
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आजम खान और उनके पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम खान को बहुचर्चित ‘दो पैन कार्ड’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित करते हुए दोनों नेताओं की जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। इस फैसले के बाद रामपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में दोनों की ओर से आवश्यक जमानती (बेल बॉन्ड) दाखिल कर दिए गए हैं। अदालत ने पुलिस और राजस्व प्रशासन को जमानतियों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं।
क्या आज शाम तक जारी हो सकता है रिहाई परवाना?
अदालती प्रक्रिया के अनुसार, जब तक पुलिस और प्रशासन द्वारा दाखिल किए गए जमानतियों की सत्यापन रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं हो जाती, तब तक जेल प्रशासन को औपचारिक ‘रिहाई परवाना’ (Release Order) प्रेषित नहीं किया जा सकता। प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही एमपी-एमएलए कोर्ट से परवाना संबंधित जेल को भेजा जाएगा। यदि सभी आवश्यक कानूनी कागजी कार्रवाई और रिपोर्ट समय पर अदालत पहुंच जाती हैं, तभी अदालत से परवाना जारी करने का रास्ता साफ होगा।
रिहाई की राह में अन्य कानूनी अड़चनें और ईडी की सक्रियता
हालांकि दो पैन कार्ड मामले में जमानत मंजूर हो चुकी है, लेकिन आजम खान और अब्दुल्ला आजम का जेल से तुरंत बाहर आना केवल इसी एक केस पर निर्भर नहीं है। दोनों नेताओं के खिलाफ कई अन्य मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं।
इसके साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामलों में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों की ओर से रिमांड से संबंधित अर्जियों और अन्य लंबित मुकदमों के चलते कानूनी जानकारों का मानना है कि सभी मामलों में औपचारिकताएं स्पष्ट हुए बिना पूरी तरह जेल से बाहर आने में तकनीकी व कानूनी बाधाएं आ सकती हैं।
सियासी हलकों और समर्थकों की निगाहें सीतापुर जेल पर
रिहाई की खबरों के बीच समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। रामपुर से लेकर सीतापुर तक राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम पर बारीक नजर रखी जा रही है। समर्थक जेल और अदालत परिसर के बाहर पल-पल के अपडेट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चाक-चौबंद रखा हुआ है।
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