अल नीनो के प्रकोप से 3 देशों में घोषित हुई राष्ट्रीय इमरजेंसी, पनामा नहर से लेकर खेतों तक मचा हाहाकार

मध्य अमेरिकी देश इन दिनों सदी के सबसे गंभीर और खौफनाक जल संकट से जूझ रहे हैं। बारिश की भारी कमी, रिकॉर्ड तोड़ तापमान और नदियों के सूखने के चलते इलाके में मानवीय त्रासदी जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि मध्य अमेरिका के तीन प्रमुख देशों—होंडुरास, अल साल्वाडोर और पनामा ने अपने-अपने यहां आधिकारिक तौर पर आपातकाल (State of Emergency / Red Alert) घोषित कर दिया है।

इस भीषण सूखे का असर न केवल स्थानीय कृषि और खाद्य सुरक्षा पर पड़ा है, बल्कि दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक ‘पनामा नहर’ में भी पानी का स्तर खतरनाक स्तर तक गिर गया है, जिससे वैश्विक व्यापार की रफ्तार थमने लगी है।

किन 3 देशों में लगी इमरजेंसी और क्या हैं जमीनी हालात?

मध्य अमेरिका के ‘ड्राई कॉरिडोर’ (Central American Dry Corridor) में फैले इस सूखे ने लाखों परिवारों की रोजी-रोटी छीन ली है:

  • होंडुरास (Honduras): होंडुरास सरकार ने सूखे के खतरे को देखते हुए देश के 100 से अधिक नगर पालिकाओं (Municipalities) में ‘रेड अलर्ट’ और राष्ट्रीय आपदा की स्थिति घोषित की है। यहां मक्का और फलियों की 60 से 80 प्रतिशत फसलें खेतों में ही सूख कर बर्बाद हो चुकी हैं।

  • अल साल्वाडोर (El Salvador): देश के पर्यावरण मंत्रालय ने कृषि और मौसम संबंधी सूखे के चलते उच्चतम स्तर का ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। अगस्त के महीने में देश में लगातार 19 दिनों तक बारिश की एक बूंद नहीं गिरी और तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा, जिसने पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड तोड़ दिए।

  • पनामा (Panama): पनामा सरकार ने कैबिनेट स्तर पर प्रस्ताव पारित कर पूरे देश में इमरजेंसी लागू की है। देश के 11 प्रमुख जलक्षेत्र (Watersheds) पानी की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे पनबिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति ठप होने के कगार पर पहुंच गई है।

सूखे के पीछे का सबसे बड़ा कारण क्या है?

अंतरराष्ट्रीय जलवायु विज्ञानियों और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट के पीछे तीन प्रमुख कारक जिम्मेदार हैं:

  1. अल नीनो (El Niño) का उग्र रूप: इस विनाशकारी सूखे की मुख्य वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) में ‘अल नीनो’ प्रभाव का अत्यधिक मजबूत होना है। जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म होता है, तो हवाओं और बादलों का रुख बदल जाता है। इसके प्रभाव से मध्य अमेरिका में सामान्य मानसूनी बारिश रुक जाती है और शुष्क हवाएं चलने लगती हैं। अमेरिकी एजेंसी NOAA के मुताबिक, इस साल अल नीनो की तीव्रता ऐतिहासिक रूप से बेहद खतरनाक दर्ज की जा रही है।

  2. क्लाइमेट चेंज और हीटवेव: ग्लोबल वार्मिंग के चलते मध्य अमेरिका में जून से अगस्त के दौरान लगातार ‘हीटवेव’ का प्रकोप रहा। भीषण गर्मी के कारण जमीन की नमी पूरी तरह खत्म हो गई और जलाशयों का पानी तेजी से वाष्पीकृत हो गया।

  3. ड्राई कॉरिडोर की भौगोलिक संवेदनशीलता: मध्य अमेरिका का यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रति अति-संवेदनशील माना जाता है। यहां रहने वाले अधिकांश छोटे किसान केवल मौसमी बारिश पर निर्भर हैं, उनके पास आधुनिक सिंचाई तंत्र नहीं है।

पनामा नहर पर संकट: वैश्विक सप्लाई चेन पर असर

पनामा में पानी की कमी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत के होश उड़ा दिए हैं। पनामा नहर को जहाजों के आवागमन (Locks System) के लिए मीठे पानी की झीलों (जैसे गैटुन झील) से अरबों लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

  • जलस्तर गिरने के कारण पनामा कैनाल अथॉरिटी ने नहर से गुजरने वाले जहाजों की दैनिक संख्या और उनके माल ले जाने की क्षमता (ड्राफ्ट सीमा) को घटा दिया है।

  • जहाजों को नहर पार करने के लिए हफ्तों तक कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे अमेरिका, एशिया और यूरोप के बीच होने वाले कंटेनर शिपिंग की माल ढुलाई लागत में भारी उछाल आ गया है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) की चेतावनी: भुखमरी और पलायन का खतरा

संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी जारी की है कि इस सूखे के कारण मध्य अमेरिका में 35 लाख से अधिक लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा और भुखमरी के मुहाने पर खड़े हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत खाद्यान्न सहायता नहीं पहुंचाई, तो फसलों के नुकसान और भुखमरी के चलते लाखों ग्रामीण नागरिक अपने घरों को छोड़कर अमेरिका और मेक्सिको की उत्तरी सीमाओं की ओर पलायन (Mass Migration) करने को मजबूर हो जाएंगे।

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