
पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में शुक्रवार को जुमे की नमाज के दौरान एक भीषण और दिल दहला देने वाला आत्मघाती बम धमाका हुआ है। पिशावर से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित कोहाट जिले में पुरानी पुलिस लाइंस के पास स्थित एक मस्जिद में उस समय विस्फोटकों से भरी गाड़ी घुसा दी गई, जब सैकड़ों लोग जुमे की नमाज अदा कर रहे थे। इस भीषण आत्मघाती हमले में कम से कम 16 नमाजियों के चीथड़े उड़ गए, जिनमें पांच पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जबकि 50 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। धमाका इतना जोरदार था कि मस्जिद की छत ढह गई और आसपास के मकानों व दुकानों की खिड़कियां चकनाचूर हो गईं। कई घायलों की हालत नाजुक होने के कारण मृतकों की संख्या में और इजाफा होने की आशंका बनी हुई है।
नमाज के दौरान घुसी विस्फोटकों से लदी गाड़ी, ताबड़तोड़ फायरिंग
प्रांतीय पुलिस प्रमुख जुल्फिकार हमीद और स्थानीय बचाव अधिकारियों के अनुसार, यह हमला पूरी साजिश के तहत मस्जिद परिसर और पास के सुरक्षा दफ्तरों को निशाना बनाकर किया गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक फिदायीन हमलावर विस्फोटकों से लदी गाड़ी को तेज रफ्तार में मस्जिद के मुख्य द्वार की ओर लेकर आया और जोरदार धमाके के साथ खुद को उड़ा लिया।
धमाके के तुरंत बाद कम से कम दो से तीन भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने पुलिस परिसर में घुसने की कोशिश की और सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। आतंकवाद निरोधी दस्ते (CTD) और पुलिस के जवानों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ में आतंकियों को मार गिराया। हालांकि, शुरुआती आत्मघाती विस्फोट ने मस्जिद के भीतर भारी तबाही मचाई, जिससे वहां भगदड़ और चीख-पुकार मच गई।
मलबे में तब्दील हुई मस्जिद की छत, राहत-बचाव कार्य युद्धस्तर पर
विस्फोट के बाद के दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाले थे। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया फुटेज में मस्जिद का बड़ा हिस्सा और कंक्रीट की छत मलबे में तब्दील नजर आई, जहां कई नमाजी दब गए। स्थानीय निवासियों, पुलिस और बचाव कर्मियों ने मिलकर मलबे से शवों और लहूलुहान घायलों को निकाला। कोहाट के जिला मुख्यालय अस्पताल और अन्य नजदीकी अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों के शरीर में छर्रे और कंक्रीट के टुकड़े घुसने की वजह से अंदरूनी अंग क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिसके चलते गंभीर रूप से जख्मी लोगों को पिशावर के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
हाफिज गुल बहादुर गुट ने ली जिम्मेदारी, टीटीपी पर भी शक की सुई
शुरुआती रिपोर्ट्स में सामने आया है कि इस घातक फिदायीन हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े हाफिज गुल बहादुर के गुट ‘इत्तेहादुल मुजाहिदीन’ ने ली है। खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के महानिरीक्षक ने भी पुष्टि की है कि यह हमला ‘फितना अल-खवारिज’ (पाकिस्तानी तालिबान के लिए इस्तेमाल होने वाला सरकारी शब्द) के आतंकियों द्वारा अंजाम दिया गया। एक दिन पहले ही उत्तर-पश्चिमी हांगू जिले में सुरक्षाबलों के काफिले पर आईईडी धमाका हुआ था, जिसमें छह पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। इसके बाद सेना द्वारा चलाए गए तलाशी अभियान के जवाब में आतंकियों ने शुक्रवार को नमाज के वक्त पुलिस लाइंस मस्जिद को साफ्ट टारगेट बनाकर यह खूनी बदला लिया।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने की निंदा, सीमा सुरक्षा पर फिर सवाल
इस कायरतापूर्ण हमले की पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कड़े शब्दों में निंदा की है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संबंधित अधिकारियों से घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है और घायलों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं राष्ट्रपति जरदारी ने कहा कि देश की संप्रभुता और जनता की सुरक्षा के लिए सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का खात्मा बेहद जरूरी है। लगातार हो रहे इन हमलों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस तंत्र अपने ही गृह क्षेत्र में कट्टरपंथी आतंकी संगठनों के हमलों को रोकने में पूरी तरह लाचार साबित हो रहे हैं।
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