
भारतीय टेलीविजन के सबसे प्रतिष्ठित और पारिवारिक क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन सुनील पाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए शो के मेकर्स और होस्ट अमिताभ बच्चन पर कड़े शब्दों में निशाना साधा है। दरअसल, हाल ही में केबीसी के सेट से स्टैंड-अप कॉमेडियन गौरव कपूर और गौरव गुप्ता के कुछ वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं, जिसमें वे शो में बतौर स्पेशल गेस्ट नजर आ रहे थे। इन कलाकारों की शो में मौजूदगी की खबर मिलते ही सुनील पाल का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अपनी बात रखते हुए कहा कि केबीसी जैसे गरिमामयी मंच पर ऐसे लोगों को आमंत्रित करना बेहद गलत है, जो अपनी कॉमेडी में अभद्र भाषा या दोहरे अर्थ वाले संवादों का इस्तेमाल करते हैं।
अमिताभ बच्चन से पूछा- क्या इनके भरोसे अब शो चलाएंगे
सुनील पाल ने अपने वीडियो संदेश में सीधे तौर पर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को संबोधित करते हुए कई तीखे सवाल दागे। उन्होंने कहा कि कौन बनेगा करोड़पति को बच्चे, युवा और बुजुर्ग—हर उम्र के लोग अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर देखते हैं। ऐसे में शो के कंटेंट और मेहमानों की गरिमा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सुनील पाल ने कहा कि केबीसी में कंटेस्टेंट्स से 14 सवाल पूछे जाते हैं, लेकिन 15वां सवाल अब देश की जनता और दुनिया आपसे पूछेगी। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अमिताभ बच्चन जैसे महान और दिग्गज कलाकार को अब अपना शो चलाने के लिए इन लोगों के सहारे की जरूरत पड़ गई है? उनका कहना था कि जब कोई कलाकार इतने ऊंचे मुकाम पर होता है, तो उसे समाज और आने वाली पीढ़ी के प्रति अपनी जिम्मेदारी को सबसे पहले रखना चाहिए।
मेकर्स को दी चेतावनी: गाली-गलौज वाली कॉमेडी को मंच न दें
वीडियो में सुनील पाल ने चैनल और शो की प्रोडक्शन टीम पर भी जमकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह काफी समय से मेकर्स से यह अपील कर रहे हैं कि गाली-गलौज और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले यूट्यूबर्स या कॉमेडियन्स को इस तरह के प्रतिष्ठित मंचों पर न बुलाया जाए। सुनील का तर्क है कि जब ऐसे कलाकारों को नेशनल टेलीविजन पर प्राइम टाइम में जगह मिलती है, तो समाज में यह गलत संदेश जाता है कि फूहड़ता और अभद्रता को भी पहचान और सम्मान मिल सकता है। उन्होंने साफ किया कि वह किसी व्यक्ति विशेष के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि उस शैली और भाषा के खिलाफ हैं जिसे कॉमेडी के नाम पर परोसा जा रहा है। उनका मानना है कि पारिवारिक शोज को साफ-सुथरा और हर वर्ग के अनुकूल ही बने रहना चाहिए।
पहले भी समय रैना और मॉडर्न स्टैंड-अप पर उठा चुके हैं उंगली
यह पहला मौका नहीं है जब सुनील पाल ने नए दौर के स्टैंड-अप कॉमेडियन्स पर हमला बोला हो। इससे पहले जब कॉमेडियन समय रैना केबीसी और अन्य टेलीविजन रियलिटी शोज में नजर आए थे, तब भी सुनील पाल ने खुलकर ऐतराज जताया था। समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के दौरान हुए विवादों पर भी सुनील पाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। सुनील लगातार यह मुद्दा उठाते रहे हैं कि ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ के दौर की कॉमेडी में शब्दों की मर्यादा और पारिवारिक संवेदनाएं शामिल होती थीं, जबकि आज इंटरनेट पर व्यूज और लोकप्रियता हासिल करने के लिए कई कलाकार गाली-गलौज और वल्गर जोक्स का सहारा ले रहे हैं। सुनील का कहना है कि मेनस्ट्रीम मीडिया को ऐसे ट्रेंड्स को बढ़ावा देने के बजाय साफ-सुथरे हास्य को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, यूजर्स दो धड़ों में बंटे
सुनील पाल का यह वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर सिनेमा और कॉमेडी प्रेमियों के बीच जबरदस्त बहस छिड़ गई है। एक वर्ग सुनील पाल के विचारों का पूरा समर्थन कर रहा है और उनका कहना है कि केबीसी जैसे ज्ञानवर्धक और पारिवारिक शो में मेहमानों का चयन बहुत सोच-समझकर होना चाहिए, ताकि बच्चे गलत प्रभाव से बच सकें। वहीं, दूसरी तरफ मॉडर्न स्टैंड-अप कॉमेडी के फैंस का मानना है कि गौरव कपूर और गौरव गुप्ता जैसे कलाकार अपनी साफ-सुथरी और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन पर इस तरह का सामान्य आरोप लगाना अनुचित है। लोगों का यह भी कहना है कि केबीसी में हर विधा के लोकप्रिय चेहरों को आमंत्रित किया जाता है और नेशनल टीवी पर वे शो की मर्यादा के अनुसार ही अपनी बात रखते हैं। फिलहाल शो के मेकर्स या अमिताभ बच्चन की तरफ से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारतीय टेलीविजन की मर्यादा और हास्य का भविष्य
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक मनोरंजन की सीमाएं कहां तक होनी चाहिए। डिजिटल स्पेस में जहां बिना किसी सेंसरशिप के हर तरह का कंटेंट उपलब्ध है, वहीं टेलीविजन अब भी भारतीय घरों में साझा मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। ऐसे में यह बहस लगातार तेज हो रही है कि क्या ओटीटी और यूट्यूब के ट्रेंड्स को टीवी पर उसी रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए या फिर भारतीय टेलीविजन को अपने पारंपरिक और संस्कारी ढांचे को बचाए रखना चाहिए। सुनील पाल का यह बयान केवल केबीसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक असंतोष की आवाज भी है जो आज के दौर के कई सीनियर कलाकार आधुनिक कॉमेडी की दिशा को लेकर महसूस कर रहे हैं।
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