
भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी पौराणिक और ऐतिहासिक गाथाओं का जिक्र होता है, तो दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं। इन दिनों बॉलीवुड गलियारों से लेकर आम जनता के बीच अगर किसी एक फिल्म की सबसे ज्यादा चर्चा है, तो वह है निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित महाकाव्य फिल्म ‘रामायण’। इस भव्य सिनेमाई प्रोजेक्ट में बॉलीवुड के सुपरस्टार रणबीर कपूर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की भूमिका में नजर आने वाले हैं। हाल ही में रणबीर कपूर ने इस बहुचर्चित किरदार को लेकर अपनी तैयारी, अपने मानसिक समर्पण और अपनी निजी जिंदगी में आए सकारात्मक बदलावों पर खुलकर बात की है। रणबीर का कहना है कि भगवान राम का किरदार उनके लिए केवल एक और फिल्मी अभिनय नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और गहरा भावनात्मक अनुभव बन गया है।
शूटिंग के शुरुआती दिनों से ही रणबीर कपूर को इस बात का पूरा एहसास था कि यह भूमिका उनके करियर की सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक भूमिका है। करोड़ों लोगों की आस्था, भावनाएं और सांस्कृतिक पहचान भगवान राम से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में रणबीर ने इस किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए न केवल अभिनय के स्तर पर बल्कि निजी आचरण के स्तर पर भी कड़े अनुशासन का पालन किया। रणबीर ने खुलासा किया कि सेट पर जाने से पहले और अपने दिन की शुरुआत करते समय वह रोज खुद को एक खास बात याद दिलाते थे। वह खुद से कहते थे कि यह कोई आम किरदार नहीं है जिसे तकनीक या डायलॉग डिलीवरी के सहारे पूरा किया जा सके; इसके लिए अंतरात्मा का शांत, शुद्ध और पूरी तरह समर्पित होना अनिवार्य है।
भगवान राम का किरदार मेरे लिए केवल एक रोल नहीं बल्कि जीवन की साधना है: रणबीर कपूर
रणबीर कपूर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब आप ऐसे दिव्य व्यक्तित्व को पर्दे पर जीने की कोशिश करते हैं, तो आपको अपने अंदर के तमाम विकारों को बाहर छोड़ना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम के चरित्र की सबसे बड़ी ताकत उनका ठहराव, उनकी विनम्रता, उनका धैर्य और उनका अगाध करुणा भाव है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी अभिनेता के लिए इस तरह के ठहराव को आत्मसात करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। रणबीर ने बताया कि वह रोज सुबह उठकर ध्यान लगाते थे और खुद को याद दिलाते थे कि सेट पर उन्हें किसी भी तरह का अहंकार या जल्दबाजी नहीं दिखानी है। उनका पूरा फोकस इस बात पर रहता था कि उनकी आंखों में वह दिव्यता और शांति नजर आए जिसकी कल्पना हर भारतीय अपने आराध्य में करता है।
फिल्म ‘रामायण’ से जुड़े सूत्रों और टीम के सदस्यों का भी कहना है कि रणबीर कपूर ने इस प्रोजेक्ट को जिस गंभीरता से लिया है, वैसा समर्पण बहुत कम देखने को मिलता है। इस किरदार की तैयारी के लिए रणबीर ने अपनी आवाज के उतार-चढ़ाव, संस्कृत श्लोकों के सही उच्चारण और शुद्ध हिंदी संवाद अदायगी पर महीनों तक कड़ा अभ्यास किया। पौराणिक गाथाओं के पात्रों में भाषा का शुद्धिकरण और लहजे की स्पष्टता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। रणबीर ने इसके लिए भाषा विशेषज्ञों और डिक्शन कोच की विशेष मदद ली ताकि संवाद बोलते समय हर शब्द में वही गरिमा और वजन झलके जो मर्यादा पुरुषोत्तम के वचनों में होना चाहिए।
खान-पान से लेकर दिनचर्या तक, रणबीर ने अपनाई बेहद सात्विक जीवनशैली
भगवान राम के स्वरूप में ढलने के लिए रणबीर कपूर ने सिर्फ मानसिक तैयारी ही नहीं की, बल्कि अपने शारीरिक और निजी जीवन में भी आमूलचूल बदलाव किए। खबरों के मुताबिक, इस किरदार के सम्मान और शुद्धता को बनाए रखने के लिए रणबीर ने पूरी तरह से सात्विक जीवनशैली अपना ली। उन्होंने मांसाहारी भोजन और शराब से पूरी तरह दूरी बना ली। इसके अलावा देर रात तक चलने वाली पार्टियों और बॉलीवुड के चकाचौंध भरे सामाजिक आयोजनों से भी खुद को अलग कर लिया। रणबीर का मानना था कि जब तक शरीर और मन पूरी तरह शुद्ध नहीं होंगे, तब तक उस पावन ऊर्जा को महसूस कर पाना नामुमकिन है जो इस किरदार की पहली मांग है।
शारीरिक बनावट के मामले में भी रणबीर ने भारी बदलाव किए। ‘एनिमल’ जैसी फिल्म में बेहद आक्रामक, मस्कुलर और रफ लुक में दिखने के बाद, ‘रामायण’ के लिए उन्हें एक बेहद शांत, ग्रेसफुल, छरहरे और तेजस्वी स्वरूप की आवश्यकता थी। इसके लिए उन्होंने अपनी फिटनेस ट्रेनिंग को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने भारी वजन उठाने के बजाय योग, प्राणायाम, लचीलेपन और शरीर के संतुलन पर ध्यान दिया। उनके ट्रेनर ने उनके लिए एक विशेष वर्कआउट और डाइट प्लान तैयार किया, जिससे उनका शरीर एक पराक्रमी धनुर्धर और साथ ही एक तपस्वी की तरह सुडौल और संतुलित नजर आ सके।
नितेश तिवारी का विजन और तकनीकी बारीकियों का बेजोड़ संगम
निर्देशक नितेश तिवारी भारतीय सिनेमा में अपनी संवेदनशील और यथार्थवादी कहानी कहने की शैली के लिए जाने जाते हैं। ‘दंगल’ और ‘छिछोरे’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बाद नितेश तिवारी ‘रामायण’ को ग्लोबल स्तर पर पेश करने की तैयारी में जुटे हैं। रणबीर ने निर्देशक की तारीफ करते हुए कहा कि नितेश तिवारी के पास हर दृश्य, हर भाव और हर संवाद का इतना स्पष्ट खाका है कि एक अभिनेता के तौर पर काम करना बहुत प्रेरणादायक हो जाता है। फिल्म में वीएफएक्स और विजुअल इफेक्ट्स के लिए हॉलीवुड के शीर्ष ऑस्कर विजेता तकनीशियनों की टीम काम कर रही है, ताकि भारतीय संस्कृति के इस गौरवशाली अध्याय को दुनिया के सामने सबसे भव्य अंदाज में प्रस्तुत किया जा सके।
इस प्रोजेक्ट की कास्टिंग को लेकर भी देशभर के दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर, माता सीता के किरदार में साई पल्लवी और लंकापति रावण की भूमिका में केजीएफ फेम यश का नाम सामने आने के बाद से ही इस फिल्म को लेकर सिनेप्रेमियों का रोमांच चरम पर है। रणबीर ने बताया कि जब पूरी टीम सेट पर एक साथ आती है, तो माहौल किसी मंदिर जैसा पवित्र बन जाता है। सभी कलाकार और क्रू मेंबर्स इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि वे केवल एक फिल्म नहीं बना रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐतिहासिक दस्तावेज तैयार कर रहे हैं।
दर्शकों की उम्मीदों और सांस्कृतिक जिम्मेदारी पर क्या बोले रणबीर?
रणबीर कपूर ने इस बात को स्वीकार किया कि जब आप इतने बड़े और पूजनीय चरित्र को निभाते हैं, तो हर कदम पर दबाव और जिम्मेदारी का अहसास होता है। भारत के कोने-कोने में, कश्मीर से कन्याकुमारी तक और वैश्विक स्तर पर बसे भारतीय समुदाय के दिल में रामायण रची-बसी है। रामानंद सागर के धारावाहिक से लेकर अब तक के हर चित्रण को लोगों ने बेहद संजीदगी से देखा है। रणबीर ने कहा कि उनका प्रयास किसी की नकल करना नहीं, बल्कि वाल्मीकि रामायण के मूल भाव को आधुनिक सिनेमाई तकनीक के साथ पूरी सच्चाई से जीना है। वह चाहते हैं कि जब दर्शक थियेटर में जाएं, तो उन्हें पर्दे पर रणबीर कपूर नहीं, बल्कि साक्षात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का सौम्य और पराक्रमी रूप दिखाई दे।
फिल्म की शूटिंग के हर शेड्यूल के दौरान रणबीर कपूर अपने काम को लेकर बेहद सतर्क रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि यह अनुभव उनके व्यक्तिगत जीवन को भी हमेशा के लिए बदलने वाला साबित हुआ है। इस किरदार ने उन्हें जीवन में अधिक धैर्यवान, संवेदनशील और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाया है। नितेश तिवारी की यह मेगा बजट फिल्म दो भागों में रिलीज होने की योजना है, और इसका पहला भाग सिनेमाघरों में आने से पहले ही भारतीय सिनेमा के इतिहास का सबसे बड़ा सांस्कृतिक मील का पत्थर बनने की राह पर अग्रसर है।
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