
अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। रोजाना लाखों की संख्या में उमड़ रही भीड़ के बीच अयोध्या के स्थानीय निवासियों को रामलला के दर्शन करने में भारी दिक्कतों और घंटों लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय नागरिकों की इस लंबे समय से चली आ रही मांग और परेशानी को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अयोध्या जिला प्रशासन ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। अब अयोध्या धाम और आसपास के स्थानीय निवासियों के लिए मंदिर परिसर में एक अलग और विशेष प्रवेश द्वार (डेडिकेटेड लेन) बनाया जा रहा है, जहां वे केवल अपना आधिकारिक आधार कार्ड दिखाकर सुगमता से प्रवेश पा सकेंगे।
स्थानीय श्रद्धालुओं को क्यों पड़ी अलग व्यवस्था की जरूरत?
राम मंदिर खुलने के बाद से अयोध्या में सामान्य दिनों में भी 1 लाख से लेकर 1.5 लाख और सप्ताहांत व त्योहारों पर 2 से 3 लाख तक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में दर्शन मार्ग पर सुरक्षा जांच और कतारों में 4 से 6 घंटे तक का समय लग जाता है। अयोध्या के स्थानीय संतों, व्यापारियों और आम नागरिकों का कहना था कि वे पीढ़ियों से रामलला के नियमित दर्शन करते आए हैं, लेकिन भारी भीड़ के चलते उनके लिए रोजाना या नियमित अंतराल पर दर्शन करना लगभग असंभव हो गया था। स्थानीय संगठनों ने ट्रस्ट और प्रशासन के समक्ष मांग रखी थी कि नगरवासियों की श्रद्धा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कोई व्यावहारिक रास्ता निकाला जाए।
आधार कार्ड बनेगा पहचान, ऐसे मिलेगी सीधी एंट्री
तैयार की जा रही कार्ययोजना के अनुसार, मंदिर के प्रवेश द्वारों पर एक विशेष काउंटर और पृथक बैरिकेडिंग लेन स्थापित की जाएगी। इस लेन से केवल वही श्रद्धालु प्रवेश कर सकेंगे जिनके पास अयोध्या नगर निगम क्षेत्र या जिले के पते वाला वैध पहचान पत्र यानी आधार कार्ड होगा। सुरक्षा जांच प्वाइंट पर तैनात सुरक्षाकर्मी और ट्रस्ट के प्रतिनिधि बारकोड या मैन्युअल वेरिफिकेशन के जरिए स्थानीय पते की पुष्टि करेंगे। सत्यापन होते ही इन श्रद्धालुओं को सामान्य कतार में लगे बिना सीधे आंतरिक परिक्रमा और दर्शन दीर्घा की ओर भेज दिया जाएगा, जिससे उनका दर्शन 15 से 20 मिनट के भीतर संपन्न हो सकेगा।
भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों से नहीं होगा कोई समझौता
ट्रस्ट के पदाधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों को सुविधा देने के साथ-साथ मंदिर की त्रि-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाएगा। आधार कार्ड की जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस सुविधा का कोई दुरुपयोग न हो या बाहर से आने वाले श्रद्धालु इस लेन में न घुसें। इसके लिए प्रवेश द्वार पर डिजिटल स्कैनिंग सिस्टम लगाने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही, स्थानीय लोगों के लिए दिन के कुछ विशेष समय स्लॉट भी तय किए जा सकते हैं, जैसे सुबह आरती के बाद या दोपहर के समय, ताकि बाहर से आए तीर्थयात्रियों के सामान्य प्रवाह पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
नगरवासियों और साधु-संतों में खुशी की लहर
इस प्रस्तावित व्यवस्था की खबर सामने आते ही अयोध्या के संतों, धर्माचार्यों और स्थानीय नागरिकों ने ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह निर्णय अयोध्यावासियों के भावनात्मक जुड़ाव का सम्मान करता है। अब बुजुर्ग, महिलाएं और नियमित दर्शनार्थी बिना किसी शारीरिक परेशानी के अपने आराध्य के दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन जल्द ही इसके बुनियादी ढांचे का ट्रायल रन पूरा कर इसे औपचारिक रूप से लागू करने की तारीख की घोषणा करेगा।
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