मध्य अमेरिका में भयावह सूखा संकट: तीन देशों में इमरजेंसी घोषित, पनामा नहर से लेकर फसलों तक हाहाकार

मध्य अमेरिका का एक बड़ा भूभाग इन दिनों सदी के सबसे भीषण और विनाशकारी सूखे की चपेट में है। मानसूनी बारिश की भारी विफलता और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के चलते हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि क्षेत्र के तीन प्रमुख देशों—पनामा, अल साल्वाडोर और होंडुरास—ने अपने यहां आपातकाल (State of Emergency) और उच्चतम स्तर का रेड अलर्ट घोषित कर दिया है।

सूखे के कारण जहां मध्य अमेरिका के ‘ड्राई कॉरिडोर’ (Dry Corridor) में मक्का और बीन्स (दालों) की मुख्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, वहीं पीने के पानी और पनबिजली उत्पादन पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। इतना ही नहीं, वैश्विक व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन मानी जाने वाली पनामा नहर (Panama Canal) की झीलों में जलस्तर खतरनाक स्तर तक गिर गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में जहाजों की आवाजाही को सीमित करना पड़ा है। यूरोपीय आयोग के ‘संयुक्त अनुसंधान केंद्र’ (JRC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, केवल ग्वाटेमाला में ही 32 लाख से अधिक लोग भुखमरी और गंभीर मानवीय संकट के कगार पर पहुंच गए हैं।

किन तीन देशों ने घोषित की इमरजेंसी और क्या हैं जमीनी हालात?

मध्य अमेरिका के इस क्षेत्र में पिछले तीन महीनों से बारिश न होने और असामान्य लू (Heatwave) के कारण स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है:

  • पनामा (Panama): पनामा सरकार ने कैबिनेट स्तर पर प्रस्ताव संख्या 102-26 के तहत देशव्यापी इमरजेंसी घोषित कर दी है। गृह मंत्री दिनोस्का मोंटाल्वो के अनुसार, देश के 11 प्रमुख नदी बेसिन गंभीर जल संकट में हैं, जिससे पनबिजली संयंत्रों और पेयजल शोधन संयंत्रों का संचालन ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। पनामा नहर से रोजाना गुजरने वाले जहाजों के ड्राफ्ट और संख्या में कटौती की गई है।

  • अल साल्वाडोर (El Salvador): देश के पर्यावरण मंत्रालय ने मौसम और कृषि सूखे को देखते हुए पूरे देश में ‘रेड अलर्ट’ लागू कर दिया है। मई में यहां सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जबकि अगस्त महीने में लगातार 19 दिनों तक पानी की एक बूंद नहीं गिरी। संता रोसा डी लीमा में पारा 43.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया और देश में गर्मी के 14 ऑल-टाइम रिकॉर्ड टूट गए।

  • होंडुरास (Honduras): होंडुरास सरकार ने सूखे के खतरे को देखते हुए आपातकालीन रेड अलर्ट का दायरा 75 नगर पालिकाओं से बढ़ाकर सीधे 103 नगर पालिकाओं तक विस्तृत कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में बिना सिंचाई वाले लाखों परिवारों के लिए आपातकालीन खाद्य सहायता की व्यवस्था की जा रही है।

क्या है इस ऐतिहासिक सूखे का मुख्य कारण?

मौसम विज्ञानियों और पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई सामान्य मौसमी कमी नहीं, बल्कि जलवायु चक्र और ग्लोबल वार्मिंग का दोहरा प्रहार है:

  • अल नीनो (El Niño) का उग्र प्रभाव: इस सूखे का सबसे बड़ा और प्राथमिक कारण प्रशांत महासागर में सक्रिय शक्तिशाली ‘अल नीनो’ मौसमी घटना है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके प्रभाव से वैश्विक वायुमंडलीय हवाओं और बारिश के पैटर्न में भारी बदलाव आता है। जहां यह कुछ क्षेत्रों में भारी बाढ़ लाता है, वहीं मध्य अमेरिका और पूर्वी अफ्रीका में मानसूनी बादलों को पूरी तरह सोखकर भीषण सूखे में बदल देता है।

  • असामान्य गर्मी और तापमान के रिकॉर्ड: अल नीनो के साथ-साथ जून, जुलाई और अगस्त के दौरान मध्य अमेरिकी देशों में असामान्य हीटवेव देखी गई। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने जमीन, जलाशयों और मिट्टी की बची-खुची नमी को भी भाप बनाकर उड़ा दिया।

  • ‘ड्राई कॉरिडोर’ की प्राकृतिक संवेदनशीलता: मध्य अमेरिका का प्रशांत तटीय इलाका (ग्वाटेमाला, होंडुरास, अल साल्वाडोर और निकारागुआ) पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील माना जाता है। जंगलों की कटाई और भूजल के अत्यधिक दोहन ने इस क्षेत्र की सूखा झेलने की क्षमता को लगभग समाप्त कर दिया है।

पनामा नहर पर संकट: वैश्विक सप्लाई चेन पर क्या पड़ेगा असर?

पनामा नहर विश्व के लगभग 5 प्रतिशत समुद्री व्यापार और विशेषकर अमेरिका व एशिया के बीच माल ढुलाई का सबसे प्रमुख रास्ता है। यह नहर पूरी तरह मीठे पानी की कृत्रिम झीलों (गटून और अलाहुएला) पर निर्भर करती है, क्योंकि एक जहाज को नहर पार कराने में लाखों गैलन मीठा पानी समुद्र में बहाना पड़ता है।

सूखे के कारण झीलों का जलस्तर ऐतिहासिक रूप से नीचे चला गया है।

  • नहर प्राधिकरण को जहाजों के अधिकतम वजन (ड्राफ्ट) पर सीमा लगानी पड़ी है, जिससे मालवाहक जहाजों को कम कंटेनर लोड करने पड़ रहे हैं।

  • प्रतिदिन गुजरने वाले जहाजों की संख्या सीमित होने से दोनों सिरों (प्रशांत और अटलांटिक महासागर) पर जहाजों का भारी जाम लग गया है।

  • इससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है और अमेरिका से लेकर यूरोप तक आयातित वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है।

खाद्यान्न सुरक्षा पर खतरा: भुखमरी और पलायन की नई लहर की आशंका

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि ड्राई कॉरिडोर में मक्के और फलियों की पहली फसल (‘प्राइमेरा’ फसल चक्र) लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक नष्ट हो चुकी है।

मध्य अमेरिका के अधिकांश छोटे किसान निर्वाह खेती (Subsistence Farming) पर निर्भर हैं। फसलें बर्बाद होने से ग्रामीण परिवारों के पास न तो खाने के लिए अनाज बचा है और न ही अगली बुवाई के लिए बीज। मानवाधिकार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुरंत बड़े पैमाने पर खाद्य राहत नहीं पहुंचाई गई, तो भुखमरी से बचने के लिए लाखों लोग अपना घर-बार छोड़कर उत्तर की ओर (मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका की सीमाओं की तरफ) अवैध पलायन करने को मजबूर होंगे।

मौसम विभाग का अनुमान है कि यह मौसमी असंतुलन और बारिश की कमी अक्टूबर से लेकर मार्च 2027 तक जारी रह सकती है। ऐसे में आने वाले महीने मध्य अमेरिकी देशों के लिए जीवन-मरण की गंभीर परीक्षा साबित होने वाले हैं।

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