनों नेताओं के बीच कई घंटों की द्विपक्षीय बातचीत और शीर्ष टेक दिग्गजों के साथ साझा डिनर के बाद आठ-सूत्रीय सहमति पत्र पर मुहर लगाई गई। इस समझौते से दोनों देशों के बीच वर्षों से जारी तनाव में कमी आने और वैश्विक बाजारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
खिलौनों, खेती के सामान और मेडिकल उपकरणों पर मिली सीधी टैरिफ छूट
वाइट हाउस और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा जारी विवरण के अनुसार, 30 अरब डॉलर के इस पारस्परिक टैरिफ पैकेज में उन उत्पादों को विशेष प्राथमिकता दी गई है जिन्हें रणनीतिक या सुरक्षा के लिहाज से ‘गैर-संवेदनशील’ (Non-Sensitive) माना जाता है। अमेरिका की तरफ से चीन को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में कृषि उत्पाद (जैसे सोयाबीन और अनाज), समुद्री भोजन (सी-फूड), लकड़ी (टिम्बर), कॉस्मेटिक्स और आधुनिक मेडिकल उपकरणों को बेहतर और रियायती टैरिफ दरों पर चीन भेजने की अनुमति दी गई है।
वहीं दूसरी ओर, चीन की तरफ से अमेरिका आने वाले रोजमर्रा के उपभोक्ता सामानों पर राहत प्रदान की गई है। इसमें चीन के बने खिलौने, छोटे घरेलू उपकरण (स्मॉल अप्लायंसेज), घरेलू सजावट के सामान और हल्के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद शामिल हैं। इस कदम से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलेगी, जबकि चीन के विनिर्माण क्षेत्र और अमेरिकी किसानों को अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा व सुगम बाजार उपलब्ध होगा।
टेक दिग्गजों के साथ डिनर और ‘सुपर इंटेलिजेंस’ पर ऐतिहासिक संवाद
द्विपक्षीय बातचीत के अलावा वाइट हाउस में आयोजित औपचारिक रात्रिभोज में वैश्विक तकनीकी परिदृश्य के शीर्ष दिग्गजों ने भी शिरकत की। इस बैठक में अल्फाबेट (गूगल) के सीईओ सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन जैसे प्रमुख टेक लीडर्स मौजूद रहे। दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सुरक्षित विकास, अवसरों और इससे जुड़े जोखिमों पर नियमित संवाद के लिए एक औपचारिक तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।
दिलचस्प बात यह रही कि दोनों पक्ष वार्ता के दौरान ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की जगह आधिकारिक रूप से ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द के इस्तेमाल पर सहमत हुए। शी जिनपिंग ने स्वीकार किया कि मानवता के हित में सुपर इंटेलिजेंस की प्रगति और इसका मानवीय नियंत्रण में रहना दोनों महाशक्तियों की साझा जिम्मेदारी है। इसके साथ ही दोनों पक्ष एआई सुरक्षा पर अगली उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने और किसी भी तकनीकी संकट से निपटने के लिए एक विशेष हॉटलाइन चैनल बनाने पर राजी हुए हैं।
बुसान समझौते का विस्तार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और चीनी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों ने अपने मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी ‘बुसान समझौते’ को दो महीने के लिए बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक प्रभावी कर दिया है। इस कदम से दोनों पक्षों को विवादित लंबित मुद्दों—जैसे कि क्रिटिकल रेयर-अर्थ मिनरल्स के निर्यात नियंत्रण और फेंटानिल प्रीकर्सर रसायनों की रोकथाम—पर अंतिम और व्यापक समझौते तक पहुंचने का पर्याप्त समय मिल सकेगा।
हालांकि, इस समझौते का असर वैश्विक स्तर पर भी महसूस किया जाएगा। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिकी बाजार में चीनी खिलौनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता सामानों पर टैरिफ कम होता है, तो भारत और वियतनाम जैसे देशों के निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ सकती है। फिर भी, दोनों शीर्ष शक्तियों के बीच ट्रेड वॉर का थमना अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन की स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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