
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्यधारा के मीडिया घरानों के बीच का तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाते हुए सीएनएन (CNN), एमएस नाउ (MS NOW) और मशहूर राजनीतिक समाचार वेबसाइट पॉलिटिको (Politico) के वाइट हाउस में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तीखी पोस्ट साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह पाबंदी तत्काल प्रभाव से लागू की जा रही है। उन्होंने इन मीडिया संगठनों पर प्रशासन के खिलाफ लगातार दुर्भावनापूर्ण, एकतरफा और फर्जी खबरें (Fake News) गढ़ने का गंभीर आरोप लगाया है। इस सख्त फैसले की घोषणा करते हुए ट्रंप ने मीडिया जगत को खुली चेतावनी भी दी कि यह सूची यहीं खत्म नहीं हुई है और जल्द ही कुछ अन्य फर्जी मीडिया संस्थान भी इस प्रतिबंध के दायरे में लाए जाएंगे।
ओवल ऑफिस से ट्रंप की दो टूक: ‘झूठ और फिक्शन फैलाने वालों की जनता के घर में जगह नहीं’
ट्रुथ सोशल पर आदेश जारी करने के चंद मिनटों बाद ही ओवल ऑफिस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप अपने फैसले पर पूरी तरह अड़े नजर आए। जब पत्रकारों ने इस फैसले के पीछे की वजह पूछी, तो ट्रंप ने तीखे अंदाज में कहा कि फर्जी खबरें पढ़ते और देखते-देखते पूरा देश थक चुका है। उन्होंने कहा कि जब आप सीएनएन देखते हैं, तो वह पूरी तरह मनगढ़ंत होता है और यही कारण है कि उनकी टीआरपी और रेटिंग्स गर्त में चली गई हैं। ट्रंप ने एमएस नाउ (पूर्व में एमएसएनबीसी) और पॉलिटिको पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इनकी रिपोर्टिंग पत्रकारिता नहीं, बल्कि केवल फिक्शन और झूठ का पुलिंदा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वाइट हाउस जनता का घर है और किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह यहां बैठकर सरकार और देश के खिलाफ दुर्भावना से प्रेरित खबरें लिखे। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता की जरूरत है, न कि किसी खास राजनीतिक एजेंडे की।
मीडिया घरानों की तीखी प्रतिक्रिया, अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट का दिया हवाला
ट्रंप के इस आदेश के सामने आते ही अमेरिकी मीडिया जगत और प्रेस फ्रीडम संगठनों में खलबली मच गई है। सीएनएन ने तुरंत आधिकारिक बयान जारी करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा और गैर-कानूनी हमला करार दिया। सीएनएन के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट (First Amendment) पत्रकारों को बिना किसी सरकारी हस्तक्षेप या रुकावट के सच दिखाने का मौलिक अधिकार देता है। चैनल ने कहा कि वे अपनी वाइट हाउस रिपोर्टिंग टीम की निष्पक्षता और सत्यता के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। वहीं दूसरी ओर, पॉलिटिको ने भी बयान जारी कर कहा कि वे हमेशा की तरह वाइट हाउस की निष्पक्ष रिपोर्टिंग जारी रखेंगे और अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे। प्रेस फ्रीडम से जुड़े कानूनी जानकारों का भी मानना है कि अतीत में अदालतों ने स्पष्ट किया है कि सरकार किसी पत्रकार या मीडिया संस्थान को उनके विचारों या कवरेज के आधार पर वाइट हाउस प्रेस सुविधाओं से वंचित नहीं कर सकती।
मीडिया और ट्रंप प्रशासन के बीच गहराता पुराना टकराव
प्रेस और डोनाल्ड ट्रंप के बीच का टकराव कोई नया नहीं है, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में यह तल्खी कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर कहीं ज्यादा आक्रामक रूप ले चुकी है। इससे पहले भी एसोसिएटेड प्रेस (AP) के पत्रकारों को राष्ट्रपति के विमान एयरफोर्स वन और ओवल ऑफिस की ब्रीफिंग्स से बाहर रखने का मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसके अतिरिक्त, ट्रंप प्रशासन द न्यूयॉर्क टाइम्स, द वॉल स्ट्रीट जर्नल और बीबीसी जैसे वैश्विक संस्थानों के खिलाफ भी मानहानि और कानूनी मुकदमों की राह अपना चुका है। पारंपरिक मीडिया के बजाय प्रो-ट्रंप ब्लॉगर्स और नए सोशल मीडिया पत्रकारों को तरजीह देने की नीति पहले से ही विवादों में रही है। विश्लेषकों का मानना है कि सीएनएन जैसे बड़े टेलीविजन नेटवर्क को प्रेस पूल से बाहर करने की इस ताजा कोशिश के खिलाफ जल्द ही अमेरिकी अदालतों में बड़ी कानूनी जंग छिड़ सकती है।
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