मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में आज पहनें यह खास रंग: बरसेगी तप और ज्ञान की कृपा, जानिए प्रिय भोग और सरल मंत्र

नवरात्रि के दूसरे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत उपासना की जाती है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली होता है; यानी जो कठोर तप और संयम का मार्ग दिखाती हैं, वही मां ब्रह्मचारिणी हैं। देवी के इस शांत, निर्मल और तपस्वी स्वरूप की कृपा प्राप्त करने के लिए साधक को पूजा के समय सफेद (श्वेत) या पीले (पीत) रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। सफेद रंग पवित्रता, सात्विकता, शांति और आंतरिक एकाग्रता का प्रतीक माना जाता है, जो देवी के ब्रह्मचर्य और तप के भाव से सीधे मेल खाता है। इसके अलावा, गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव और ज्ञान की वृद्धि के लिए हल्के पीले या क्रीम रंग के कपड़े पहनना भी अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।

कैसा है देवी का स्वरूप और क्यों प्रिय है सादगी?

मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन निर्जला और निराहार तपस्या की थी। उनके इसी त्याग और सादगी के कारण उन्हें तड़क-भड़क वाले रंगों की जगह शांत, सौम्य और प्राकृतिक आभा वाले रंग सर्वाधिक प्रिय हैं। जब साधक श्वेत या हल्के रंगों के परिधान पहनकर पूजा में बैठता है, तो मन में उठने वाले चंचल विचार शांत होते हैं और ध्यान की गहराई बढ़ती है।

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय भोग और पुष्प

पूजा के दौरान देवी को प्रसन्न करने के लिए विशेष सामग्रियों का अर्पण किया जाता है:

  • प्रिय पुष्प: मां को श्वेत कमल, गुड़हल और चमेली के सुगंधित फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं।

  • प्रिय भोग: तपस्वी स्वरूप होने के कारण देवी को शक्कर, सफेद मिष्ठान्न, दूध से बनी खीर और पंचामृत का भोग अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि शक्कर का भोग लगाने से साधक को लंबी आयु और आरोग्य का वरदान मिलता है।

देवी की कृपा पाने का बीज मंत्र

पूजा के समय श्वेत आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके इस दिव्य मंत्र का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए:

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

साधारण जप के लिए आप “ॐ ऐं नमः” अथवा “ॐ ह्रीं श्रीं अम्बिकायै नमः” का संकीर्तन भी कर सकते हैं।

किस मनोकामना की होती है पूर्ति?

मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से साधक के भीतर संयम, वैराग्य, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत होती है। जो विद्यार्थी पढ़ाई में ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं या जो युवा अपने लक्ष्य से भटक रहे हैं, उन्हें आज के दिन देवी की साधना से मानसिक स्थिरता और असीम इच्छाशक्ति की प्राप्ति होती है।

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