
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक राष्ट्राध्यक्षों के सम्मान में आयोजित भव्य गाला डिनर (Gala Dinner) में अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ देश की घरेलू सियासत का दिलचस्प रंग देखने को मिला। केंद्र सरकार की ओर से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था, जिसमें एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों—उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी—ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन विपक्ष और गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस हाई-प्रोफाइल डिनर से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी वाले इस डिनर में विपक्षी मुख्यमंत्रियों का न पहुंचना अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
किन-किन मुख्यमंत्रियों ने बनाई दूरी?
सूत्रों और उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, केंद्र की ओर से भेजे गए निमंत्रण के बावजूद जिन विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने गाला डिनर से किनारा किया, उनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:
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सिद्धारमैया (मुख्यमंत्री, कर्नाटक)
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ए. रेवंत रेड्डी (मुख्यमंत्री, तेलंगाना)
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एम.के. स्टालिन (मुख्यमंत्री, तमिलनाडु)
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पिनाराई विजयन (मुख्यमंत्री, केरल)
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सुखविंदर सिंह सुक्खू (मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश)
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भगवंत मान (मुख्यमंत्री, पंजाब)
इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने स्वयं उपस्थित होने के बजाय अपनी व्यस्तताओं का हवाला दिया।
गैर-हाजिर रहने के पीछे क्या थीं आधिकारिक और राजनीतिक वजहें?
विपक्षी मुख्यमंत्रियों के इस सामूहिक बहिष्कार या गैर-मौजूदगी के पीछे कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कारण सामने आए हैं:
1. ‘पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं’ (Prior Commitments)
कांग्रेस शासित राज्यों—तेलंगाना, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश के सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्रियों के पहले से तय राज्यस्तरीय कार्यक्रम, बाढ़ राहत समीक्षा और विधानसभा सत्र से जुड़ी पूर्व व्यस्तताएं थीं, जिसके चलते वे अचानक दिल्ली की यात्रा पर नहीं आ सके।
2. केंद्र-राज्य टकराव और वित्तीय असंतोष
विपक्षी शासित राज्यों (विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक) का केंद्र सरकार के साथ लंबे समय से वित्तीय आवंटन, टैक्स डिवोल्यूशन (कर हिस्सेदारी) और मनरेगा फंड को लेकर टकराव चल रहा है। विपक्षी दलों का एक धड़ा यह मानता रहा है कि केवल फोटो-ऑप और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपस्थिति दिखाने से राज्यों के लंबित वित्तीय और संघीय मुद्दों का हल नहीं निकलता।
3. प्रोटोकॉल और राजनीतिक संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिनर में शामिल न होकर विपक्षी खेमे (INDIA ब्लॉक) ने एक मौन राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। विपक्ष का आरोप रहा है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में विपक्ष के नेताओं को उचित मंच और सम्मान देने के बजाय केवल औपचारिकता निभाई जाती है। ऐसे में डिनर में जाकर भाजपा नीत केंद्र सरकार के कूटनीतिक शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा बनने से विपक्षी नेताओं ने परहेज किया।
भाजपा शासित मुख्यमंत्रियों का दिखा भारी जमावड़ा
एक तरफ जहां विपक्षी कुर्सियां खाली रहीं, वहीं भाजपा और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गाला डिनर में पूरी सक्रियता दिखाई:
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत तमाम केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों के साथ भाजपा मुख्यमंत्रियों ने संसद भवन से भारत मंडपम तक विशेष बसों में सफर किया।
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एनडीए नेताओं ने इस मौके पर वैश्विक नेताओं—जैसे इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस—से मुलाकात की और इसे भारत के ‘सहकारी संघवाद’ का वैश्विक चेहरा बताया।
भाजपा का पलटवार: ‘कूटनीति में संकीर्ण राजनीति’
भाजपा नेताओं ने विपक्षी मुख्यमंत्रियों के न पहुंचने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन किसी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे देश का गौरव और 140 करोड़ भारतीयों का मंच था। ऐसे वैश्विक मौके पर जब दुनिया के शीर्ष नेता भारत की राजधानी में मौजूद थे, तब घरेलू राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर एक मंच पर आना चाहिए था। भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने इस वैश्विक आयोजन से दूरी बनाकर अपनी संकीर्ण राजनीतिक सोच का परिचय दिया है।
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