कौन हैं जाहरा पेजेश्कियन? ब्रिक्स समिट में पिता के साथ पहुंचीं ईरानी राष्ट्रपति की बेटी, सादगी और भारतीय शिल्प से बटोरीं सुर्खियां

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में जहां एक तरफ दुनिया के सबसे बड़े राजनीतिक नेताओं की कूटनीतिक वार्ताओं और वैश्विक मुद्दों पर मंथन हो रहा था, वहीं दूसरी ओर ईरानी प्रतिनिधिमंडल में शामिल एक सादगी भरा चेहरा अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बन गया। यह चेहरा था जाहरा पेजेश्कियन (Zahra Pezeshkian) का, जो ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की बेटी हैं। पारंपरिक काले चादर (ईरानी हिजाब) में अपनी शालीन उपस्थिति, विनम्र व्यवहार और भारतीय सांस्कृतिक व हस्तशिल्प प्रदर्शनी में गहरी रुचि के चलते जाहरा शिखर सम्मेलन के इतर सबसे चर्चित हस्तियों में शुमार हो गईं।

ईरान की अघोषित ‘फर्स्ट लेडी’ की भूमिका में जाहरा

ईरान की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय राजनीति को करीब से देखने वाले विश्लेषकों के लिए जाहरा का यह सार्वजनिक रूप नया नहीं है। मसूद पेजेश्कियन के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही जाहरा कई महत्वपूर्ण मौकों पर अपने पिता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती नजर आई हैं।

चूंकि 1990 के दशक में एक भीषण सड़क हादसे में मसूद पेजेश्कियन की पत्नी (फातमे मजलूमी) और एक बेटे का असामयिक निधन हो गया था, जिसके बाद मसूद पेजेश्कियन ने दोबारा शादी नहीं की और अपने बच्चों की अकेले ही परवरिश की। यही वजह है कि राष्ट्रपति के रूप में औपचारिक विदेशी दौरों और प्रोटोकॉल कार्यक्रमों में उनकी बेटी जाहरा पेजेश्कियन ही उनके साथ ईरान की प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होती हैं और एक तरह से देश की ‘फर्स्ट लेडी’ (De-facto First Lady) की भूमिका निभाती हैं।

पेशेवर पृष्ठभूमि: केमिकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता

जाहरा पेजेश्कियन केवल एक राजनेता की बेटी के तौर पर ही नहीं, बल्कि अपनी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के लिए भी जानी जाती हैं:

  • शिक्षा: जाहरा ने ईरान के प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर (मास्टर्स) की उपाधि प्राप्त की है।

  • करियर: राजनीति के सीधे दखल से दूर वे पेट्रोकेमिकल और पर्यावरण से जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में काम करती रही हैं।

  • राजनीतिक कैंपेन: 2024 के ईरानी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान जाहरा ने अपने पिता के चुनावी अभियान में परदे के पीछे से अहम भूमिका निभाई थी। सुधारवादी सोच का समर्थन करते हुए उन्होंने महिलाओं और युवाओं के मुद्दों को मुखरता से मंच पर रखा था।

ब्रिक्स समिट के दौरान भारतीय हस्तशिल्प और कला की मुरीद बनीं

नई दिल्ली में सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों के जीवन और कला को प्रदर्शित करने वाले विशेष क्राफ्ट पवेलियन में जाहरा पेजेश्कियन ने लंबा वक्त बिताया।

उन्होंने मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध और सदियों पुरानी ‘बाघ प्रिंट’ (Bagh Print) कला की साड़ियों, शॉल और कपड़ों को न केवल बारीकी से देखा, बल्कि भारतीय कारीगरों से प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों (ब्लॉक्स) से छपाई करने की पूरी प्रक्रिया को भी समझा। भारतीय पारंपरिक बुनाई, पश्मीना और रेशमी कपड़ों के प्रति उनके लगाव और कारीगरों से सीधे संवाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं।

क्यों खास है उनकी यह मौजूदगी?

ईरान के इस्लामिक गणराज्य में महिलाओं की स्वतंत्रता, ड्रेस कोड और सार्वजनिक जीवन को लेकर लंबे समय से वैश्विक स्तर पर बहस चलती रही है। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का अपनी बेटी को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंचों पर सम्मानपूर्वक साथ लेकर चलना एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

जाहरा की सादगी, बिना किसी तामझाम के काम करना और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहजता से संवाद करने की शैली ने उन्हें ब्रिक्स सम्मेलन में आकर्षण का केंद्र बना दिया।

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