
उत्तराखंड की राजनीति और कांग्रेस संगठन में शनिवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज कांग्रेस नेता हरीश रावत (Harish Rawat) ने पार्टी के सभी आधिकारिक पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफे की घोषणा कर दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत और भावुक पोस्ट साझा करते हुए हरीश रावत ने बताया कि वे कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य और उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी सदस्यता से पदमुक्त हो रहे हैं।
हरीश रावत का यह कदम प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा 2016 के बहुचर्चित अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) भर्ती घोटाले की मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में उनके पूर्व विशेष कार्याधिकारी (OSD) और वर्तमान पीए चंदन सिंह जीना के आवास पर की गई छापेमारी के बाद सामने आया है। रावत ने साफ शब्दों में कहा कि यदि उनके करीबी सहयोगी पर लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से “बहुत बड़ी शर्मिंदगी” का विषय होगा।
पूर्व ओएसडी के घर ईडी की रेड: नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार शाम प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि उसने 2016 में आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO / ग्राम सेवक) भर्ती परीक्षा में हुई व्यापक धांधली के मामले में देहरादून में कई ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसी के मुताबिक, जब हरीश रावत मुख्यमंत्री थे (2014 से 2017), तब चंदन सिंह जीना उनके ओएसडी पद पर तैनात थे।
ईडी के अनुसार, चंदन सिंह जीना के आवास से:
-
करीब ₹32 लाख की अघोषित नकदी बरामद की गई।
-
लगभग 200.5 ग्राम सोने के सिक्के और गहने मिले।
-
रोलेक्स (Rolex), राडो (Rado), पियाजे (Piaget) और टिसॉट (Tissot) जैसी ब्रांड्स की 12 बेशकीमती लग्जरी घड़ियां जब्त की गईं।
-
इसके अलावा जीना और उनके परिजनों के बैंक खातों में मौजूद लगभग ₹52.16 लाख की रकम को फ्रीज कर दिया गया।
ईडी का आरोप है कि 2016 की भर्ती परीक्षा में ओएमआर (OMR) शीट्स को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकालकर प्राइवेट कंप्यूटर एजेंसी के जरिए अभ्यर्थियों के खाली गोलों को भरवाया गया था और इसमें मोटी रिश्वत ली गई थी।
‘आरोप सच निकले तो मेरे लिए शर्मिंदगी’: हरीश रावत ने क्या दी सफाई?
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर लंबा स्पष्टीकरण दिया। रावत ने लिखा कि उन्होंने टीवी चैनलों पर अपने पूर्व सहयोगी के घर से भारी नकदी और गहने मिलने की खबरें देखी हैं।
रावत ने लिखा, “चंदन सिंह जीना एक बेहद सज्जन, विनम्र और परिश्रमी व्यक्ति रहे हैं। हालांकि, यदि उन्होंने ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ की है और यदि उनके खिलाफ इस तरह की किसी भी गलती के पुख्ता सबूत पाए जाते हैं, तो उनके इस तथाकथित दुस्साहसिक कृत्य के लिए मैं अत्यंत शर्मिंदा हूं। यह मेरे लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी की बात होगी। हालांकि, मुझे इन आरोपों पर फिलहाल बिल्कुल विश्वास नहीं है।”
रावत ने आगे कहा कि युवाओं के भविष्य और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करना अगली पीढ़ियों के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। उन्होंने जनता से क्षमा मांगते हुए कहा, “यदि जाने-अनजाने में मुझसे कोई ऐसा कृत्य हुआ है जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य पर आंच आई हो, तो मैं खुद को दंड का पात्र मानता हूं और कानून को मुझे सजा देनी चाहिए।”
इस्तीफे के पीछे बताई यह बड़ी वजह: ‘मेरी वजह से पार्टी की लड़ाई कमजोर न पड़े’
हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी के पदों से हटने का फैसला संगठन के व्यापक हित को ध्यान में रखकर लिया है।
उन्होंने लिखा कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर ‘छात्रों की गूंज’ और युवाओं के अधिकारों के जरिए शिक्षा प्रणाली व भर्ती में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे नाजुक समय में उनके किसी सहयोगी या उनके नाम पर बनने वाले किसी विवाद से कांग्रेस के संघर्ष और विश्वसनीयता को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
रावत ने भावुक होते हुए कहा, “मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर सीडब्ल्यूसी (CWC) का स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं। मैं बहुत विनम्रतापूर्वक इन दोनों पदों से हट रहा हूं, ताकि मेरी वजह से पार्टी के अभियान में रत्ती भर भी कमजोरी न आए। कांग्रेस पार्टी की सदस्यता मेरे खून और हड्डियों में बसी है, जो मेरे साथ ही जाएगी।”
‘दरवाजे पर दस्तक’: चुनाव से पहले नैरेटिव गढ़ने का लगाया आरोप
इस्तीफे की पेशकश के साथ ही हरीश रावत ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों के समय (Timing) पर भी तंज कसा। उन्होंने लिखा कि आगामी उत्तराखंड चुनावों में बड़े राजनीतिक दांव लगे हुए हैं।
रावत ने कहा, “मुझसे जब भी कोई पूछता था कि उत्तराखंड में चुनाव कब हैं, तो मैं मजाक में कहता था कि चुनाव तब होंगे जब सीबीआई या ईडी मेरे दरवाजे पर दस्तक देगी। इस बार सीधे मेरे दरवाजे पर आने के बजाय मेरे एक सहयोगी के दरवाजे पर दस्तक देकर राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई है।” रावत ने जनता और जांच एजेंसियों से यह भी अपील की कि यदि किसी के पास नियुक्तियों में उनके सीधे हस्तक्षेप का कोई भी साक्ष्य है, तो वह उसे तुरंत सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को सौंपे।
हरीश रावत के इस अप्रत्याशित कदम ने उत्तराखंड के सियासी पारे को गरमा दिया है। एक तरफ जहां विपक्षी भाजपा इसे कांग्रेस के शासनकाल के घोटालों पर मुहर बता रही है, वहीं कांग्रेस खेमे में पूर्व मुख्यमंत्री के इस नैतिक कदम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया