
टेलीविजन के आइकॉनिक क्राइम शो ‘सीआईडी’ में ‘एसीपी प्रद्युम्न’ का यादगार किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता शिवाजी साटम ने अपने निजी जीवन के एक बेहद भावुक और दर्दनाक दौर का खुलासा किया है। एक हालिया साक्षात्कार में शिवाजी साटम ने बताया कि जब उनकी पहली पत्नी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं, तब बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर उनके जीवन में ‘मसीहा’ बनकर आए थे। आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से घिरे उस मुश्किल वक्त में नाना पाटेकर ने न केवल शिवाजी साटम का हौसला बढ़ाया, बल्कि एक फिल्म प्रोड्यूसर से सीधे बात कर उनके इलाज के लिए जरूरी पैसों का इंतजाम भी करवाया था। अपने जिगरी दोस्त की दरियादिली को याद करते हुए शिवाजी साटम भावुक हो उठे।
थिएटर के दिनों से है दोनों की अटूट दोस्ती
शिवाजी साटम और नाना पाटेकर का रिश्ता केवल फिल्म इंडस्ट्री के सह-कलाकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों की दोस्ती मराठी रंगमंच (थिएटर) के शुरुआती संघर्ष के दिनों से है। दोनों ने कई नाटकों और फिल्मों में एक साथ काम किया है। शिवाजी साटम ने बताया कि नाना पाटेकर स्वभाव से जितने सख्त और बेबाक नजर आते हैं, दिल से वे उतने ही संवेदनशील और अपनों के लिए जान छिड़कने वाले इंसान हैं। जब शिवाजी साटम अभिनय की दुनिया में अपने पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे, तभी उनकी पहली पत्नी अरुणा गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं।
‘कैंसर के इलाज के लिए नहीं थे पैसे, नाना ने प्रोड्यूसर को लगाया फोन’
उस दौर को याद करते हुए शिवाजी साटम ने साझा किया कि पत्नी के कैंसर के इलाज का खर्च उठाना उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद भारी पड़ रहा था। अस्पताल के बिल और दवाइयों के खर्च ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। जब नाना पाटेकर को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के तुरंत मदद की कमान संभाली।
शिवाजी साटम ने बताया, “नाना को जैसे ही पता चला कि मेरी पत्नी गंभीर रूप से बीमार हैं और मुझे पैसों की सख्त जरूरत है, उन्होंने फौरन एक फिल्म प्रोड्यूसर से संपर्क किया। नाना ने उस निर्माता से कहा कि शिवाजी को तुरंत काम और एडवांस पारिश्रमिक दिया जाए ताकि इलाज में एक पल की भी देरी न हो।” नाना के इस कदम की बदौलत शिवाजी साटम को समय पर वित्तीय मदद मिली और वे अपनी पत्नी का इलाज बेहतर तरीके से करा सके। हालांकि, लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार उनकी पत्नी का निधन हो गया, जिसका गहरा आघात अभिनेता को लगा था।
‘वो दोस्त नहीं, मेरे परिवार की तरह खड़े रहे’: भावुक हुए एसीपी प्रद्युम्न
शिवाजी साटम ने कहा कि जीवन के उस काले दौर में नाना पाटेकर केवल आर्थिक रूप से ही मददगार नहीं बने, बल्कि वे हर कदम पर एक साए की तरह उनके साथ खड़े रहे। अस्पताल के चक्कर काटने से लेकर परिवार को भावनात्मक सहारा देने तक, नाना ने सच्चे दोस्त का फर्ज निभाया।
शिवाजी साटम ने कहा, “जिंदगी में जब आप चारों तरफ से टूट जाते हैं, तब कोई निस्वार्थ भाव से आपका हाथ थाम ले तो वह भगवान से कम नहीं होता। नाना पाटेकर मेरे लिए वही मसीहा थे। उन्होंने जो मेरे लिए किया, उसे मैं अपनी आखिरी सांस तक नहीं भूल सकता।”
दोनों के काम की मिसाल देते हैं फैंस
शिवाजी साटम और नाना पाटेकर ने ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’, ‘यशवंत’ और ‘वजूद’ जैसी कई मशहूर फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर की है। पर्दे पर इन दोनों की जुगलबंदी जितनी शानदार रही, असल जिंदगी में उनका आपसी भाईचारा और भरोसा उससे कहीं ज्यादा गहरा रहा है। शिवाजी साटम के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर फैंस नाना पाटेकर की सादगी, दरियादिली और सच्ची दोस्ती की जमकर तारीफ कर रहे हैं।
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