ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दो और राष्ट्रपति बना दो: SIR और चुनाव आयोग विवाद पर उमर अब्दुल्ला का भाजपा पर तीखा तंज

देश के चुनावी तंत्र, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और विपक्षी दलों द्वारा लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। एक ओर जहां विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है और देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक चुका है, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेताओं द्वारा ज्ञानेश कुमार को नागरिक सम्मान देने की वकालत करने पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बेहद तीखा और व्यंग्यात्मक हमला बोला है।

उमर अब्दुल्ला ने भाजपा पर जोरदार तंज कसते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सिर्फ पद्म भूषण तक ही सीमित रखना उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि जब ज्ञानेश कुमार ने भाजपा के लिए इतना सब कुछ किया है और पश्चिम बंगाल की सत्ता तक तोहफे में दे दी है, तो उन्हें सीधे देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ मिलना चाहिए और दो साल बाद उन्हें राष्ट्रपति भवन में बैठा देना चाहिए।

‘पद्म भूषण क्यों? भारत रत्न दें और राष्ट्रपति बनाएं’: उमर अब्दुल्ला का तंज

नई दिल्ली में विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने से पहले श्रीनगर और दिल्ली में मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भाजपा की मांग पर चुटकी ली। दरअसल, भाजपा के नेता और पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने हाल ही में बयान दिया था कि शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए ज्ञानेश कुमार को कम से कम ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया जाना चाहिए।

इस बयान पर पलटवार करते हुए उमर अब्दुल्ला ने तंज भरे लहजे में कहा:

“पद्म भूषण पर ही क्यों रुकना है? सीधे भारत रत्न दे दो। राष्ट्रपति चुनाव में अब दो ही साल बचे हैं, उन्हें देश का राष्ट्रपति बना दो। उन्होंने भाजपा के लिए इतना कुछ किया है। पूरा का पूरा पश्चिम बंगाल भाजपा को तोहफे में दे दिया। अब भाजपा नेता उन्हें सिर्फ पद्म भूषण देने की बात कर रहे हैं, मुझे तो लगता है कि यह उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय है। उन्हें पहले भारत रत्न देना चाहिए और फिर दो साल बाद राष्ट्रपति भवन में बैठा देना चाहिए।'”

‘सबूत किसी राजनीतिक दल ने नहीं, अखबार की जांच ने दिए’

उमर अब्दुल्ला ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ विपक्ष की लामबंदी को पूरी तरह जायज ठहराते हुए कहा कि चुनाव आयोग को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के खिलाफ विपक्ष यूं ही एकजुट नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर (SIR) को लेकर जो खुलासे हुए हैं, उनके सबूत किसी राजनीतिक दल ने अपनी मर्जी से तैयार नहीं किए हैं। बल्कि एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र (The Indian Express) की विस्तृत खोजी रिपोर्ट (Investigation Report) में यह बात आधिकारिक तौर पर सामने आई है कि खुद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ज्ञानेश कुमार द्वारा लिए गए एकतरफा फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति (On Record Objection) दर्ज कराई थी। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इन गंभीर तथ्यों को दबाने या छिपाने के बजाय आयोग को अपने काम-काज के तरीके में सुधार करना चाहिए ताकि संवैधानिक निष्पक्षता पर इस तरह के सवाल न खड़े हों।

भाजपा की दलील: बंगाल में शांतिपूर्ण चुनाव कराने का श्रेय

विपक्ष के इन तीखे हमलों के विपरीत भारतीय जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के बचाव में पूरी मजबूती से खड़ी है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग ने कड़े और निष्पक्ष कदम उठाकर चुनावी हिंसा के लिए बदनाम रहे राज्यों में भयमुक्त वातावरण तैयार किया।

भाजपा नेता शमिक भट्टाचार्य ने कहा था कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय बाद ऐसा चुनाव देखने को मिला जहां मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथ कैप्चरिंग या राजनीतिक हत्याओं की घटनाएं नहीं हुईं। लोग बेखौफ होकर पोलिंग बूथों तक पहुंचे और अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। भाजपा का कहना है कि बंगाल की जनता का आशीर्वाद ज्ञानेश कुमार के साथ है और ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का सम्मान होना चाहिए। हालांकि, विपक्ष भाजपा के इस रुख को अपनी राजनीतिक विफलताओं और सांठगांठ को छिपाने का प्रयास बता रहा है।

SIR और ‘वोट चोरी’ पर विपक्ष का साझा आंदोलन

उमर अब्दुल्ला के इस तीखे बयान के बीच कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों समेत पूरे ‘इंडिया’ गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ साझा मोर्चा खोल दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि गहन पुनरीक्षण के नाम पर करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध रूप से हटाए गए हैं।

विपक्ष ने 6 अक्टूबर को निर्वाचन सदन तक सांसदों के विरोध मार्च, जिलों में प्रदर्शन और राष्ट्रपति से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। उमर अब्दुल्ला की इस व्यंग्यात्मक टिप्पणी ने अब चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक पदों की स्वायत्तता को लेकर चल रही इस बहस को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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