
आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी के नाम से जाना जाता है। पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के दौरान पड़ने के कारण इस एकादशी का सनातन धर्म में असाधारण आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि जो व्यक्ति विधि-विधान से इस व्रत का पालन करता है और उसका पुण्य अपने पूर्वजों को समर्पित करता है, उसके पितरों को यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलकर बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
क्या मंगलवार को रखा जाएगा इंदिरा एकादशी का व्रत?
हिंदू पंचांग और उदयातिथि के नियमों के अनुसार:
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एकादशी तिथि का प्रारंभ: सोमवार, 5 अक्टूबर की शाम/रात्रि से।
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उदयातिथि और व्रत का दिन: मंगलवार, 6 अक्टूबर को सूर्योदय काल में एकादशी तिथि व्याप्त होने के कारण गृहस्थ और वैष्णव परंपरा के अनुयायियों द्वारा इंदिरा एकादशी का मुख्य उपवास मंगलवार को ही रखा जाएगा।
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पारण का समय: व्रत का पारण अगले दिन यानी बुधवार (द्वादशी तिथि) को शुभ मुहूर्त में किया जाएगा।
इंदिरा एकादशी पर अवश्य करें ये विशेष उपाय
पितृ पक्ष में इस एकादशी के पड़ने के कारण यह दिन पितृ ऋण और पितृ दोष से मुक्ति पाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। इस दिन निम्नलिखित उपाय करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है:
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शालिग्राम जी और तुलसी अर्चन: भगवान विष्णु के विग्रह स्वरूप शालिग्राम जी का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें पीले चंदन का तिलक लगाएं और तुलसी दल (तुलसी पत्र एकादशी से एक दिन पहले तोड़ लें) अर्पित करें।
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पितरों के निमित्त तर्पण व संकल्प: प्रातःकाल स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके हाथ में जल, कुश, अक्षत और काले तिल लेकर अपने पितरों के निमित्त एकादशी व्रत के पुण्य फल का दान करने का संकल्प लें। इससे पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है।
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गीता के 7वें या 11वें अध्याय का पाठ: इस दिन श्रीमद्भगवद्गीता के 7वें या 11वें अध्याय का पाठ करें अथवा विष्णु सहस्रनाम का जप करें। इसका फल पूर्वजों को समर्पित करने से उनकी आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।
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पीपल के वृक्ष की पूजा व दीपदान: दोपहर या शाम के समय पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्चा दूध, जल और काले तिल अर्पित करें। शाम के समय सरसों के तेल या घी का दीपक पीपल के नीचे जलाएं, क्योंकि मान्यता है कि पीपल में त्रिदेवों और पितरों का वास होता है।
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पंचबलि और ब्राह्मण भोज: गाय, कुत्ते, कौवे, चींटियों और पक्षियों को भोजन (ग्रास) अवश्य निकालें। अगले दिन पारण से पहले किसी सुपात्र ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न, वस्त्र और ऋतुफल का दान दें।
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