
हिंदी सिनेमा में चार दशकों से अधिक समय से अपनी दमदार अदाकारी और भारी-भरकम कद-काठी से पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता शरद सक्सेना हाल ही में एक बेहद मुश्किल दौर से गुजरे हैं। 70 से ज्यादा की उम्र में शरद सक्सेना को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, जहां उनकी करीब छह घंटे तक जटिल स्पाइन सर्जरी चली। जिंदगी और मौत के बीच के इस खिंचाव और शारीरिक पीड़ा को मात देकर जब वह बाहर आए, तो उन्होंने न केवल अपनी सेहत का हाल साझा किया, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के प्रति अपने अंदर दबे कई दर्द और कड़वे अनुभवों को भी खुलकर सामने रख दिया।
अस्पताल के बिस्तर से दिया हौसले और आत्मसम्मान का संदेश
शरद सक्सेना की पीठ और रीढ़ में लंबे समय से असहनीय दर्द था, जिसके चलते डॉक्टरों ने फौरन सर्जरी की सलाह दी थी। यह ऑपरेशन करीब छह घंटे लंबा खिंचा और इसमें डॉक्टरों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। सफल सर्जरी के बाद जब शरद सक्सेना होश में आए और धीरे-धीरे ठीक होने लगे, तो उन्होंने एक इंटरव्यू और सोशल मीडिया संवाद के दौरान यह बेबाक बयान दिया—“मुझे कोई नीचे नहीं गिरा सकता।” अभिनेता का यह कहना केवल बीमारी को मात देने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उनके पूरे जीवन, संघर्ष और फिल्म इंडस्ट्री में मिले दर्जे की ओर एक तीखा संकेत था।
बॉडीबिल्डिंग बनी करियर का रोड़ा, टाइपकास्ट होने का छलका मलाल
शरद सक्सेना ने बताया कि जब वे युवावस्था में फिल्मों में आए थे, तब वे जबरदस्त फिटनेस और बॉडीबिल्डिंग के शौकीन थे। आज के दौर में जहां सिक्स-पैक एब्स और मस्कुलर बॉडी होना हीरो बनने की पहली शर्त मानी जाती है, वहीं 70 और 80 के दशक में भारतीय सिनेमा में मस्कुलर शरीर वाले कलाकारों को सिर्फ गुंडा, डाकू या साइड-विलेन की भूमिकाओं तक सीमित कर दिया जाता था।
सक्सेना ने दर्द बयां करते हुए कहा कि एक बेहतरीन अभिनेता होने के बावजूद उन्हें दशकों तक सिर्फ खलनायक के हाथों पिटने वाले ‘जूनियर आर्टिस्ट’ या लड़ाके की तरह देखा गया। उनके मजबूत शरीर को उनकी ताकत बनाने के बजाय सिस्टम ने कमजोरी बना दिया और उन्हें कभी संवेदनशील या मुख्य भूमिकाएं आसानी से नहीं दी गईं।
उम्र के इस पड़ाव पर भी नहीं मानी हार, इंडस्ट्री को दिखाया आईना
ऑपरेशन थिएटर से सकुशल बाहर आने के बाद शरद सक्सेना का कहना था कि जिंदगी में उन्हें बार-बार किनारे करने और गिराने की कोशिश की गई। चाहे वह इंडस्ट्री की स्टीरियोटाइप सोच हो, काम न मिलने का तनाव हो, या फिर यह जानलेवा शारीरिक बीमारी—उन्होंने कभी घुटने नहीं टेके। ‘मुझे कोई नीचे नहीं गिरा सकता’ कहकर उन्होंने यह साफ संदेश दिया कि जब तक उनके अंदर सांस और अभिनय का जज्बा बाकी है, वे अपने पैरों पर खड़े रहेंगे और खुद को किसी पर निर्भर या लाचार नहीं होने देंगे।
‘शेरनी’ और ‘दबंग’ से साबित किया अपने अभिनय का लोहा
शरद सक्सेना केवल एक एक्शन विलेन नहीं रहे, बल्कि जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने अपने अभिनय से आलोचकों को चौंकाया। विद्या बालन की फिल्म ‘शेरनी’ में शिकारी की भूमिका हो, ‘मिस्टर इंडिया’ का डागा हो, ‘गुलाम’, ‘साथिया’ या फिर ‘दबंग 3’—हर किरदार में उन्होंने जान फूंकी। छह घंटे की इस बड़ी सर्जरी के बाद अभिनेता ने अपने प्रशंसकों को भरोसा दिलाया है कि वे तेजी से रिकवर कर रहे हैं और बहुत जल्द पूरी ऊर्जा के साथ दोबारा कैमरे का सामना करते नजर आएंगे।
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