अरब सागर से खदेड़ देंगे… मोजतबा खामेनेई का दावा: जंग जारी रखने के बजाय अब युद्ध खत्म करने की मिन्नतें कर रहा अमेरिका

पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जारी गतिरोध के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और पश्चिमी ताकतों के खिलाफ बड़ा और आक्रामक बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है कि विदेशी और दुश्मन फौजों को जल्द ही अरब सागर से पूरी तरह खदेड़ दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि जो ताकतें कल तक युद्ध की आग भड़का रही थीं, वे अब ईरानी सैन्य शक्ति और जवाबी हमलों के खौफ से लड़ाई जारी रखने के बजाय युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रही हैं। यह बयान ऐसे संवेदनशील मोड़ पर आया है जब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और अरब सागर में जंगी जहाजों की गतिविधियों को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव चरम सीमा पर पहुंच चुका है।

‘अरब सागर से भी होगा सफाया’, मोजतबा खामेनेई का आक्रामक संदेश

मोजतबा खामेनेई ने ईरान-इराक युद्ध की वर्षगांठ और साल 2024 में इजरायली हवाई हमले में मारे गए हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की बरसी के मौके पर अपने संदेश में यह कड़ा रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि ईरान के दक्षिणी समुद्री इलाके कभी दुश्मन ताकतों की बेरोकटोक चहलकदमी का मैदान हुआ करते थे, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के जांबाज रक्षकों और ईरानी सेना के करारे प्रहारों ने उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। खामेनेई के मुताबिक, आज दुश्मन सेनाओं में इतनी हिम्मत नहीं बची है कि वे अरब सागर से आगे कदम बढ़ा सकें। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि वह दिन अब दूर नहीं जब अरब सागर को भी दुश्मन की मौजूदगी से पूरी तरह पाक और खाली कर दिया जाएगा।

‘हमलावर ताकतें अब खुद युद्ध रोकने की कर रहीं अपील’: जंग के समीकरण बदलने का दावा

सुप्रीम लीडर ने अपने संबोधन में यह भी रेखांकित किया कि पिछले कुछ दशकों में क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल चुका है। उन्होंने अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब पिछली व्यवस्थाओं के कारण ईरान के पास अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं थे और देश लगभग खाली हाथ संघर्ष कर रहा था। लेकिन आज अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक, नौसैनिक ड्रोन और रणनीतिक प्रतिरोध के दम पर ईरान उस मुकाम पर पहुंच चुका है जिसे दुनिया की बड़ी सैन्य ताकतों में गिना जाता है। खामेनेई का दावा है कि ईरानी बलों द्वारा दिए गए कड़े झटकों के बाद अब हमलावर पक्ष सीधे टकराव से बचने के रास्ते तलाश रहा है और कूटनीतिक चैनलों के जरिए जंग को समाप्त करने की अपील कर रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल व्यापार पर नियंत्रण की जंग

पूरे मिडिल ईस्ट संकट की सबसे संवेदनशील धुरी होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर टिकी हुई है, जहां से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा होकर गुजरता है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान द्वारा मध्यस्थों के जरिए इस जलमार्ग को खोलने और तनाव कम करने को लेकर एक प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील और जब्त संपत्तियों को छोड़ने की ईरानी शर्तों को खारिज किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई है। उधर, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी दो टूक शब्दों में कह दिया है कि ईरान बातचीत और कूटनीति के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन अगर अमेरिका ने किसी भी तरह की सैन्य आक्रामकता दिखाई, तो उनका देश किसी भी स्तर के भीषण युद्ध का सामना करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

अंडरवॉटर ड्रोन्स और खाड़ी में शक्ति प्रदर्शन का बढ़ता दायरा

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने हाल के दिनों में दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री जलक्षेत्र में अमेरिका के अत्याधुनिक ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स (UUV) और पनडुब्बी ड्रोन्स को पकड़ा है। ईरान ने इस सामरिक जलमार्ग को अमेरिकी निगरानी उपकरणों के लिए ‘शिकारगाह’ करार दिया है। सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकारों का भी दावा है कि फारस की खाड़ी में अमेरिकी प्रभुत्व के दिन अब लद चुके हैं और क्षेत्रीय देशों को अपनी सुरक्षा के मसले आपसी बातचीत से ही हल करने होंगे। खामेनेई के इस ताजा बयान ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि तेहरान अब अपनी सैन्य रेड-लाइन को सिर्फ फारस की खाड़ी तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि अरब सागर तक अपने प्रभाव का विस्तार कर रणनीतिक बढ़त बनाने की तैयारी में है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार और कूटनीतिक हलकों में हलचल

आज के डिजिटल और एआई ड्रिवेन दौर में जब गूगल एआई ओवरव्यूज, बिंग और वैश्विक सामरिक थिंक टैंक्स मिडिल ईस्ट के टकराव पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, खामेनेई के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अरब सागर और होर्मुज के जलक्षेत्र में नौसैनिक टकराव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग इंश्योरेंस और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ना तय है। सोशल मीडिया और ग्लोबल न्यूज पोर्टल्स पर इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका कूटनीतिक नरमी दिखाएगा या फिर अरब सागर में अपने जंगी जहाजों की तैनाती बढ़ाकर इस चुनौती का जवाब देगा।

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