
पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक आंदोलनों और तीखे सियासी मुकाबलों का केंद्र रहे नंदीग्राम में एक बार फिर चुनावी बिगुल बज चुका है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कद्दावर नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई नंदीग्राम सीट पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह गरमा दिया है। जहां एक तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इस सीट से अपनी उम्मीदवारी को लेकर रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने शुक्रवार को बड़ा दांव चलते हुए अपने पत्ते खोल दिए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद पार्टी ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस के इस कदम ने नंदीग्राम के चुनावी अखाड़े में मुकाबले को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
क्यों खाली हुई नंदीग्राम सीट? जानिए उपचुनाव की पृष्ठभूमि
नंदीग्राम में उपचुनाव की नौबत 2026 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद आई। शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में दो प्रमुख सीटों—नंदीग्राम और कोलकाता की भवानीपुर—से एक साथ चुनाव लड़ा था और दोनों ही सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। राज्य का मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद नियम के तहत उन्हें किसी एक सीट की विधानसभा सदस्यता छोड़नी थी। शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट को अपने पास बरकरार रखने का फैसला किया और नंदीग्राम सीट से औपचारिक इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर अब मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट के साथ 6 अक्टूबर को मतदान होना है।
नंदीग्राम और रेजीनगर के लिए कांग्रेस ने चला दांव
कांग्रेस आलाकमान ने उपचुनाव के लिए दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर विपक्ष के रुख को साफ कर दिया है:
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नंदीग्राम (पूर्ब मेदिनीपुर): कांग्रेस ने स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेता मिलन प्रधान पर दांव लगाया है।
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रेजीनगर (मुर्शिदाबाद): यहां पार्टी ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को प्रत्याशी बनाया है। रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा नवदा सीट बरकरार रखकर इस्तीफा देने के कारण रिक्त हुई थी।
मिलन प्रधान को मैदान में उतारकर कांग्रेस ने यह संदेश दिया है कि वह तृणमूल या अन्य विपक्षी खेमों के फैसले का इंतजार करने के मूड में नहीं है, बल्कि जमीन पर अपने कैडर को सक्रिय कर मुकाबले में मजबूती से उतरेगी।
ममता बनर्जी की रहस्यमयी चुप्पी: क्या खुद उतरेंगी मैदान में?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम को लेकर क्या फैसला लेंगी। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से शुभेंदु अधिकारी को सीधी चुनौती दी थी, लेकिन कांटे की टक्कर में उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
वर्तमान में टीएमसी आंतरिक खींचतान और गुटबाजी के दौर से गुजर रही है। हाल ही में टीएमसी के बागी गुट के नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर यह प्रस्ताव रखा था कि यदि ममता बनर्जी नंदीग्राम से खुद चुनाव लड़ती हैं, तो वे उनके खिलाफ कोई प्रत्याशी नहीं उतारेंगे ताकि विपक्ष का वोट न बंटे। हालांकि, जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में टीएमसी का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ, जिससे यह संशय गहरा गया है कि क्या ममता बनर्जी शुभेंदु के गढ़ में फिर से जोखिम उठाएंगी या फिर पार्टी किसी स्थानीय चेहरे पर मुहर लगाएगी।
6 अक्टूबर को वोटिंग, 9 अक्टूबर को नतीजे: पूरा चुनावी कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार चुनावी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है:
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नामांकन की अंतिम तारीख: 16 सितंबर 2026
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नाम वापसी की आखिरी तारीख: 19 सितंबर 2026
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मतदान की तारीख: 6 अक्टूबर 2026
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मतगणना और परिणाम: 9 अक्टूबर 2026
शुभेंदु के गढ़ में भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर
नंदीग्राम सीट को शुभेंदु अधिकारी और अधिकारी परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है। भाजपा के लिए यह उपचुनाव केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अपने गृह क्षेत्र में राजनीतिक दबदबे और लोकप्रियता को कायम रखने की प्रतिष्ठा की लड़ाई है। भाजपा ने अपने संगठन और स्थानीय नेताओं के साथ रणनीति बैठकों का दौर शुरू कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तृणमूल कांग्रेस अपना पत्ता कब खोलती है और क्या नंदीग्राम की जमीन पर एक बार फिर ममता बनाम शुभेंदु की सियासी प्रतिद्वंद्विता की गूंज सुनाई देगी।
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