‘मुसलमानों के मीर जाफर हैं इमरान मसूद, सहारनपुर में कांग्रेस को मिलेगी सिर्फ एक सीट’: सपा नेता माविया अली का तीखा हमला

उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन के दोनों प्रमुख घटक दलों—समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस—के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब मर्यादा की सीमाएं लांघने लगी है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा सपा को ‘बंगाल का हश्र याद रखने’ और राहुल गांधी का हाथ थामने की नसीहत दिए जाने के बाद सपा खेमे से जवाबी हमलों की बाढ़ आ गई है। कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के पलटवार के बाद अब समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता माविया अली ने इमरान मसूद पर बेहद तीखा, निजी और विवादित हमला बोल दिया है। माविया अली ने इमरान मसूद को आधुनिक दौर का ‘मुसलमानों का मीर जाफर’ करार देते हुए दावा किया है कि आगामी चुनाव में सहारनपुर जिले की सात सीटों में से कांग्रेस को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ेगा।

‘बीजेपी के कहने पर बोलते हैं, आज का टीपू बहुत मजबूत है’ – माविया अली

सपा नेता माविया अली ने इमरान मसूद के बयानों पर पलटवार करते हुए उन पर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की गोद में खेलने का आरोप लगाया। माविया अली ने तीखे शब्दों में कहा, “इमरान मसूद बीजेपी के लोगों के इशारे पर बोलना शुरू कर देते हैं। बीजेपी के लोग इनसे कहते हैं कि तुम सपा का कुछ नुकसान नहीं करा रहे हो। ये आज के दौर में मुसलमानों के मीर जाफर हैं, लेकिन वो यह भूल रहे हैं कि आज का टीपू (अखिलेश यादव) बहुत मजबूत है। इमरान मसूद बीजेपी की गोद में बैठे हैं और उन्हीं के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं।”

इतिहास के सबसे कुख्यात किरदार ‘मीर जाफर’ (जिसने नवाब सिराजुद्दौला के साथ गद्दारी कर अंग्रेजों की मदद की थी) से तुलना किए जाने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भारी भूचाल आ गया है।

‘सहारनपुर में कांग्रेस को मिलेगी सिर्फ एक सीट, वो भी रामपुर मनिहारान’

गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर मचे घमासान पर माविया अली ने कांग्रेस और इमरान मसूद को उनकी सियासी जमीन दिखाने की कोशिश की। इमरान मसूद ने दावा किया था कि 2017 के मुकाबले (जब कांग्रेस को 105 सीटें मिली थीं) इस बार कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए।

इस पर तंज कसते हुए माविया अली ने कहा कि सहारनपुर जिले में कांग्रेस का कोई बड़ा जनाधार नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को सहारनपुर में सिर्फ एक सीट मिलेगी, वह भी रामपुर मनिहारान (सुरक्षित) सीट। इमरान मसूद उस सीट के लिए कोई प्रत्याशी देख लें, जिनसे उनकी ठीक-ठाक बातचीत हो। बाकी सीटों पर सिर्फ और सिर्फ समाजवादी पार्टी का परचम लहराएगा।” माविया अली के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर सपा कार्यकर्ता और नेता कांग्रेस को किसी भी कीमत पर ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं हैं।

कैसे शुरू हुई सपा और कांग्रेस के बीच यह नूराकुश्ती?

इस पूरे सियासी टकराव की नींव मंगलवार को दिल्ली में आयोजित कांग्रेस के ‘उत्तर प्रदेश विजय संकल्प सम्मेलन’ में पड़ी थी। सम्मेलन के बाद मीडिया से बातचीत में इमरान मसूद ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा था कि पूरे देश और उत्तर प्रदेश में सिर्फ राहुल गांधी का माहौल है।

इमरान मसूद ने सपा को चेतावनी देते हुए कहा था:

  • राहुल गांधी ही विपक्ष की इकलौती आवाज हैं जिनसे भाजपा खौफ खाती है।

  • सपा को मजबूती से राहुल गांधी का हाथ थाम लेना चाहिए, वरना पश्चिम बंगाल में जो हश्र ममता बनर्जी का हुआ, वैसा ही हाल यूपी में भी देखने को मिल सकता है।

  • 2022 में सपा अकेले लड़ी तो सिर्फ 111-112 सीटों पर अटक गई, जबकि 2024 में कांग्रेस का साथ मिलने पर 37 लोकसभा सीटें जीतीं। इसलिए 2027 में कांग्रेस को 2017 से ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए।

इकरा हसन ने भी दिखाई थी औकात, अब निचले स्तर पर पहुंची जंग

इमरान मसूद के इस बयान के फौरन बाद कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने मोर्चा संभाला था। इकरा ने दो टूक कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा से सीधे मुकाबले की ताकत सिर्फ अखिलेश यादव के पास है और यदि गठबंधन टूटा तो नुकसान सपा का नहीं, बल्कि कांग्रेस का होगा।

लेकिन अब माविया अली द्वारा इमरान मसूद को ‘मीर जाफर’ कहना यह दर्शाता है कि विवाद केवल सीट शेयरिंग की सौदेबाजी (Bargaining) तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिमी यूपी में मुस्लिम लीडरशिप के वर्चस्व को लेकर सपा और कांग्रेस के स्थानीय छत्रपों में व्यक्तिगत रंजिश शुरू हो चुकी है।

गठबंधन के भविष्य पर मंडराए संकट के बादल

हालांकि कांग्रेस आलाकमान ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए यह संकेत दिया है कि वह इमरान मसूद को अनावश्यक बयानबाजी से बचने की नसीहत देगा और अक्टूबर में अखिलेश यादव के साथ औपचारिक सीट शेयरिंग वार्ता शुरू की जाएगी। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि 2027 में अखिलेश यादव ही गठबंधन का चेहरा होंगे, लेकिन पार्टी अपने वजूद की कीमत पर समझौता नहीं करेगी।

दूसरी तरफ, भाजपा विरोधी मतों के बंटवारे को रोकने के लिए बना ‘इंडिया’ गठबंधन अगर चुनाव से साल भर पहले ही आपस में ‘मीर जाफर’ और ‘गद्दार’ जैसे शब्दों से एक-दूसरे पर वार करेगा, तो इसका सीधा राजनीतिक फायदा 2027 के रण में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को मिलना तय माना जा रहा है।

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