
उत्तर प्रदेश में मकान मालिकों और किरायेदारों के बीच कानूनी लिखापढ़ी को सरल, किफायती और विवादमुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में किराएदारी और पट्टा विलेखों (Lease & Rent Agreements) पर लगने वाले स्टांप शुल्क (Stamp Duty) और रजिस्ट्रेशन (निबंधन) फीस में 90 प्रतिशत तक की अभूतपूर्व कटौती के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
अब तक रेंट एग्रीमेंट को कानूनी रूप से पंजीकृत कराने के लिए हजारों रुपये का स्टांप और निबंधन शुल्क देना पड़ता था। भारी खर्च और रजिस्ट्री दफ्तरों के चक्कर काटने से बचने के लिए अधिकांश लोग नोटरी या 100 रुपये के स्टांप पेपर पर 11 महीने का कच्चा समझौता कर लेते थे। ऐसे अनौपचारिक समझौते अदालत में कानूनी तौर पर मान्य नहीं होते थे, जिससे मकान खाली कराने, किराया वसूली और संपत्ति पर अवैध कब्जे के गंभीर विवाद खड़े होते थे। योगी कैबिनेट के इस नए फैसले के बाद अब मात्र 500 रुपये से लेकर न्यूनतम दरों में वैध और रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट तैयार हो सकेगा, जिससे ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
10 साल तक की लीज पर भारी राहत: अब हजारों की जगह लगेंगे मात्र कुछ सौ रुपये
स्टांप एवं पंजीयन विभाग द्वारा तैयार नई स्लैब व्यवस्था के तहत सरकार ने मध्यमवर्गीय परिवारों, विद्यार्थियों और कामकाजी प्रोफेशनल्स को सबसे ज्यादा राहत दी है। पहले जहां संपत्ति के वार्षिक किराए पर 2 से 4 प्रतिशत तक का स्टांप शुल्क और 1 प्रतिशत अलग से रजिस्ट्रेशन फीस चुकानी पड़ती थी, वहीं अब इसे सीमित फिक्स स्लैब में बदल दिया गया है:
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2 लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर: जिन मकानों का वार्षिक किराया 2 लाख रुपये (लगभग 16,500 रुपये प्रति माह) तक है, उन पर अब स्टांप शुल्क को घटाकर मात्र 500 रुपये और रजिस्ट्रेशन फीस भी 500 रुपये तय कर दी गई है। पहले इसके लिए 8 हजार रुपये से 10 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे।
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2 लाख से 6 लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर: इस श्रेणी के मकानों के लिए स्टांप ड्यूटी घटाकर 1,500 रुपये और रजिस्ट्रेशन फीस भी 1,500 रुपये कर दी गई है।
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6 लाख से 10 लाख रुपये तक के वार्षिक किराए पर: उच्च किराये वाले आवासीय और छोटे व्यावसायिक परिसरों के लिए अधिकतम स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस को 2,500 रुपये के कैप में सीमित किया गया है।
यह नई रियायती शुल्क संरचना 1 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की अवधि वाले रेंट और लीज एग्रीमेंट्स पर लागू होगी।
11 महीने के कच्चे एग्रीमेंट के फर्जीवाड़े और विवादों से मिलेगी मुक्ति
भारतीय पंजीकरण अधिनियम (Registration Act) के अनुसार, 12 महीने या उससे अधिक अवधि के किसी भी लीज डीड का विधिवत पंजीकृत होना अनिवार्य है। स्टांप शुल्क बचाने के लिए लोग 11 महीने का अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट बनवाते थे।
जब मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होता था, तो अदालत में ये दस्तावेज साक्ष्य (Evidence) के तौर पर कमजोर साबित होते थे।
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मकान मालिक को डर सताता था कि किराएदार मकान पर कब्जा न कर ले या समय पर खाली न करे।
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वहीं किराएदारों को अचानक घर से निकाले जाने या अनचाहे किराया वृद्धि का तनाव रहता था।
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अब शुल्क 90% तक कम होने से दोनों पक्ष कानूनी रूप से पंजीकृत अनुबंध कराने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे अदालतों में संपत्ति विवादों की पेंडेंसी में भारी कमी आएगी।
घर बैठे ऑनलाइन बनेगा रेंट एग्रीमेंट: डिजिटल सिग्नेचर और आधार से होगा काम
सरकार केवल फीस कम करने तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि पंजीयन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की तैयारी भी कर ली गई है। प्रेरणा पोर्टल और आईजीआरएस यूपी (IGRS UP) के जरिए नागरिक घर बैठे अपने रेंट एग्रीमेंट का पंजीकरण करा सकेंगे:
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आधार बेस्ड ई-हस्ताक्षर: मकान मालिक और किराएदार को सब-रजिस्ट्रार दफ्तर जाने की मजबूरी नहीं होगी। वे आधार ओटीपी आधारित डिजिटल वेरिफिकेशन से दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर सकेंगे।
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दलालों और बिचौलियों से आजादी: रजिस्ट्री कार्यालयों में लगने वाली अनावश्यक भीड़ और अतिरिक्त कमीशनखोरी से आम जनता को मुक्ति मिलेगी।
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डिजिटल सर्टिफाइड कॉपी: एग्रीमेंट अप्रूव होते ही दोनों पक्षों को कानूनी रूप से वैध डिजिटल कॉपी सीधे पोर्टल और ईमेल पर प्राप्त हो जाएगी।
नोएडा, लखनऊ, कानपुर जैसे बड़े शहरों के युवाओं को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और आईटी शहर जैसे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में लाखों छात्र, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवा और निजी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारी किराए पर रहते हैं।
बैंक खाता खुलवाने, पासपोर्ट बनवाने, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य सरकारी पहचान पत्रों में एड्रेस प्रूफ (पते का प्रमाण) के लिए रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य होता है। 11 महीने के नोटरी वाले कागजात को कई एजेंसियां रिजेक्ट कर देती थीं। अब मात्र कुछ सौ रुपये में रजिस्टर्ड डीड मिलने से युवाओं के लिए शहर में रहना और जरूरी दस्तावेज बनवाना बेहद सुगम हो जाएगा। यह नीतिगत सुधार राज्य के रेंटल हाउसिंग मार्केट को पारदर्शी बनाकर रियल एस्टेट इकोसिस्टम को नई गति प्रदान करेगा।
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