\

उत्तर कोरिया के तानाशाह शासक किम जोंग उन की परमाणु हथियारों को लेकर जिद पूरी दुनिया के लिए एक नए और अदृश्य खतरे का सबब बन गई है। वैज्ञानिकों और भूभौतिकी विशेषज्ञों (Geophysicists) ने एक चौंकाने वाली चेतावनी जारी करते हुए खुलासा किया है कि उत्तर कोरिया द्वारा किए गए लगातार भूमिगत परमाणु परीक्षणों ने उस भौगोलिक क्षेत्र को सक्रिय कर दिया है, जो पिछले 2000 वर्षों से पूरी तरह शांत और निष्क्रिय पड़ा हुआ था। परमाणु विस्फोटों की भीषण तीव्रता और उससे पैदा हुई प्रचंड ऊर्जा ने जमीन के भीतर की टेक्टोनिक प्लेटों और फाल्ट लाइनों को इतना गंभीर नुकसान पहुंचाया है कि यह इलाका अब एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र (Active Seismic Zone) में तब्दील हो चुका है। धरती की इस आंतरिक हलचल ने न केवल उत्तर कोरिया, बल्कि दक्षिण कोरिया, चीन और पूरे प्रायद्वीप के वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है।
पुंग्ये-री के नीचे सक्रिय हुआ फॉल्ट, अब तक दर्ज हुए 1399 से ज्यादा भूकंप के झटके
यह भयावह संकट उत्तर कोरिया के कुख्यात परमाणु परीक्षण स्थल पुंग्ये-री (Punggye-ri) और उसके नजदीकी पहाड़ी क्षेत्रों के नीचे पनपा है। विशेषज्ञों के अनुसार, किम जोंग उन ने वर्ष 2006 से लेकर अब तक जितने भी शक्तिशाली भूमिगत परमाणु और हाइड्रोजन बम परीक्षण किए, उनके झटके सीधे तौर पर माउंट मंटैप (Mount Mantap) और उसके आसपास की आंतरिक चट्टानों पर पड़े। जमीन के सैकड़ों मीटर नीचे हुए इन कृत्रिम विस्फोटों के दबाव ने उस प्राचीन फॉल्ट को झकझोर कर जगा दिया, जो ईसा पूर्व से शांत पड़ा था। अंतरराष्ट्रीय सीस्मोलॉजिकल एजेंसियों के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 में किए गए देश के सबसे शक्तिशाली छठे परमाणु परीक्षण के बाद से अब तक इस इलाके में छोटे-बड़े मिलाकर 1399 से ज्यादा भूकंपीय झटके (Earthquake Swarms) दर्ज किए जा चुके हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सामान्य भूकंप नहीं हैं, बल्कि यह ‘इंड्यूस्ड सीस्मिसिटी’ यानी इंसानी हरकतों की वजह से सक्रिय हुई भूगर्भीय तबाही का जीता-जागता प्रमाण हैं।
माउंट पेक्टू ज्वालामुखी के फटने का मंडराया महाविनाशकारी खतरा
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे डरावनी बात यह है कि सक्रिय हुआ यह भूकंप जोन ऐतिहासिक और पवित्र माने जाने वाले सक्रिय ज्वालामुखी ‘माउंट पेक्टू’ (Mount Paektu) के बेहद करीब स्थित है। माउंट पेक्टू को दुनिया के सबसे विनाशकारी ज्वालामुखियों में गिना जाता है, जिसने 946 ईस्वी में इतिहास का सबसे भयावह ‘मिलेनियम विस्फोट’ दर्ज कराया था। वैज्ञानिकों को डर सता रहा है कि लगातार आ रहे इन 1399 झटकों के चलते यदि जमीन के नीचे का फॉल्ट और ज्यादा खिसका, तो माउंट पेक्टू के नीचे मौजूद मैग्मा चैंबर पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा। यदि यह ज्वालामुखी दोबारा फट पड़ता है, तो इससे निकलने वाली जहरीली गैसें, राख और लावा उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, चीन और जापान के कई हिस्सों को अपनी चपेट में ले सकते हैं, जिससे पूरे पूर्वी एशिया में एक अभूतपूर्व पर्यावरणीय और मानवीय आपदा खड़ी हो जाएगी।
रेडिएशन लीक और ‘टायर्ड माउंटेन सिंड्रोम’ से घिरी इंसानी आबादी
भूगर्भीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि माउंट मंटैप की चट्टानें अब ‘टायर्ड माउंटेन सिंड्रोम’ (Tired Mountain Syndrome) से ग्रसित हो चुकी हैं, जिसका सीधा मतलब है कि बार-बार के विस्फोटों से पहाड़ का अंदरूनी ढांचा पूरी तरह कमजोर होकर खोखला हो चुका है। यदि इस इलाके में आगे कोई और न्यूक्लियर टेस्ट किया गया, तो पूरा पहाड़ ढह सकता है। इससे जमीन के भीतर दफन भारी मात्रा में रेडियोधर्मी तत्व (Radioactive Fallout) हवा और स्थानीय जल स्रोतों में लीक हो सकते हैं। हालिया रिपोर्टों में यह भी आशंका जताई गई है कि पुंग्ये-री के आसपास बहने वाली नदियों के माध्यम से रेडिएशन उन क्षेत्रों तक फैल सकता है जहां लाखों आम नागरिक रहते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सुरक्षा एजेंसियां अब यह समझने में जुटी हैं कि उत्तर कोरिया के इस अनियंत्रित परमाणु दुस्साहस से धरती के भीतर छिड़ी इस हलचल को कैसे रोका जाए, क्योंकि प्रकृति का यह असंतुलन किसी भी आधुनिक युद्ध से ज्यादा विनाशकारी साबित हो सकता है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया