
मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा भू-राजनीतिक और सैन्य टकराव अब उस मुहाने पर पहुंच चुका है जहां से किसी भी पल एक व्यापक क्षेत्रीय या वैश्विक महायुद्ध का विस्फोट हो सकता है। लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी और लेबनान से लेकर सीरिया तक बढ़ते तनाव के बीच अब इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका (US) को दो टूक और बेहद आक्रामक लहजे में सीधी चेतावनी जारी की है। ईरान के शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने वॉशिंगटन को आगाह करते हुए साफ शब्दों में कहा है कि आधुनिक समय में “युद्ध के नियम पूरी तरह बदल चुके हैं” और व्हाइट हाउस को किसी भी बड़ी तबाही से पहले इस जमीनी हकीकत को समझ लेना चाहिए। तेहरान ने दो टूक संदेश दिया है कि यदि अमेरिका या उसके किसी सहयोगी ने उसकी संप्रभुता या क्षेत्रीय हितों पर सीधा प्रहार करने की भूल की, तो उसका जवाब केवल पारंपरिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और रणनीतिक संपत्तियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
‘यह दशकों पुराना जमाना नहीं है’: ईरान की दो टूक चेतावनी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष कमांडरों और रक्षा अधिकारियों ने एक संयुक्त बयान और कड़े संदेश में कहा कि अमेरिका को यह भ्रम निकाल देना चाहिए कि वह दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर बिना किसी नुकसान के सैन्य कार्रवाई कर सकता है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अतीत में पश्चिम एशिया में अमेरिका जिस तरह से मनमर्जी से सैन्य हस्तक्षेप करता था, वह दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है।
ईरान की ओर से कहा गया, “अमेरिका और उसके सहयोगी अगर सोचते हैं कि वे हमारे खिलाफ किसी सीमित या सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देकर बच निकलेंगे, तो यह उनकी ऐतिहासिक भूल होगी। अब युद्ध के नियम पूरी तरह बदल चुके हैं। हमारी प्रतिरोधक क्षमता, अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें, हाइपरसोनिक तकनीक और आत्मघाती ड्रोन्स की पहुंच अब किसी भी रडार या डिफेंस शील्ड को भेदने में सक्षम हैं। देर होने से पहले पेंटागन और व्हाइट हाउस को इस नई सैन्य वास्तविकता को समझ लेना चाहिए।”
हाइपरसोनिक मिसाइलें, ड्रोन नेटवर्क और ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ का खौफ
सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के इस सख्त रुख के पीछे उसकी तेजी से विकसित हुई स्वदेशी सैन्य ताकत और क्षेत्रीय गठबंधन का नेटवर्क है। ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी मिसाइल तकनीक में भारी प्रगति की है। उसकी मध्यम और लंबी दूरी की ‘खेबर’, ‘फत्ताह’ और ‘सज्जील’ जैसी बैलिस्टिक मिसाइलें मध्य पूर्व में मौजूद किसी भी अमेरिकी सैन्य बेस—चाहे वह कतर का अल उदीद एयरबेस हो, बहरीन में स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय हो या इराक और सीरिया की चौकियां हों—को मिनटों में निशाना बना सकती हैं।
इसके साथ ही, ईरान द्वारा समर्थित ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (Axis of Resistance)—जिसमें लेबनान का हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोही, इराकी मिलिशिया और सीरियाई लड़ाके शामिल हैं—एक साथ कई मोर्चों पर हमला करने की क्षमता रखते हैं। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में हूती विद्रोहियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को ठप कर देने की क्षमता ने यह पहले ही साबित कर दिया है कि गैर-पारंपरिक युद्ध रणनीति (Asymmetric Warfare) में ईरान समर्थित गुट पश्चिमी नौसेना के लिए कितना बड़ा सिरदर्द बन चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा संकट का संकट
ईरान की इस सीधी चेतावनी ने पूरी दुनिया के तेल बाजारों और आर्थिक गलियारों में भी कंपकंपी पैदा कर दी है। रणनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर ईरान का कड़ा नियंत्रण है, जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा हर दिन जहाजों के जरिए गुजरता है।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति बनती है, तो तेहरान इस संकरे समुद्री मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकती हैं, जिससे अमेरिका और यूरोप सहित पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई और मंदी का ऐसा सैलाब आएगा जिसे संभालना नामुमकिन हो जाएगा।
कूटनीतिक रास्ते बंद होने की कगार पर
एक तरफ जहां अमेरिका ने क्षेत्र में अपने विमानवाहक पोतों (Aircraft Carriers), गाइडेड-मिसाइल विध्वंसकों और अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ाकर शक्ति प्रदर्शन जारी रखा है, वहीं ईरान का यह ताजा बयान यह दर्शाता है कि वह पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है। दोनों देशों के बीच किसी भी बैकचैनल बातचीत या कूटनीतिक मध्यस्थता की गुंजाइश लगातार सिमटती जा रही है।
तेहरान का यह कहना कि ‘युद्ध के नियम बदल चुके हैं’, दरअसल इस बात का खुला ऐलान है कि अब टकराव केवल सीमित सीमाओं में नहीं होगा, बल्कि अगर एक भी चिंगारी भड़की तो पूरा मध्य पूर्व एक ऐसी आग में जलेगा जिसका असर पूरी दुनिया को भुगतना पड़ेगा।
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