असम में हिरासत से छूटते ही गरजे आशुतोष रांका; 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान

असम की राजधानी गुवाहाटी में पुलिस हिरासत से रिहा होने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और असम में परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर तीखे तेवर अपनाए रांका ने साफ कर दिया है कि पुलिसिया दमन के आगे पार्टी झुकने वाली नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक सीजेपी का आंदोलन पीछे नहीं हटेगा।

रविवार को गुवाहाटी में करीब 40 कार्यकर्ताओं के साथ हिरासत में लिए जाने और लगभग 10 घंटे तक थाने में रखे जाने के बाद सोमवार को दिसपुर स्थित राज्य सचिवालय के सामने उसी स्थान से उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जहां से उन्हें उठाया गया था।

‘यह हिरासत नहीं, सीधा अपहरण था’: पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशुतोष रांका ने असम पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह से असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दिया। उन्होंने कहा कि वे कोई गैरकानूनी जमावड़ा नहीं कर रहे थे, बल्कि दिसपुर में राज्य सचिवालय के सामने स्थित चौधरी टीला पर असम जातीय परिषद के नेता के निजी आवास पर वॉलंटियर्स के साथ एक शांतिपूर्ण बैठक में शामिल होने पहुंचे थे।

रांका ने कहा, “यह कोई औपचारिक हिरासत नहीं थी, बल्कि इसे एक तरह का अपहरण कहा जाना चाहिए क्योंकि हमें एक निजी संपत्ति से बिना किसी पूर्व नोटिस या वारंट के उठाया गया। जब हमने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से पूछा कि हमें किस आधार या धारा के तहत रोका जा रहा है, तो उनका केवल एक ही रटा-रटाया जवाब था—’सर, ऊपर से आदेश है।’ सरकार पुलिस को आगे करके युवाओं और छात्रों की आवाज को डराने की कोशिश कर रही है। लेकिन वे जितना दबाएंगे, यह क्रांति उतनी ही तेजी से पूरे पूर्वोत्तर में फैलेगी।'”

ज्ञानेश कुमार पर 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने का आरोप

आशुतोष रांका ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप दोहराए। उन्होंने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के नाम पर देश भर में कथित तौर पर करोड़ों पात्र नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं।

  • असम परिसीमन पर सवाल: रांका ने आरोप लगाया कि असम में जिस तरह से विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्गठन (Delimitation) किया गया, उससे कई गांवों को तीन-तीन अलग-अलग विधानसभाओं में बांट दिया गया ताकि चुनावी गणित को प्रभावित किया जा सके।

  • इस्तीफे के लिए दिया था अल्टीमेटम: उन्होंने कहा कि सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार को अपने पद से त्यागपत्र देने के लिए 48 घंटे की मोहलत दी थी। अब वह गेंद सीजेपी के पाले में है और पार्टी देश भर में सड़कों पर उतरेगी।

2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

आशुतोष रांका ने ऐलान किया कि गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रही है। मुंबई और दिल्ली समेत देश के विभिन्न महानगरों और राज्यों में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और सत्याग्रह किया जाएगा।

मुंबई में प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने की खबरों पर भी उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी और सवाल किया कि जब करोड़ों लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर कैंची चलाई जा रही थी, तब किससे अनुमति ली गई थी? सीजेपी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की बहाली के लिए पीछे नहीं हटेगी।

असम और पूर्वोत्तर में नेटवर्क विस्तार की योजना

हिरासत से रिहा होने के बाद रांका ने साफ किया कि असम में स्थानीय विपक्षी दलों, रायजोर दल के प्रतिनिधियों और छात्र संगठनों के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है। सीजेपी केवल असम ही नहीं, बल्कि मेघालय, त्रिपुरा और नागालैंड सहित पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी छात्रों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों से जुड़े बुनियादी मुद्दों—जैसे स्कूलों की जर्जर हालत और शिक्षा व्यवस्था के सुधार—को लेकर अपना अभियान जारी रखेगी।

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