‘जिसने हिंदू धर्म को गंदा बोला, उसका नाम मत लो’: दुर्गा पूजा पंडाल में ममता बनर्जी पर भड़के शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल में शारदीय दुर्गा पूजा के पावन और भव्य उत्सव के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का पारा एक बार फिर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। राज्य में दुर्गा पूजा पंडालों के भ्रमण और पूजा उत्सव पर बातचीत के दौरान जब मीडियाकर्मियों ने ममता बनर्जी से जुड़ा सवाल पूछा, तो शुभेंदु अधिकारी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दो टूक नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि पूजा पंडाल जैसे पवित्र स्थान पर ऐसे लोगों का नाम लेना भी वर्जित होना चाहिए जिन्होंने हिंदू धर्म को ‘गंदा धर्म’ कहकर संबोधित किया था।

‘पवित्र मंडप में उनका नाम मत लीजिए’: क्या बोले शुभेंदु अधिकारी?

दुर्गा पूजा के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “दुर्गा पूजा पंडाल के भीतर उसका (ममता बनर्जी का) नाम मत लीजिए। जिसने हिंदू धर्म को ‘गंदा धर्म’ (Dirty Religion) बताया था, उनका नाम दुर्गा पूजा पंडाल में कतई नहीं लिया जाना चाहिए।” शुभेंदु अधिकारी का यह तल्ख बयान सीधे तौर पर ममता बनर्जी के उन पुराने भाषणों और बयानों की ओर इशारा था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर भाजपा द्वारा प्रचारित हिंदू धर्म के स्वरूप पर टिप्पणी करते हुए विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस बयान को लेकर पहले सिलीगुड़ी सहित कई स्थानों पर उनके खिलाफ आपराधिक शिकायतें भी दर्ज कराई गई थीं।

12,400 नई दुर्गा पूजाओं को अनुमति: पिछली सरकार पर साधा निशाना

शुभेंदु अधिकारी ने इस दौरान पिछली तृणमूल सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले बंगाल में धार्मिक आयोजनों और पूजा समितियों पर कई तरह की बंदिशें लगाई जाती थीं। उन्होंने दावा किया:

  • सनातन विरोधी रुख का आरोप: अधिकारी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार सनातन विरोधी मानसिकता से काम कर रही थी और कई क्षेत्रों में नई पूजा समितियों को अनुमति देने से रोकती थी।

  • रिकॉर्ड स्वीकृतियां: उन्होंने बताया कि इस बार पूरे बंगाल में व्यापक सनातनी माहौल है और 12,400 से अधिक नई दुर्गा पूजाओं को विधिवत अनुमति प्रदान की गई है, जिससे उत्सव का स्वरूप अभूतपूर्व हो गया है।

उत्सव के बीच तीखा ध्रुवीकरण

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक संवाद का सबसे बड़ा मंच मानी जाती है। पूजा पंडालों के उद्घाटन से लेकर आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी हमेशा से जनता के बीच संदेश देने का जरिया रही है। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी का पंडालों के भीतर से ममता बनर्जी के बहिष्कार का आह्वान करना और उनके पुराने बयानों को उछालना यह दर्शाता है कि बंगाल की राजनीति में ‘सनातनी अस्मिता’ का मुद्दा आने वाले दिनों में और गहराने वाला है।

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