क्या चोरी की है फिल्म ‘गांधारी’ की कहानी? तापसी पन्नू और कनिका ढिल्लों की एक्शन-थ्रिलर फिल्म पर लगे स्क्रिप्ट चुराने के गंभीर आरोप

बॉलीवुड की सशक्त और लीक से हटकर किरदार निभाने वाली अभिनेत्री तापसी पन्नू और मशहूर लेखिका-निर्माता कनिका ढिल्लों की जोड़ी जब भी साथ आती है, तो सिनेमा प्रेमियों को कुछ नया और चौंकाने वाला देखने की उम्मीद होती है। ‘हसीन दिलरुबा’, ‘रश्मि रॉकेट’ और ‘फिर आई हसीन दिलरुबा’ की सफलता के बाद दोनों ने अपनी अगली बड़ी एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘गांधारी’ (Gandhari) का आधिकारिक ऐलान किया। नेटफ्लिक्स पर आने वाली इस फिल्म का टीजर पोस्टर सामने आते ही इसे एक मां के अपने बच्चे को बचाने और बदले की आग में धधकने वाली अनोखी कहानी बताया गया। लेकिन फिल्म का उत्साह अभी अपनी शुरुआती दहलीज पर ही था कि अचानक इस प्रोजेक्ट पर कहानी चोरी (Plagiarism) और कॉन्सेप्ट कॉपी करने के बेहद गंभीर आरोप लग गए हैं, जिसने पूरे बॉलीवुड गलियारे और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

क्या है पूरा मामला और किस बात को लेकर उठे सवाल?

फिल्म ‘गांधारी’ के आधिकारिक ऐलान और उसके प्लॉट की शुरुआती रूपरेखा सामने आते ही सोशल मीडिया और सिने प्रेमियों के एक वर्ग ने इसके मूल आइडिया पर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। दावों के मुताबिक, फिल्म का केंद्रीय विचार—जिसमें एक साधारण मां अपने बच्चे पर आए संकट के बाद व्यवस्था और अपराधियों से लोहा लेने के लिए एक खूंखार योद्धा का रूप धारण कर लेती है—पहले से मौजूद किसी अन्य लेखक या स्वतंत्र फिल्ममेकर की रजिस्टर्ड स्क्रिप्ट या किसी अंतरराष्ट्रीय एक्शन थ्रिलर से अत्यधिक प्रेरित बताया जा रहा है।

आरोप लगाने वालों का तर्क है कि फिल्म के नाम में पौराणिक संदर्भ ‘गांधारी’ को जोड़कर केवल कहानी को भारतीय कलेवर देने की कोशिश की गई है, जबकि इसका मूल ड्रामा, किरदार का आर्क और एक्शन बैकड्रॉप किसी अन्य अनcredited कहानी से चुराया गया है। हालांकि, फिल्म की लेखिका और निर्माता की तरफ से इसे पूरी तरह मौलिक और अपनी तरह का अनूठा भारतीय एक्शन ड्रामा बताया गया है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस छिड़ चुकी है।

तापसी पन्नू और कनिका ढिल्लों की जोड़ी पर गहराया कॉपीराइट का साया

तापसी पन्नू और कनिका ढिल्लों का रचनात्मक तालमेल पिछले कुछ वर्षों में हिंदी सिनेमा के सबसे सफल गठबंधनों में गिना जाता है। कनिका ढिल्लों द्वारा लिखे गए जटिल, ग्रे और मजबूत महिला किरदारों को तापसी ने हमेशा पर्दे पर बेहद शिद्दत के साथ जिया है। फिल्म ‘गांधारी’ को कनिका के प्रोडक्शन हाउस ‘कथा पिक्चर्स’ (Katha Pictures) और नेटफ्लिक्स के सहयोग से बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है, जिसका निर्देशन देवाशीष मखीजा जैसे समीक्षकों द्वारा सराहे गए निर्देशक कर रहे हैं।

चूंकि इस प्रोजेक्ट से बड़े नाम और इंटरनेशनल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जुड़ा हुआ है, इसलिए कहानी चोरी के आरोपों ने इंडस्ट्री में हलचल तेज कर दी है। आलोचकों का कहना है कि जब बड़े बैनर और स्थापित लेखक किसी विचार पर काम करते हैं, तो उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कहानी के मूल स्रोतों और समान प्लॉटलाइन्स को लेकर कोई विवाद न खड़ा हो। वहीं दूसरी तरफ, तापसी और कनिका के समर्थकों का कहना है कि मातृत्व और प्रतिशोध (Mother’s Revenge) सिनेमा का एक सार्वभौमिक जॉनर (Universal Genre) है, जिस पर दुनिया भर में सैकड़ों फिल्में बनी हैं, ऐसे में केवल जॉनर के आधार पर किसी कहानी को चोरी करार देना पूरी तरह अनुचित है।

बॉलीवुड में स्क्रिप्ट चोरी और राइटर्स के अधिकारों का पुराना इतिहास

यह पहला मौका नहीं है जब किसी बड़ी बॉलीवुड फिल्म या उसके लेखकों पर कहानी चुराने के आरोप लगे हों। हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसी अनगिनत मिसालें हैं जहां फिल्म की घोषणा या रिलीज के बाद मूल लेखकों और स्थापित निर्देशकों के बीच अदालत से लेकर स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन (SWA) तक लंबी कानूनी लड़ाइयां लड़ी गई हैं। कई बार ऐसा देखा गया है कि नए और संघर्षशील लेखक अपनी स्क्रिप्ट्स प्रोडक्शन हाउसों में पिच करते हैं और बाद में बिना किसी क्रेडिट या रॉयल्टी के उसी विचार को थोड़ा बदलकर बड़े पैमाने पर बना दिया जाता है।

स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन ने हाल के वर्षों में स्क्रिप्ट रजिस्ट्रेशन और कॉपीराइट कानूनों को लेकर कड़े नियम बनाए हैं, लेकिन इसके बावजूद ‘आइडिया बनाम एक्सप्रेशन’ (Idea vs Expression) की कानूनी पेचीदगियों के कारण कहानी की मौलिकता साबित करना हमेशा एक जटिल चुनौती बना रहता है। भारतीय कॉपीराइट कानून के तहत किसी सामान्य विचार या थीम पर किसी का एकाधिकार नहीं हो सकता, बल्कि उस विचार को जिस तरह से स्क्रीनप्ले, डायलॉग और दृश्यों में ढाला गया है, केवल उसी को कानूनी सुरक्षा मिलती है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय: फैंस और आलोचकों के बीच जुबानी जंग

फिल्म ‘गांधारी’ पर लगे इन आरोपों के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर), रेडिट और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर नेटिजन्स दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक तरफ जहां आलोचक इसे बॉलीवुड के ‘ओरिजिनैलिटी क्राइसिस’ (मौलिकता के संकट) का हिस्सा बता रहे हैं और स्वतंत्र लेखकों के अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ तापसी पन्नू के फैंस उनका जोरदार बचाव कर रहे हैं।

फैंस का तर्क है कि देवाशीष मखीजा जैसे संवेदनशील और अवॉर्ड विनिंग निर्देशक, जिन्होंने ‘भोंसले’ और ‘जोरम’ जैसी यथार्थवादी और मौलिक फिल्में बनाई हैं, वे कभी किसी चोरी की स्क्रिप्ट पर काम नहीं करेंगे। सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस ने फिल्म को बिना रिलीज हुए ही जबर्दस्त चर्चा (Hype) और विवाद दोनों के केंद्र में ला खड़ा किया है।

मेकर्स के सामने कानूनी चुनौतियां और आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार

इस पूरे विवाद में अब सबकी निगाहें फिल्म की निर्माता-लेखिका कनिका ढिल्लों, निर्देशक देवाशीष मखीजा और नेटफ्लिक्स के आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप लगाने वाला पक्ष मामले को लेकर स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन (SWA) या न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है, तो मेकर्स को अपनी स्क्रिप्ट ड्राफ्ट्स, रजिस्ट्रेशन की तारीखें और कहानी के विकास की पूरी टाइमलाइन पेश करनी पड़ सकती है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में यदि समय रहते विवाद को संवाद के जरिए नहीं सुलझाया जाता, तो फिल्म के निर्माण, शूटिंग शेड्यूल और रिलीज की तारीखों पर कानूनी स्टे (Stay Order) का जोखिम मंडराने लगता है। हालांकि, बड़े प्रोडक्शन हाउस सामान्यतः प्रोजेक्ट फ्लोर पर ले जाने से पहले कानूनी और कॉपीराइट से जुड़े सभी आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और क्लीयरेंस पूरे कर लेते हैं।

‘गांधारी’ की शूटिंग और ओटीटी रिलीज पर क्या पड़ेगा असर?

विवादों के बावजूद फिल्म ‘गांधारी’ को लेकर इंडस्ट्री में भारी उत्सुकता है, क्योंकि यह तापसी पन्नू के करियर की पहली ऐसी फिल्म होगी जिसमें वे पूरी तरह से एक हाई-ऑक्टेन, कच्ची और खूनी एक्शन भूमिका में नजर आएंगी। कहानी में एक मां का अपने बच्चे को बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने का जज्बा दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने की क्षमता रखता है।

अब यह देखना बेहद अहम होगा कि फिल्म के निर्माता इस विवाद को किस तरह संभालते हैं और क्या यह विवाद फिल्म की शूटिंग गति को प्रभावित करता है या फिर यह केवल सोशल मीडिया की सनसनी बनकर शांत हो जाएगा। बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर भारतीय सिनेमा में लेखकों के बौद्धिक संपदा अधिकारों और कहानियों की मौलिकता पर एक गंभीर और जरूरी राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

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