
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने हालिया विरोध-प्रदर्शनों और अपने साथियों की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। विदेशी फंडिंग और बाहरी ताकतों से प्रभावित होने के आरोपों पर पलटवार करते हुए दीपके ने कहा कि सत्ता पक्ष के लोग सीजेपी जैसे छात्र-युवा आंदोलनों पर बेबुनियाद आरोप लगाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि मौजूदा सरकार खुद अमेरिका और विदेशी दबाव के आगे देश के हितों से समझौता कर रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ घटाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव में फैसले लेने वाले अब सवाल पूछने वाले युवाओं पर लांछन लगा रहे हैं।
‘आरोप सीजेपी पर और खुद विदेशी दबाव में समझौते’: दीपके का पलटवार
अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया वीडियो संदेश और बयानों में सत्ताधारी दल के उन दावों को आड़े हाथों लिया, जिनमें विपक्षी व छात्र आंदोलनों को ‘विदेशी ताकतों से प्रेरित’ बताया जाता रहा है। दीपके ने सवाल उठाया कि जब भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और रणनीतिक मुद्दों की बात आती है, तब अमेरिकी प्रशासन के हल्के से दबाव में भी देश के हितों को ताक पर रख दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग अमेरिकी वस्तुओं पर शून्य या कम टैरिफ करने पर सहमत हो जाते हैं, वे आज रोजगार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं के अधिकारों की बात करने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर विदेशी हाथ होने का मनगढ़ंत आरोप मढ़ रहे हैं।
पुलिस और एजेंसियों के पीछे छिपने का आरोप, साथियों की हिरासत पर साधा निशाना
दीपके ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान साथी कार्यकर्ताओं (सौरव दास और आशुतोष रांका) की गिरफ्तारी और हिरासत अवधि बढ़ाए जाने को लेकर सरकार के ‘मजबूत नेता’ वाले दावे पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि 26-27 साल के नौजवानों से डरकर पूरी दिल्ली में पुलिस बल और बैरिकेड्स खड़े कर देना ताकत नहीं, बल्कि सत्ता की कमजोरी दर्शाता है। दीपके ने कहा कि असली ताकत जेल जाने से न डरने वाले युवाओं में है, न कि सत्ता तंत्र और सरकारी मशीनरी की आड़ लेकर लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने में।
‘युवाओं के मन से भय पूरी तरह खत्म हो चुका है’
बॉलीवुड फिल्म ‘मैरी कॉम’ के एक संवाद का संदर्भ देते हुए दीपके ने कहा कि किसी को इतना भी नहीं डराना चाहिए कि उसके भीतर से डर ही समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्र-युवाओं को डराने के लिए जितना जोर लगाना था लगा लिया, लेकिन अब देश के युवाओं के मन से यह भय पूरी तरह गायब हो चुका है। दीपके ने साफ किया कि चाहे कितनी भी पुलिस तैनात कर दी जाए या कानूनी शिकंजा कसा जाए, वे युवाओं के भविष्य, बेरोजगारी और परीक्षा में धांधली जैसे जरूरी मुद्दों पर सवाल पूछना बंद नहीं करेंगे।
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