
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्चस्तरीय वार्षिक सत्र में वैश्विक मंच पर अपने मुल्क की नुमाइंदगी करने पहुंचे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अमेरिका की सरजमीं पर कदम रखते ही भीषण अंतरराष्ट्रीय फजीहत और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। वैश्विक कूटनीति के केंद्र न्यूयॉर्क की सड़कों, व्यस्त चौराहों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों के बाहर शहबाज शरीफ के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके ‘पेन स्टेशन’ (Penn Station) से लेकर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के इर्द-गिर्द सड़कों पर ‘चोर आया, चोर आया’, ‘चेरी पॉलिश’ और ‘चोरों की सरकार नामंजूर’ लिखे विशाल पोस्टरों और बैनरों की बाढ़ आ गई है। विदेशी राजनयिकों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की मौजूदगी में किसी राष्ट्राध्यक्ष का उसके ही मुल्क के नागरिकों द्वारा इस कदर सार्वजनिक अपमान पूरी दुनिया में चर्चा और हंसी का विषय बन गया है।
न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर ठंडा स्वागत और सड़कों पर ‘चोर’ के पोस्टर
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने जब न्यूयॉर्क पहुंचे, तो शुरुआत से ही उनके दौरे पर ग्रहण लगा दिखाई दिया। एयरपोर्ट पर किसी भी वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक या बड़े अधिकारी द्वारा उनकी अगवानी न किए जाने को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे थे। इसके तुरंत बाद जैसे ही उनका काफिला शहर की तरफ बढ़ा, जगह-जगह लगे होर्डिंग्स और पोस्टरों ने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के होश उड़ा दिए।
अमेरिका में रहने वाले पाकिस्तानी प्रवासियों, विशेषकर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने इन पोस्टरों को लगवाया है। पोस्टरों पर शहबाज शरीफ की बड़ी तस्वीर के साथ अंग्रेजी और उर्दू में तीखे कटाक्ष लिखे गए हैं। उनमें शहबाज शरीफ को जनता के वोटों पर डाका डालकर सत्ता में आई ‘फॉर्म-47’ वाली फर्जी सरकार का मुखिया बताया गया है।
12 अरब का आलीशान विमान बनाम कंगाली: ढोंग की खुली पोल
इस विरोध और गुस्से की सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और शासकों की बेहिसाब अय्याशी है। पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे भीषण आर्थिक संकट, महंगाई और दिवालियापन के कगार से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से चंद अरब डॉलर की खैरात पाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरान दुनियाभर में हाथ फैला रहे हैं। न्यूयॉर्क दौरे पर भी शहबाज शरीफ ने मितव्ययिता (खर्चों में कटौती) का दिखावा करने की कोशिश की और अपने साथ केवल उप-प्रधानमंत्री इशाक डार और विशेष सहायक तारिक फातमी का एक छोटा प्रतिनिधिमंडल लेकर गए।
लेकिन न्यूयॉर्क की सड़कों पर लगे पोस्टरों ने इस तथाकथित सादगी के ढोंग की बखिया उधेड़ दी। पोस्टरों में 12 अरब पाकिस्तानी रुपये के उस बेहद महंगे और आलीशान वीआईपी प्राइवेट जेट विमान की तस्वीर छापी गई है, जिसे पंजाब की मुख्यमंत्री और नवाज शरीफ की बेटी मरियम नवाज के लिए खरीदा गया था। पोस्टरों पर तीखा तंज कसते हुए लिखा गया है कि जिस देश की राष्ट्रीय एयरलाइन (PIA) को बेचने के लिए खरीदार तक नहीं मिल रहे और उसकी बोली महज 10 अरब रुपये लग रही है, उसी मुल्क के हुक्मरान जनता के टैक्स और विदेशी कर्ज के पैसों से 12-12 अरब के वीआईपी जेट उड़ा रहे हैं।
इमरान खान की बहनों की गिरफ्तारी और देश में दमन पर फूटा गुस्सा
न्यूयॉर्क में शहबाज शरीफ के खिलाफ उमड़े इस जनाक्रोश का दूसरा बड़ा कारण पाकिस्तान के भीतर चल रही सियासी तानाशाही और बर्बरता है। हाल ही में लाहौर में इमरान खान की तीनों बहनों—अलीमा खान, डॉ. उजमा खान और नूरीन नियाजी को 30 दिनों के लिए जेल में ठूंस दिया गया है। 27 सितंबर को इस्लामाबाद में होने वाले पीटीआई के विरोध मार्च को कुचलने के लिए शहबाज सरकार और पाकिस्तानी सेना जिस तरह राजनीतिक कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है, उससे विदेशों में रह रहे पाकिस्तानी समुदाय में भारी गुस्सा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जो प्रधानमंत्री अपने मुल्क में लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं, अदालतों को पंगु बना रहे हैं और विपक्ष की महिलाओं को जेलों में डाल रहे हैं, उन्हें संयुक्त राष्ट्र के लोकतांत्रिक मंच पर मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय शांति पर उपदेश देने का कोई नैतिक हक नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने पाक सरकार की भारी किरकिरी
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दुनिया भर के 190 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वरिष्ठ राजनयिक और वैश्विक मीडिया न्यूयॉर्क में मौजूद रहते हैं। ऐसे समय में जब पाकिस्तान कश्मीर या क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान खींचने की कोशिश करता है, उसके प्रधानमंत्री की अपनी ही जनता द्वारा लगाई गई यह ‘चोर-चोर’ की होर्डिंग्स देश की साख को पूरी तरह मटियामेट कर रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि घर में सेना की बैसाखियों के सहारे सरकार चलाने वाले शहबाज शरीफ के लिए विदेशी सरजमीं पर अपने ही नागरिकों के इस तीखे विरोध का सामना करना किसी बड़े कूटनीतिक और राजनीतिक तमाचे से कम नहीं है।
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