बॉक्स ऑफिस पर ‘हनुमान अंश’ की सुनामी: ‘मिर्जापुर’ की बादशाहत पर भारी पड़ी आस्था

सिनेमाघरों में इन दिनों फिल्मों के बीच जबरदस्त घमासान देखने को मिल रहा है। जहां एक तरफ क्राइम ड्रामा और एक्शन का दबदबा माना जा रहा था, वहीं दूसरी ओर भक्ति और पौराणिक आभा से सजी फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर आते ही ऐसा तूफान खड़ा किया है कि बड़े-बड़े धुरंधरों के पसीने छूट गए हैं। सबसे ज्यादा असर बहुचर्चित फिल्म ‘मिर्जापुर’ पर पड़ा है, जिसकी गद्दी अब हिलती हुई नजर आ रही है। इसके साथ ही मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन्स पर रिलीज हुई अन्य फिल्में जैसे ‘दायरा’, ‘वाइब’ और ‘इरुमुडी’ भी दर्शकों के बीच अपनी जगह तलाशने में जुटी हैं। बॉक्स ऑफिस के ताज़ा आंकड़ों और दर्शकों के रुझान से साफ है कि कहानी और आस्था का संगम सिनेमाई कारोबार पर पूरी तरह हावी हो चुका है।

बॉक्स ऑफिस पर गरजा ‘हनुमान अंश’: दर्शकों की भारी भीड़ और ऐतिहासिक ऑक्यूपेंसी

‘हनुमान अंश’ की रिलीज को लेकर ट्रेड एनालिस्ट्स में पहले से ही उत्सुकता थी, लेकिन फिल्म ने ओपनिंग के साथ ही जो रफ्तार पकड़ी है, उसने सबको चौंका दिया है। उत्तर भारत के सिंगल स्क्रीन थिएटरों से लेकर दक्षिण भारत और मेट्रो शहरों के मल्टीप्लेक्स तक, सुबह के शुरुआती शोज़ से ही सिनेमाघर हाउसफुल नजर आ रहे हैं। फिल्म में दिखाए गए शानदार विजुअल इफेक्ट्स, रोंगटे खड़े कर देने वाला बैकग्राउंड स्कोर और भावनाओं से ओत-प्रोत कथा-पटकथा ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

ट्रेड पंडितों की मानें तो ‘हनुमान अंश’ ने अपने पहले ही वीकेंड में ताबड़तोड़ कमाई करते हुए इस साल के कई बड़े रिकॉर्ड्स को ध्वस्त करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। पारिवारिक दर्शक बड़ी तादाद में इस फिल्म को देखने पहुंच रहे हैं, जिससे मॉर्निंग और आफ्टरनून शोज़ में 70 से 80 फीसदी तक की ऑक्यूपेंसी दर्ज की जा रही है। वहीं नाइट शोज़ में यह आंकड़ा 90 फीसदी के पार पहुंच चुका है। दर्शकों का कहना है कि फिल्म में आस्था और आधुनिक तकनीक का ऐसा संतुलन साधा गया है जो बड़े पर्दे पर देखने लायक अनुभव देता है।

‘मिर्जापुर’ की गद्दी को लगा बड़ा झटका: कमाई की रफ्तार में भारी गिरावट

वेब सीरीज की अपार सफलता के बाद जब ‘मिर्जापुर’ को बड़े पर्दे पर उतारा गया, तो माना जा रहा था कि कालीन भैया और गुड्डू पंडित के भौकाल के आगे कोई टिक नहीं पाएगा। शुरुआती दिनों में फिल्म ने दमदार कारोबार भी किया, लेकिन जैसे ही ‘हनुमान अंश’ की एंट्री हुई, ‘मिर्जापुर’ की टिकट खिड़की पर रफ्तार सुस्त पड़ गई। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग क्राइम और वायलेंस से हटकर पौराणिक कथा की भव्यता की तरफ मुड़ गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘मिर्जापुर’ के स्क्रीन काउंट में भारी कटौती देखने को मिल रही है। थिएटर मालिकों ने दर्शकों की मांग को देखते हुए ‘मिर्जापुर’ के कई प्रमुख शोज़ ‘हनुमान अंश’ को ट्रांसफर कर दिए हैं। खासतौर पर टियर-2 और टियर-3 शहरों में जहां ‘मिर्जापुर’ को भारी उम्मीदें थीं, वहां ‘हनुमान अंश’ की दहाड़ ने इसकी कमाई को सीमित कर दिया है। हालांकि, फिल्म के डाई-हार्ड फैंस अभी भी सिनेमाघरों में पहुंच रहे हैं, जिससे यह पूरी तरह लुढ़की नहीं है, लेकिन जो आक्रामक बढ़त इसे मिलनी चाहिए थी, उस पर ब्रेक लग चुका है।

सस्पेंस थ्रिलर ‘दायरा’ का हाल: लिमिटेड ऑडियंस में मजबूत पकड़ की कोशिश

इन दोनों बड़ी फिल्मों के शोर के बीच रिलीज हुई ‘दायरा’ एक अलग शैली की फिल्म है। यह एक गंभीर, डार्क और इन्वेसटिगेशन पर आधारित सस्पेंस थ्रिलर है, जिसकी लक्षित दर्शक संख्या सीमित लेकिन वफादार मानी जाती है। ‘दायरा’ को समीक्षकों की तरफ से शानदार रिव्यूज मिले हैं और फिल्म की कहानी व कलाकारों के अभिनय की सराहना की जा रही है।

बॉक्स ऑफिस की बात करें तो ‘दायरा’ ने अपनी धीमी लेकिन स्थिर शुरुआत की है। बड़े बजट की फिल्मों के टकराव के कारण इसे व्यापक स्तर पर स्क्रीन्स नहीं मिल पाईं, लेकिन मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में शाम के शोज़ में दर्शकों की अच्छी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। ट्रेड विश्लेषकों का मानना है कि ‘दायरा’ वर्ड ऑफ माउथ के दम पर आने वाले दिनों में अपनी लागत निकालने और मुनाफा कमाने में सफल हो सकती है, बशर्ते इसे स्क्रीन्स पर टिके रहने का मौका मिले।

यूथ-ओरिएंटेड ‘वाइब’: क्या युवाओं को लुभाने में कामयाब रही फिल्म?

रोमांटिक-कॉमेडी और आज के दौर के युवाओं की जीवनशैली पर केंद्रित फिल्म ‘वाइब’ से काफी उम्मीदें थीं। कॉलेज जाने वाले युवाओं और अर्बन ऑडियंस को ध्यान में रखकर तैयार की गई यह फिल्म संगीत और ट्रेंडी डायलॉग्स के साथ मैदान में उतरी थी। हालांकि, पहले वीकेंड के नतीजों से साफ है कि फिल्म को दर्शकों से मिला-जुला रिस्पॉन्स मिला है।

‘वाइब’ के गाने सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं और रील्स के जरिए इसका प्रचार भी जोरों पर है, लेकिन टिकट खिड़की पर यह क्रेज पूरी तरह कैश नहीं हो पा रहा है। मेट्रो शहरों के कुछ पॉश इलाकों के मल्टीप्लेक्स को छोड़ दें, तो बाकी जगहों पर फिल्म की ऑक्यूपेंसी सामान्य से कम देखी गई है। फिल्म के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युवा दर्शक भी इस वक्त ‘हनुमान अंश’ और ‘मिर्जापुर’ के बीच बंटे हुए हैं, जिससे ‘वाइब’ को अपनी अलग पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।

रीजनल सिनेमा का दम ‘इरुमुडी’: आस्था और स्थानीय संस्कृति का शानदार मेल

दक्षिण भारतीय पृष्ठभूमि पर आधारित और पारंपरिक आस्था के ताने-बाने में बुनी गई फिल्म ‘इरुमुडी’ ने अपने गृह क्षेत्रों में जबरदस्त प्रभाव छोड़ा है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के सिनेमाघरों में ‘इरुमुडी’ को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। फिल्म की सादगी, प्रामाणिक परिवेश और भक्तिभाव ने स्थानीय दर्शकों के दिलों को छू लिया है।

हालांकि हिंदी बेल्ट में फिल्म को सीमित रिलीज मिली है, फिर भी सबटाइटल्स के साथ देखने वाले सिनेप्रेमियों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है। रीजनल सर्किट में ‘इरुमुडी’ ने ‘मिर्जापुर’ और ‘वाइब’ दोनों को पीछे छोड़ते हुए बेहतरीन कलेक्शन दर्ज किया है। ट्रेड पंडितों का कहना है कि अपनी न्यूनतम लागत और मजबूत स्थानीय पकड़ के चलते ‘इरुमुडी’ पहले ही सेफ ज़ोन में पहुंच चुकी है और आने वाले दिनों में यह एक बड़ी रीजनल ब्लॉकबस्टर साबित हो सकती है।

बॉक्स ऑफिस का आगामी गणित: कौन टिकेगा और कौन होगा बाहर?

आने वाले हफ्तों में बॉक्स ऑफिस का मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है। ‘हनुमान अंश’ जिस तरह से हर आयु वर्ग के दर्शकों को आकर्षित कर रही है, उससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिकी रहेगी। त्योहारों और छुट्टियों का सीजन नजदीक होने के कारण इसे फैमिली ऑडियंस का भरपूर फायदा मिलता दिख रहा है। दूसरी तरफ ‘मिर्जापुर’ की टीम को अपने कलेक्शन को बचाने के लिए नए प्रमोशनल दांव आजमाने पड़ सकते हैं।

वहीं ‘दायरा’ को अपनी मजबूत समीक्षाओं के आधार पर वीकडेज में टिके रहने की उम्मीद है, जबकि ‘वाइब’ को अपने लाइफटाइम कलेक्शन को सम्मानजनक स्तर तक पहुंचाने के लिए टिकट दरों में छूट जैसी रणनीतियों का सहारा लेना पड़ सकता है। क्षेत्रीय स्तर पर ‘इरुमुडी’ की सफलता यह साबित करती है कि जब कहानी अपनी जड़ों से जुड़ी होती है, तो उसे किसी बड़े बजट या भारी तामझाम की जरूरत नहीं होती।

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