
अरब सागर के खुले और संवेदनशील जलक्षेत्र में भारतीय नौसेना और पाकिस्तानी नौसेना के युद्धपोतों के बीच हुई अप्रत्याशित टक्कर के बाद दोनों देशों के सुरक्षा हलकों में हलचल मची हुई है। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अत्याधुनिक रडार, सोनार और सैटेलाइट सर्विलांस से लैस होने के बावजूद पाकिस्तानी जहाज भारतीय युद्धपोत के इतने करीब कैसे आ गया? क्या यह कोई नेविगेशन सिस्टम की तकनीकी खराबी थी या फिर आधी रात के अंधेरे में भारतीय नौसेना के संयम को परखने के लिए की गई कोई सोची-समझी आक्रामक साजिश?
नौसैनिक सूत्रों और सामरिक विश्लेषकों से मिल रही शुरुआती जानकारियों के अनुसार, यह घटना रात के सन्नाटे में बेहद खतरनाक परिस्थितियों के बीच घटी थी।
अरब सागर में आधी रात को क्या हुआ था?
घटना उस वक्त की है जब अरब सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) के समीप भारतीय नौसेना का एक अग्रिम पंक्ति का गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट/कार्वेट अपने नियमित गश्त पर था:
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‘डार्क वेसल’ पैंतरा और अचानक निकटता: सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी युद्धपोत अपने कुछ बाहरी नेविगेशन लाइट्स और ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) के सिग्नलों को असामान्य रूप से धीमा/छिपाकर भारतीय पोत के जलक्षेत्र की ओर तेजी से बढ़ा।
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खतरनाक कोण (Converging Course): रात के अंधेरे में जब दोनों जहाज एक-दूसरे के दृश्य दायरे में आए, तो पाकिस्तानी पोत समानांतर चलने के बजाय भारतीय युद्धपोत के सीधे रास्ते को काटने वाले खतरनाक कोण (Crossing Course) पर आगे बढ़ता रहा।
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रेडियो चेतावनी को नजरअंदाज करना: भारतीय वॉरशिप के ब्रिज से वीएचएफ (VHF) समुद्री आपातकालीन चैनल-16 पर तत्काल संपर्क साधा गया और दिशा बदलने की सीधी चेतावनी दी गई। इसके अलावा सर्चलाइट और फ्लैश सिग्नल्स के जरिए भी सतर्क किया गया, लेकिन पाकिस्तानी जहाज ने अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल की अनदेखी करते हुए अपनी रफ्तार धीमी नहीं की।
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अंतिम क्षणों का बचाव पैंतरा (Evasive Action): जब दोनों जहाजों के बीच की दूरी कुछ ही सौ मीटर रह गई, तो एक भीषण सीधी टक्कर (Head-on Collision) से बचने के लिए भारतीय कप्तान ने त्वरित ‘हार्ड-ए-स्टारबोर्ड’ (आपातकालीन तीव्र मोड़) का पैंतरा लिया। इसी मोड़ के दौरान दोनों जहाजों के बाहरी हिस्से (Outer Hull/Plates) एक-दूसरे से रगड़ खाते हुए निकल गए।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों (COLREGs) की खुली धज्जियां
समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) द्वारा COLREGs (International Regulations for Preventing Collisions at Sea, 1972) नियम तय किए गए हैं। इस घटना में पाकिस्तानी पोत ने इन प्राथमिक नियमों का खुला उल्लंघन किया:
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रूल 14 और 15 (हेड-ऑन और क्रॉसिंग सिचुएशन): खुले समुद्र में जब दो पावर-ड्रिवेन जहाज एक-दूसरे की ओर बढ़ते हैं, तो दोनों को दाईं ओर मुड़कर सुरक्षित दूरी बनानी होती है। पाकिस्तानी जहाज ने इस वैश्विक नियम को दरकिनार किया।
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सेफ स्पीड (Safe Speed) का अभाव: रात में कम विजिबिलिटी के दौरान जहाजों को सुरक्षित रफ्तार पर चलना अनिवार्य होता है, जबकि पाकिस्तानी पोत अत्यधिक आक्रामक गति से आगे बढ़ रहा था।
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राइट ऑफ वे (Right of Way): नियमित गश्त पर तय दिशा में चल रहे पोत को रास्ता देने के बजाय सामने आकर रुकावट पैदा करना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री उकसावे की श्रेणी में आता है।
क्या पाकिस्तानी जहाज ने जानबूझकर लिया यह जोखिम?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के पीछे दो मुख्य संभावनाएं हो सकती हैं:
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पहली संभावना: गैर-पेशेवर नाविक क्षमता (Incompetence): पाकिस्तानी चालक दल ने रात के अंधेरे में दूरी और सापेक्ष गति (Relative Speed) का गलत आकलन किया हो, जिससे जहाज अचानक बहुत करीब आ गया और घबराहट में समय पर मोड़ नहीं सका।
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दूसरी संभावना: सोची-समझी आक्रामकता (Testing Indian Readiness): रणनीतिक जानकारों का कहना है कि यह ‘ग्रे-ज़ोन टैक्टिक्स’ का हिस्सा हो सकता है। अक्सर तनावपूर्ण समुद्री सीमाओं पर विरोधी पक्ष यह देखने की कोशिश करता है कि सामने वाला युद्धपोत कितनी देर में अपनी स्थिति बदलता है और उसका रिएक्शन टाइम क्या है।
भारत ने बढ़ाई अरब सागर में निगरानी
इस घटना के बाद विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा नई दिल्ली में पाकिस्तानी उप-उच्चायुक्त को तलब कर कड़ा डिमार्श सौंपे जाने के साथ ही सैन्य मोर्चे पर भी चौकसी सख्त कर दी गई है।
भारतीय नौसेना की पश्चिमी नौसेना कमान (Western Naval Command) ने अरब सागर और गुजरात तट से सटे संवेदनशील समुद्री गलियारों में अपनी उपस्थिति और मजबूत कर दी है। पी-8आई (P-8I) समुद्री टोही विमान, एमक्यू-9बी सीगार्डियन ड्रोन और अग्रिम युद्धपोतों को इलाके में चौबीसों घंटे निगरानी के लिए अलर्ट पर रखा गया है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी गुस्ताखी का तुरंत मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।
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