
लखनऊ/ग्राउंड रिपोर्ट। नवाबों के शहर लखनऊ में नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आम नागरिकों और वाहन स्वामियों के बीच असंतोष गहराता जा रहा है। शहर के व्यस्ततम चौराहों, अस्पतालों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सामने दिनभर लगने वाले भीषण जाम को नजरअंदाज कर भीतरी गलियों और सुनसान सर्विस लेन से गाड़ियां क्रेन (टोइंग वैन) के जरिए उठाने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का सीधा आरोप है कि नगर निगम का प्रवर्तन दस्ता और ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली वास्तविक अतिक्रमणकारियों पर लगाम कसने के बजाय आम जनता के वाहनों को मनमाने तरीके से उठाकर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली और चालान सिंडिकेट को बढ़ावा दे रहे हैं।
शहर के केंद्र लालबाग में नगर निगम मुख्यालय से चंद कदमों की दूरी पर स्थित कार बाजार की स्थिति सबसे ज्यादा सवाल खड़े करती है। ‘नो पार्किंग’ के बोर्ड लगे होने के बावजूद वहां पूरे मार्ग पर पुरानी गाड़ियों के विक्रेताओं (कार डीलर्स) द्वारा दोनों तरफ सैकड़ों गाड़ियां खड़ी कर सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा कर लिया गया है। यह वही मार्ग है जहां से नगर निगम के आला अधिकारियों की गाड़ियां रोजाना गुजरती हैं। इसके बावजूद इन रसूखदार कार बाजार संचालकों के वाहनों पर न तो क्रेन चलती है और न ही उनका कोई चालान काटा जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जहां मुख्य मार्ग बाधित है, वहां आंखें मूंद ली जाती हैं और जहां किसी वाहन से ट्रैफिक प्रभावित नहीं हो रहा, वहां से क्रेन मिनटों में गाड़ी गायब कर देती है।
यही दोहरा रवैया शहर के अन्य प्रमुख हिस्सों में भी देखने को मिल रहा है। अमर शहीद पथ पर स्थित मेदांता अस्पताल और चिनहट के पास चंदन अस्पताल के चारों ओर तीमारदारों और ऑटो चालकों के अवैध जमावड़े से दिनभर एम्बुलेंस और आम वाहन घंटों रेंगते रहते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास से अतिक्रमण हटाने में प्रशासन कोई ठोस दिलचस्पी नहीं दिखाता। इसके विपरीत, लुलु मॉल के पिछले हिस्से, इनॉक्स और फन रिपब्लिक सिनेमा की सर्विस लेन को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है। शाम होते ही यहां निजी ठेकेदारों की टोइंग क्रेनें सक्रिय हो जाती हैं और बिना किसी पूर्व चेतावनी के चंद मिनटों के लिए रुके वाहनों को उठाकर ले जाया जाता है।
राजधानी के हृदय स्थल कहे जाने वाले हजरतगंज में भी इस व्यवस्था का खुला खेल नजर आता है। हजरतगंज में मुख्य मार्ग पर चुनिंदा बड़े प्रतिष्ठानों और बैंकों के सामने गाड़ियां सड़क पर खड़ी रहती हैं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वहीं दूसरी तरफ, नगर निगम की मल्टीलेवल अंडरग्राउंड पार्किंग के पीछे स्थित शांत गलियों में खड़ी दोपहिया और चार पहिया गाड़ियों को क्रेन से सबसे पहले खींचा जाता है, जबकि उन गलियों में ट्रैफिक का कोई बड़ा दबाव नहीं रहता। नागरिकों का आरोप है कि जानबूझकर ऐसे ‘सॉफ्ट टारगेट’ चुने जाते हैं जहां लोग आसानी से जुर्माना भर दें, जबकि मुख्य मार्गों के दबंग अतिक्रमणकारियों पर हाथ डालने से प्रशासनिक अमला कतराता है।
सड़क परिवहन और मोटर वाहन अधिनियम (MVA) के स्पष्ट दिशानिर्देश हैं कि नगर निगम द्वारा अधिकृत किसी भी टोइंग क्रेन के साथ ट्रैफिक पुलिस का वर्दीधारी उपनिरीक्षक (SI) या हेड कांस्टेबल मौके पर मौजूद होना अनिवार्य है। टोइंग से पहले लाउडस्पीकर से सार्वजनिक घोषणा करना और गाड़ी मालिक के मौजूद होने पर क्रेन चार्ज के बजाय केवल नो-पार्किंग का चालान करना नियमानुसार तय है। इसके बावजूद शहर में चल रही निजी क्रेनें बिना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के गुपचुप तरीके से गाड़ियां उठाती देखी जा रही हैं, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। जब इस बाबत पीड़ित नागरिक ट्रैफिक पुलिस के उच्चाधिकारियों या नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों से संपर्क करने का प्रयास करते हैं, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता और कई बार अधिकारियों द्वारा सीधे फोन काट दिया जाता है।
पार्किंग के नाम पर चल रही इस मनमानी के खिलाफ अब शहर के विभिन्न व्यापारिक संगठन और नागरिक मंच मुखर होने लगे हैं। लोगों की मांग है कि:
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सभी प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक केंद्रों पर पहले पर्याप्त आधिकारिक पार्किंग स्थल चिन्हित किए जाएं।
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लालबाग, अमीनाबाद और अस्पतालों के सामने स्थाई रूप से कब्जा जमाने वाले बड़े सिंडिकेट पर बुलडोजर और कानूनी कार्रवाई हो।
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टोइंग वैन पर अनिवार्य रूप से जीपीएस और बॉडी वॉर्न कैमरे लगाए जाएं ताकि यह रिकॉर्ड रहे कि गाड़ी किस जगह से और किस नियम के तहत उठाई गई।
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बिना ट्रैफिक पुलिस अधिकारी की मौजूदगी के गाड़ियां उठाने वाली निजी क्रेन एजेंसियों के अनुबंध तुरंत प्रभाव से रद्द किए जाएं।
यदि शासन और जिला प्रशासन ने समय रहते इस अनियंत्रित टोइंग व्यवस्था की समीक्षा नहीं की, तो जनता का यह आक्रोश आने वाले दिनों में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन के रूप में फूट सकता है।
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