
हिंदी पट्टी में बॉक्स ऑफिस के तमाम रिकॉर्ड्स ध्वस्त करने वाली भक्तिमय फिल्म ‘हनुमान अंश’ (Hanuman Ansh) ने रिलीज के बाद जिस तरह की ऐतिहासिक सफलता दर्ज की, उसने पूरे भारतीय सिनेमा को चौंका दिया। महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी यह फिल्म वर्ल्डवाइड 300 करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े की ओर बढ़ चुकी है। हिंदी बेल्ट में जबर्दस्त प्यार मिलने के बाद मेकर्स ने इस फिल्म को तेलुगू दर्शकों के बीच ले जाने की तैयारी की थी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सिनेमाघरों में इसे 18 सितंबर को भव्य स्तर पर रिलीज करने की आधिकारिक घोषणा की गई थी। हालांकि, ऐन मौके पर इस डब फिल्म के सामने ऐसी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं कि इसका शुक्रवार को पर्दे पर उतरना लगभग नामुमकिन सा नजर आ रहा है। साउथ मार्केट में फिल्म की एंट्री के बीच ऐसे 6 बड़े पेंच फंस गए हैं, जिन्होंने मेकर्स की नींद उड़ा दी है।
1. प्रिजेंटर-डिस्ट्रिब्यूटर त्रिविक्रम श्रीनिवास ने खींचे हाथ
तेलुगू रिलीज में सबसे बड़ा झटका तब लगा जब फिल्म के ओरिजिनल प्रिजेंटर और दिग्गज टॉलीवुड निर्देशक-निर्माता त्रिविक्रम श्रीनिवास ने अचानक इस प्रोजेक्ट से किनारा कर लिया। त्रिविक्रम अपनी कंपनी ‘फॉर्च्यून फोर सिनेमाज’ के बैनर तले इसे तेलुगू राज्यों में प्रिजेंट करने वाले थे, जिससे वहां के बाजार में फिल्म को लेकर बड़ा बज बना था। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंतिम समय पर डील रद्द हो गई। अब मेकर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे बिना किसी स्थापित लोकल डिस्ट्रिब्यूटर के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के थिएटर्स तक फिल्म को कैसे पहुंचाएं।
2. सेंसर बोर्ड का अड़ंगा और सर्टिफिकेट की पेंडेंसी
डिस्ट्रिब्यूशन के विवाद के अलावा फिल्म के तेलुगू प्रिंट को लेकर दूसरी सबसे बड़ी तकनीकी रुकावट सेंसर बोर्ड (CBFC) से सामने आई है। रिलीज की तारीख सिर पर होने के बावजूद तेलुगू वर्जन को अभी तक सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिल पाया है। बिना सीबीएफसी क्लीयरेंस के किसी भी फिल्म का थिएटरों में प्रदर्शन गैरकानूनी है। अगर मेकर्स रातों-रात कोई नया डिस्ट्रीब्यूटर खोज भी लेते हैं, तब भी जब तक सेंसर बोर्ड से हरी झंडी नहीं मिलती, तब तक टिकट खिड़की और एडवांस बुकिंग शुरू नहीं की जा सकती।
3. रिलीज से चंद दिन पहले तक ट्रेलर का गायब होना
किसी भी डब फिल्म को दूसरे भाषाई बाजार में स्थापित करने के लिए उसका ट्रेलर सबसे अहम हथियार होता है। हैरानी की बात यह है कि 18 सितंबर की प्रस्तावित रिलीज डेट में जब बमुश्किल दो दिन बचे थे, तब तक फिल्म का आधिकारिक तेलुगू ट्रेलर तक जारी नहीं किया गया। ट्रेलर न आने से तेलुगू दर्शकों को यह अंदाजा ही नहीं लग पाया कि फिल्म की डबिंग क्वालिटी, डायलॉग्स और क्षेत्रीय प्रस्तुति कैसी है, जिसकी वजह से स्थानीय दर्शकों के बीच शुरुआती उत्सुकता पूरी तरह ठंडी पड़ गई।
4. टीजर लॉन्च और प्रेस कॉन्फ्रेंस का ऐन वक्त पर रद्द होना
फिल्म के प्रचार के लिए 15 सितंबर को हैदराबाद में एक भव्य टीजर लॉन्च इवेंट और प्रेस कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा बनाई गई थी। लेकिन त्रिविक्रम श्रीनिवास के प्रोजेक्ट से हटने की खबरों के बीच इस पूरे इवेंट को रातों-रात रद्द कर दिया गया। न तो कोई प्रेस मीट हुई और न ही कोई ग्राउंड प्रमोशन शुरू हो सका। किसी भी बड़ी फिल्म के लिए रिलीज से पहले का प्रमोशनल कैंपेन ही एडवांस बुकिंग की रीढ़ होता है, जिसका इस मामले में पूरी तरह अभाव देखने को मिला।
5. हिंदी वर्जन का पहले से तेलुगू राज्यों में चलना
एक और पेचीदा मसला यह है कि ‘हनुमान अंश’ का मूल हिंदी वर्जन हैदराबाद, विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा जैसे प्रमुख शहरों के मल्टीप्लेक्सों में पहले से ही सफलतापूर्वक चल रहा है। जो दर्शक इस भक्ति फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्सुक थे, वे इसका हिंदी प्रिंट पहले ही देख चुके हैं। ऐसे में ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि डब वर्जन के लिए दर्शकों को दोबारा टिकट खिड़की तक खींचना काफी मुश्किल साबित हो सकता है।
6. साउथ के दर्शकों से जुड़ाव और आने वाले दिनों का कड़ा क्लैश
ट्रेड पंडितों के अनुसार, फिल्म की कहानी मुख्य रूप से नीम करोली बाबा के जीवन, शिक्षाओं और चमत्कारों से प्रेरित है। उत्तर भारत में जहां नीम करोली बाबा को लेकर अगाध श्रद्धा और व्यापक फॉलोअर्स हैं, वहीं दक्षिण भारत में उनके बारे में जागरूकता तुलनात्मक रूप से सीमित है। इसके अलावा, आगामी हफ्तों में नानी की ‘द पैराडाइज’ समेत कई बड़ी स्थानीय तेलुगू फिल्में कतार में हैं। हिंदी बाजार की तरह इसे टिके रहने के लिए लंबा समय मिलना मुश्किल है, जिसके चलते तेलुगू रिलीज को आगे खिसकाना ही मेकर्स के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता माना जा रहा है।
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