मोदी कैबिनेट के बड़े फैसले: ITLA अथॉरिटी को हरी झंडी, MSME के लिए ₹10,000 करोड़ का ग्रोथ फंड; PM मोदी को विशेष बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संपन्न हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश के बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स तंत्र और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को नई गति देने के उद्देश्य से दो ऐतिहासिक फैसलों पर औपचारिक मुहर लगा दी गई है। कैबिनेट ने जहां एक तरफ देश भर के बिखरे हुए परिवहन ढांचे को एक सूत्र में पिरोने के लिए ‘इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी’ (ITLA) के गठन को मंजूरी दी है, वहीं छोटे और मध्यम उद्योगों को इक्विटी पूंजी उपलब्ध कराने के लिए ₹10,000 करोड़ के ‘एसएमई ग्रोथ फंड’ (SME Growth Fund) को भी हरी झंडी दिखाई है। इसके अतिरिक्त, बैठक की शुरुआत में कैबिनेट ने संवैधानिक शासन प्रमुख के रूप में 25 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विशेष बधाई देते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव भी पारित किया।

क्या है ITLA अथॉरिटी और कैसे बदलेगा देश का ट्रांसपोर्ट सिस्टम?

केंद्रीय रेल एवं सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि देश की अर्थव्यवस्था 7 से 8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जिसके चलते परिवहन और लॉजिस्टिक्स की मांग करीब 10 प्रतिशत की सालाना रफ्तार से उछाल पर है। वर्तमान में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, नागरिक उड्डयन और अंतर्देशीय जलमार्ग अलग-अलग मंत्रालयों के तहत अपनी योजनाएं बनाते हैं, जिससे योजनाओं में दोहराव और देरी होती है। इस बिखराव को दूर करने के लिए कैबिनेट ने ITLA को एक स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) के रूप में स्थापित करने की मंजूरी दी है। यह नई शीर्ष संस्था कम से कम 10 वर्षों की अवधि को ध्यान में रखकर एक समग्र ‘नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान’ तैयार करेगी, जिससे सभी प्रकार के परिवहन माध्यमों को वैज्ञानिक और एकीकृत तरीके से जोड़ा जा सके।

₹500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स की टेक्निकल स्क्रूटनी और नेशनल डेटा रिपॉजिटरी

नई व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के ₹500 करोड़ या उससे अधिक की अनुमानित लागत वाले सभी प्रमुख परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का तकनीकी मूल्यांकन (Technical Appraisal) अब अनिवार्य रूप से ITLA द्वारा किया जाएगा। हालांकि, वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगा। इसके अलावा, यह प्राधिकरण परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उनके वास्तविक प्रभाव और उपयोगिता का भी फील्ड मूल्यांकन करेगा। इसके लिए जीएसटीएन (GSTN) के ई-वे बिल, फास्टैग (FASTag), वाहन (Vahan) पोर्टल, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और शहरी ट्रैफिक डेटा को एकीकृत कर एक ‘नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी’ बनाई जाएगी, जिससे देश में माल की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स लागत को न्यूनतम स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।

MSME को बड़ा बूस्ट: ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ की सरकारी प्रतिबद्धता के साथ एसएमई ग्रोथ फंड (SGF) स्थापित करने को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई पारंपरिक सरकारी कर्ज (Loan) योजना नहीं है, बल्कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) के माध्यम से काम करने वाला एक डायरेक्ट इक्विटी फंड होगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य उन उभरती हुई कंपनियों को लॉन्ग-टर्म रिस्क कैपिटल (जोखिम पूंजी) प्रदान करना है, जिनमें कारोबार विस्तार, अत्याधुनिक तकनीक अपनाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा करने की मजबूत क्षमता है। इस फंड का सबसे बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग आधारित उद्यमों के लिए सुरक्षित रखा जाएगा, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्थित औद्योगिक क्लस्टरों को विशेष प्राथमिकता मिलेगी।

शासन प्रमुख के रूप में PM मोदी के 25 साल, कैबिनेट ने पारित किया विशेष प्रस्ताव

इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक के दौरान एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण तब आया जब केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने एक विशेष बधाई प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शासन प्रमुख (Head of Government) के रूप में लगातार 25 वर्ष पूरे करने पर सम्मानित किया। 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। 2001 से 2014 तक लगातार 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद मई 2014 से वे भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व कर रहे हैं। लोकतांत्रिक इतिहास में लगातार ढाई दशक तक संवैधानिक सरकार के निर्वाचित शीर्ष पद पर बने रहने का यह अपने आप में एक अनूठा कीर्तिमान है।

सुशासन से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक: 10 बिंदुओं में सराहा योगदान

कैबिनेट प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के इस 25 वर्षीय सफर को सुशासन, आर्थिक सुधार, डिजिटल क्रांति, जन-कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा के 10 प्रमुख स्तंभों से जोड़कर रेखांकित किया गया। प्रस्ताव में गुजरात के ‘स्वागत’ और ‘ज्योतिग्राम’ मॉडल से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रगति’ (PRAGATI) प्लेटफॉर्म, जीएसटी (GST) सुधार, जन-धन खातों, 4 करोड़ से अधिक पक्के मकानों और 3.5 करोड़ लखपति दीदियों जैसी योजनाओं के मील के पत्थरों का जिक्र किया गया। इसके साथ ही अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने, सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक, स्वदेशी वैक्सीन निर्माण और यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के वैश्विक विस्तार में उनके निर्णायक नेतृत्व को देश के रूपांतरण का आधार बताया गया।

2047 तक ‘विकसित भारत’ की राह होगी आसान

आर्थिक और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज कैबिनेट द्वारा लिए गए दोनों निर्णय भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से सीधे जुड़े हुए हैं। ITLA के गठन से जहां लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के वर्तमान स्तर से घटकर सिंगल डिजिट में आने की उम्मीद है, वहीं ₹10,000 करोड़ की इक्विटी पूंजी मिलने से भारत के छोटे कारोबारी वैश्विक स्तर की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से सीधे मुकाबला कर सकेंगे। उद्योग संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए इसे भारतीय विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के लिए गेम-चेंजर करार दिया है।

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