थलपति विजय के यूके दौरे पर अन्नामलाई का तीखा तंज: ‘लंदन जाने की क्या जरूरत थी, जनता की लड़ाई लड़नी है तो दिल्ली जाइए’

तमिलनाडु की सियासत में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक बयानबाजी और वार-पलटवार का दौर तेज हो गया है। हाल ही में अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) लॉन्च कर चुनावी राजनीति में ताल ठोकने वाले सुपरस्टार थलपति विजय पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने जोरदार हमला बोला है। अभिनेता से राजनेता बने विजय के हालिया यूनाइटेड किंगडम (लंदन) दौरे को लेकर अन्नामलाई ने तंज कसते हुए कहा कि तमिलनाडु के अधिकारों और जनता के मुद्दों की पैरवी करने के लिए ब्रिटेन जाने की कोई तुक नहीं है। यदि विजय को वाकई राज्य की जनता के लिए आवाज उठानी है और केंद्रीय नीतियों पर सवाल खड़े करने हैं, तो उन्हें लंदन के बजाय देश की राजधानी नई दिल्ली का रुख करना चाहिए।

‘लंदन जाकर क्या हासिल होगा?’: अन्नामलाई का टीवीके प्रमुख पर सीधा हमला

कोयंबटूर में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने थलपति विजय के विदेश दौरे के समय और उनकी राजनीतिक गंभीरता पर सवाल खड़े किए। अन्नामलाई ने कहा कि राजनीति में उतरने के बाद किसी भी नेता की प्राथमिकता जनता के बीच रहना और उनके असल मुद्दों के लिए लोकतांत्रिक मंचों पर संघर्ष करना होना चाहिए।

अन्नामलाई ने कहा कि अगर किसी पार्टी के नेता को लगता है कि तमिलनाडु के साथ केंद्र स्तर पर कोई नाइंसाफी हो रही है, या वे किसी केंद्रीय नीति का विरोध करना चाहते हैं, तो उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से नई दिल्ली जाकर संबंधित मंत्रालयों, संसद और केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए। अन्नामलाई ने चुटकी लेते हुए कहा कि लंदन में जाकर छुट्टियां मनाने या वहां बैठकर राजनीति करने से तमिलनाडु की जनता का कोई भला नहीं होने वाला। जनता सब देख रही है कि कौन जमीन पर पसीना बहा रहा है और कौन पार्ट-टाइम राजनीति कर रहा है।

थलपति विजय का लंदन दौरा: निजी यात्रा या आगामी फिल्म की तैयारी?

थलपति विजय हाल ही में अपनी आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘थलपति 69’ (जो कि सिनेमाई पर्दे पर उनकी आखिरी फिल्म मानी जा रही है) के प्री-प्रोडक्शन और कुछ निजी कारणों के चलते लंदन रवाना हुए थे। हालांकि, पार्टी के औपचारिक गठन और विशाल जनसभा की तैयारियों के बीच उनके विदेश जाने को लेकर विरोधी दल लगातार उन पर निशाना साध रहे हैं।

विजय ने अपनी पार्टी टीवीके के ऐलान के साथ ही स्पष्ट किया था कि वे 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत से उतरेंगे और राज्य की जनता को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के पारंपरिक द्विध्रुवीय शासन का एक मजबूत, धर्मनिरपेक्ष और पारदर्शी विकल्प देंगे। लेकिन जमीनी संगठन तैयार करने के अहम पड़ाव पर उनके विदेश जाने को भाजपा और सत्ताधारी द्रमुक दोनों ही राजनीतिक अपरिपक्वता बताकर घेर रहे हैं।

परिसीमन और तीन भाषा नीति पर भी अन्नामलाई का रुख

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अन्नामलाई ने केवल विजय के विदेश दौरे पर ही तंज नहीं कसा, बल्कि दक्षिण भारत में लोकसभा सीटों के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तीन भाषा नीति (Three-Language Formula) को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की।

अन्नामलाई ने विपक्षी दलों और नई राजनीतिक ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे उस डर को सिरे से खारिज किया जिसमें दावा किया जा रहा है कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारत का संसद में प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा की जाएगी और उनकी राजनीतिक ताकत पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। अन्नामलाई ने क्षेत्रीय दलों पर आरोप लगाया कि वे वास्तविक विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाषाई और क्षेत्रीय अलगाववाद का हौव्वा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

2026 के चुनावी समर में तमिलनाडु का दिलचस्प त्रिकोणीय मुकाबला

थलपति विजय की राजनीतिक एंट्री ने तमिलनाडु के पारंपरिक सियासी समीकरणों को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके जहां अपने कल्याणकारी कार्यक्रमों और मजबूत गठबंधन के दम पर सत्ता बरकरार रखने की जुगत में है, वहीं के. अन्नामलाई के आक्रामक तेवरों के साथ भाजपा खुद को मुख्य विपक्षी आवाज के तौर पर स्थापित करने में जुटी है। ऐसे में थलपति विजय का टीवीके किस खेमे के वोटों में सबसे ज्यादा सेंध लगाएगा, इसे लेकर सभी दलों में बेचैनी है। अन्नामलाई द्वारा विजय पर सीधा हमला बोलना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भाजपा अब विजय को एक गंभीर चुनावी प्रतिद्वंद्वी मानकर उन पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

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