
नेपाल के पहाड़ी और तराई इलाकों में मूसलाधार बारिश के बाद आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी का असर भारत-नेपाल सीमा से सटे मैदानी इलाकों में साफ देखा जा रहा है। उफनती नदियों और तबाही के लाइव विजुअल्स को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने और यूट्यूब पर लाखों व्यूज बटोरने का क्रेज कई बार जिंदगी पर कितना भारी पड़ सकता है, इसका रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला गंडक (नारायणी) नदी के जलक्षेत्र में सामने आया है। नेपाल सीमा के पास गंडक नदी में आई भीषण बाढ़ की ग्राउंड रिपोर्टिंग और सनसनीखेज वीडियो शूट करने उतरे दो डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स (यूट्यूबर्स) नदी के प्रचंड वेग के बीच एक छोटे से टापू और झाड़ियों के बीच फंस गए।
देखते ही देखते गंडक बराज से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी के कारण जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और दोनों युवकों की नाव अनियंत्रित होकर बह गई। दोनों युवक जान बचाने के लिए एक रेतीले टीले और पेड़ की शाखाओं को पकड़कर घंटों मौत से जूझते रहे। युवकों की चीख-पुकार सुनकर तटवर्ती ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल को इसकी सूचना दी। इसके बाद मोटरबोट, लाइफ जैकेट्स और स्थानीय गोताखोरों की मदद से चलाए गए करीब तीन घंटे के कड़े और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
नेपाल में भारी बारिश और गंडक का उफान: ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए नदी के मुहाने पर पहुंचे थे यूट्यूबर
पड़ोसी देश नेपाल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण काठमांडू घाटी, नारायणी और कोसी नदी के बेसिन में भारी तबाही मची हुई है। पहाड़ों से उतरने वाला यह सैलाब सीधे भारत-नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि नगर गंडक बराज के जरिए बिहार और उत्तर प्रदेश के तराई जिलों की ओर बढ़ रहा है।
तबाही के इस मंजर को कैमरे में कैद करने और सोशल मीडिया पर ‘एक्सक्लूसिव ग्राउंड रिपोर्ट’ दिखाने की होड़ में दो स्थानीय यूट्यूबर अपने महंगे कैमरे, ट्राइपॉड और ड्रोन लेकर नदी के संवेदनशील और प्रतिबंधित तटवर्ती इलाके में पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों युवक अधिक ड्रामैटिक और क्लोज-अप शॉट्स लेने के लिए एक छोटी देशी नाव के सहारे नदी के बीच बने एक रेतीले टापू की तरफ चले गए। उन्हें इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि ऊपर नेपाल की पहाड़ियों में बादल फटने के बाद बराज से भारी मात्रा में अतिरिक्त पानी छोड़ा जा चुका है जो कुछ ही मिनटों में उनके रास्ते को पूरी तरह जलमग्न करने वाला था।
अचानक बढ़ा जलस्तर और बह गई नाव: उफनती लहरों के बीच झाड़ियों के सहारे अटकी सांसें
जैसे ही दोनों युवक नदी के बीच पहुंचे और वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू की, अचानक गंडक का जलस्तर कई फीट ऊपर उठ गया। पानी की तेज धार और भंवर के कारण उनकी नाव की रस्सी टूट गई और नाव अनियंत्रित होकर लहरों के साथ बह गई।
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चारों तरफ पानी का खौफनाक मंजर: नाव बह जाने के बाद दोनों यूट्यूबर्स के पास लौटने का कोई साधन नहीं बचा। टापू का दायरा तेजी से पानी में समाने लगा और चारों ओर केवल गरजती हुई गंडक नदी की विकराल लहरें दिखाई दे रही थीं।
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पेड़ की टहनियों का सहारा: जब पानी उनकी कमर तक आ गया, तो दोनों युवकों ने एक मजबूत जंगली पेड़ और झाड़ियों की टहनियों को कसकर पकड़ लिया और अपने बैग व इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स को छाती से चिपकाए रखा।
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बैटरी खत्म और नेटवर्क की समस्या: पानी के बीच फंसे होने और तेज बारिश के कारण उनके मोबाइल नेटवर्क ने काम करना बंद कर दिया, जिससे वे सीधे आपातकालीन नंबरों पर भी संपर्क नहीं कर पा रहे थे। वे केवल किनारे की तरफ हाथ हिलाकर और चिल्लाकर मदद की गुहार लगा रहे थे।
3 घंटे चला हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन: मोटरबोट और स्थानीय गोताखोरों ने ऐसे खींचा मौत के मुंह से बाहर
तटबंध के पास मवेशी चरा रहे कुछ स्थानीय ग्रामीणों ने जब नदी के बीच से बचाओ-बचाओ की आवाजें सुनीं, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए शोर मचाया और नजदीकी पुलिस चौकी व प्रशासनिक अधिकारियों को अलर्ट किया।
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प्रशासन और एसडीआरएफ (SDRF) का त्वरित एक्शन: सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस, अंचलाधिकारी (CO) और आपदा राहत दल गोताखोरों व आधुनिक मोटरबोट के साथ मौके पर पहुंचे।
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तेज करंट बनी सबसे बड़ी चुनौती: गंडक नदी का बहाव इतना तेज था कि सामान्य नावों का बीच धारा में जाना नामुमकिन था। राहत दल की मोटरबोट को लहरों के विपरीत ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
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लाइफ जैकेट्स और रस्सियों का सुरक्षा घेरा: रेस्क्यू टीम ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए मोटरबोट को फंसे हुए युवकों से करीब 15-20 मीटर की दूरी पर स्थिर किया। इसके बाद कुशल गोताखोरों ने रस्सियों और लाइफ रिंग्स के सहारे तैरकर दोनों युवकों तक पहुंच बनाई। उन्हें लाइफ जैकेट पहनाई गई और सुरक्षित रूप से मोटरबोट पर खींच लिया गया।
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किनारे पहुंचते ही छलके आंसू: जैसे ही रेस्क्यू बोट दोनों युवकों को लेकर तटबंध पर पहुंची, वहां मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों और राहतकर्मियों ने राहत की सांस ली। मौत के मुंह से बाहर निकले दोनों युवक बुरी तरह कांप रहे थे और उन्होंने रोते हुए पुलिस व गोताखोरों का हाथ जोड़कर धन्यवाद किया।
व्यूज और डिजिटल शोहरत के चक्कर में मौत से खिलवाड़: प्रशासन ने जारी की सख्त चेतावनी
रेस्क्यू के बाद दोनों युवकों को नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें खतरे से बाहर बताया गया। हालांकि, इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर पुलिस और जिला प्रशासन ने दोनों को कड़ी फटकार लगाई और उनके परिजनों को बुलाकर लिखित माफीनामा लेने के बाद छोड़ा।
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खतरे वाले क्षेत्रों में वीडियोग्राफी पर रोक: जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बाढ़ प्रभावित नदियों, बराजों, उफनते नालों और कमजोर तटबंधों के 500 मीटर के दायरे में बिना आधिकारिक अनुमति के रील बनाने, ड्रोन उड़ाने या वीडियोग्राफी करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम: प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आपदा के समय अपनी या दूसरों की जान जोखिम में डालने वालों के खिलाफ बीएनएस (BNS) और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
नेपाल त्रासदी का भारत-सीमा पर असर: गंडक बराज से लगातार डिस्चार्ज, अलर्ट मोड पर एजेंसियां
नेपाल में हाल के दिनों में आई भीषण बाढ़ के कारण सीमावर्ती इलाकों में लगातार हाई अलर्ट की स्थिति बनी हुई है। गंडक बराज के सभी फाटकों को खोलकर पानी की निकासी की जा रही है, जिससे बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान और सारण तथा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर व महराजगंज के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने आम जनता, पर्यटकों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से अपील की है कि वे बाढ़ के पानी को कोई एडवेंचर या मनोरंजन का साधन न समझें। नदियों का जलस्तर कुछ ही सेकंडों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है, जहां तैरना जानने वाले भी भंवर में फंसकर अपनी जान गंवा बैठते हैं।
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