
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और स्थानीय संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे प्रख्यात पर्यावरणविद और रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के रवैये पर कड़ा रोष जताया है। नई दिल्ली स्थित लद्दाख भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वांगचुक ने दो टूक शब्दों में कहा कि “भारत लद्दाख और यहां के लोगों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहा है”। दिल्ली में गृह मंत्रालय (MHA) के अधिकारियों और लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों के बीच होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के अचानक रद्द होने के बाद वांगचुक ने अपनी पीड़ा साझा की।
‘टिकट बुक कराकर दिल्ली आया, फिर बताया कि बातचीत नहीं होगी’: वांगचुक का आरोप
सोनम वांगचुक ने एक वीडियो बयान और मीडिया से बातचीत में बताया कि 15 अक्टूबर को लेह में गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत बेनतीजा रही थी, क्योंकि केंद्र सरकार पहले की गई सहमतियों से पीछे हटती नजर आई। इसके बाद अधिकारियों ने कहा था कि इस मुद्दे पर 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में दोबारा औपचारिक बैठक होगी। वांगचुक ने कहा, “मैंने दिल्ली आने के लिए हवाई टिकट बुक कराए, तैयारियां कीं, लेकिन ऐन मौके पर हमें बताया गया कि बैठक नहीं हो रही है। लद्दाख के लोगों की आशाओं और भरोसे को बार-बार तोड़ा गया है। यह हमारे साथ बेहद निराशाजनक और अपमानजनक बर्ताव है।”
‘एक तरफ चीन की सीमा पर दबाव, दूसरी ओर अपने ही धोखा दे रहे’
सीमावर्ती लद्दाख की भौगोलिक और सामरिक स्थिति का जिक्र करते हुए वांगचुक ने भावनात्मक अंदाज में सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लद्दाख के नागरिक हमेशा से भारतीय सेना और देश की संप्रभुता के लिए पहली रक्षा पंक्ति बनकर खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक तरफ हमारे सामने सीमा पर चीन का लगातार दबाव बना हुआ है, और दूसरी तरफ अपने ही देश की सरकार हमारे लोगों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों को छीनने और वादों से मुकरने पर तुली हुई है। ऐसे संवेदनशील सीमांत क्षेत्र के नागरिकों के साथ यह रुख राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतंत्र दोनों के हित में नहीं है।”
वादों से पीछे हटने का आरोप: क्या हैं लद्दाख की मुख्य मांगें?
लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) लंबे समय से केंद्र सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं:
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पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood): केंद्र शासित प्रदेश (UT) में चुनी हुई विधानसभा और स्थानीय प्रतिनिधियों के हाथों में प्रशासनिक अधिकार।
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छठी अनुसूची (Sixth Schedule): आदिवासी बहुल आबादी की जमीन, रोजगार, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा कवच।
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रोजगार और लोक सेवा आयोग (Ladakh PSC): स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण और अलग भर्ती बोर्ड।
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संसदीय प्रतिनिधित्व: लद्दाख के लिए लोकसभा की दो सीटें और राज्यसभा में प्रतिनिधित्व।
वांगचुक का कहना है कि पूर्व में गृह मंत्रालय के साथ बातचीत के दौरान कुछ संवैधानिक सुरक्षा उपायों (अनुच्छेद 371 की तर्ज पर) और स्थानीय अधिकारों पर सैद्धांतिक सहमति की बात कही गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर सरकार ठोस ड्राफ्ट देने के बजाय बैठकों को टाल रही है।
आगे के आंदोलन की चेतावनी
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के लोग शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से अपने हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं, लेकिन अगर बातचीत के दरवाजे बंद किए गए और वादों को पूरा नहीं किया गया, तो लद्दाख के युवाओं और समाज के पास एक बार फिर सड़कों पर उतरकर व्यापक जन-आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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