भारत ने पकड़ा FBI का ‘मोस्ट वांटेड’ भगोड़ा, अमेरिका को सौंपा: जानिए कौन है मंजीत सिंह बेदी और क्या है पूरा मामला

अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) की ‘मोस्ट वांटेड फ्रॉडस्टर्स’ सूची में शामिल 64 वर्षीय भारतीय मूल के भगोड़े मंजीत सिंह बेदी को भारत सरकार ने अमेरिका को सौंप दिया है। पंजाब पुलिस ने उसे सितंबर के महीने में जालंधर से गिरफ्तार किया था। कानूनी व औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उसे प्रत्यर्पित (Extradite) कर अमेरिका भेज दिया गया है, जहां वह सिएटल पहुंच चुका है और उसे संघीय अदालत में पेश किया जा रहा है। FBI के निदेशक काश पटेल ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के अभियान की बड़ी सफलता बताया और भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग की सराहना की।

कौन है मंजीत सिंह बेदी?

मंजीत सिंह बेदी मूल रूप से भारतीय मूल का नागरिक है, जो अमेरिका के वाशिंगटन राज्य स्थित केंट (Kent) इलाके में रहता था।

  • एशियन ग्रोसरी स्टोर का संचालन: वह अमेरिका के टैकोमा शहर में एक एशियाई किराना स्टोर चलाता था।

  • दुकान की आड़ में मनी लॉन्ड्रिंग: अमेरिकी संघीय जांचकर्ताओं के अनुसार, बेदी का यह किराना स्टोर केवल रोजमर्रा के सामान की बिक्री के लिए नहीं था, बल्कि यह वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े केंद्र की तरह काम कर रहा था।

क्या है 6 लाख डॉलर (₹5.3 करोड़) का SNAP घोटाला?

अमेरिकी अभियोजकों और एफबीआई के मुताबिक, मंजीत सिंह बेदी ने अमेरिकी सरकार के सार्वजनिक कल्याण कार्यक्रम SNAP (Supplemental Nutrition Assistance Program) में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की:

  • गरीबों के भोजन भत्ते की तस्करी: अमेरिका में कम आय वाले परिवारों और गरीबों को भोजन खरीदने के लिए सरकार इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर (EBT) कार्ड के जरिए वित्तीय सहायता देती है।

  • अवैध कैश निकासी का खेल: बेदी पर आरोप है कि उसने वर्ष 2024 से 2025 के बीच इन फूड बेनिफिट्स की अवैध ‘ट्रैफिकिंग’ की। वह कार्डधारकों से छूट पर ईबीटी लाभ खरीदकर बदले में उन्हें नकद पैसे (Cash) देता था और फिर पूरे बिल का क्लेम सरकारी खजाने से लेकर सरकार को कम से कम 6 लाख डॉलर (लगभग 5.3 करोड़ रुपये) का चूना लगाया।

जमानत की शर्तें तोड़कर कनाडा के रास्ते भागा था भारत

अप्रैल में बेदी के खिलाफ अमेरिकी अदालत में वायर फ्रॉड के छह गंभीर आरोपों में आरोपपत्र (Indictment) दाखिल किया गया था।

  • अदालत ने उसे सुनवाई जारी रहने तक अपना पासपोर्ट सरेंडर करने और वाशिंगटन राज्य में ही रहने का सख्त आदेश दिया था।

  • लेकिन निगरानी की शर्तों का खुला उल्लंघन करते हुए बेदी कानूनी शिकंजे से बचने के लिए अमेरिका से फरार हो गया।

  • संघीय जांच में सामने आया कि वह पहले सड़क मार्ग या गुप्त रास्तों से कनाडा पहुंचा और फिर वहां से फर्जी दस्तावेजों या अन्य माध्यमों से अपने गृह देश भारत भाग आया। इसके बाद 21 मई को अमेरिकी संघीय अदालत ने उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था और एफबीआई ने उस पर इनाम घोषित कर अपनी मोस्ट वांटेड सूची में डाल दिया था।

पंजाब में भी दर्ज था ठगी का मामला, अब 20 साल तक की जेल का खतरा

भारत आने के बाद भी बेदी की संदिग्ध गतिविधियां नहीं थमीं। पंजाब के जालंधर में भी उसके खिलाफ एक स्थानीय व्यक्ति को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये ठगने का आपराधिक मामला दर्ज हुआ था। एफबीआई और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद पंजाब पुलिस ने जालंधर में घेराबंदी कर उसे धर दबोचा।

अब अमेरिका प्रत्यर्पित किए जाने के बाद संघीय अभियोजक अदालत से उसकी जमानत खारिज करने और ट्रायल पूरा होने तक उसे जेल में ही रखने की मांग कर रहे हैं। अमेरिकी कानून के तहत वायर फ्रॉड और SNAP बेनिफिट फ्रॉड के प्रत्येक आरोप में अधिकतम 20 साल तक की कैद और भारी जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

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