वंदे मातरम् पर कर्नाटक में भारी घमासान: प्रियांक खरगे ने BJP को दी खुली चुनौती

कर्नाटक में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर कांग्रेस सरकार और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। सिद्धारमैया सरकार द्वारा राज्य के सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सभी अंतरे गाने के बजाय केवल शुरुआती दो अंतरे (Stanzas) गाए जाने के फैसले पर भाजपा ने चौतरफा हमला बोला था। अब इस विवाद में कर्नाटक के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री प्रियांक खरगे ने मोर्चा संभालते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को सीधी और खुली चुनौती दे डाली है।

कलबुर्गी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रियांक खरगे ने कहा कि यदि भाजपा के नेता बिना किसी कागज या टेलीप्रॉम्प्टर की मदद लिए याददाश्त से वंदे मातरम् के सभी छंद सही-सही गाकर सुना दें, तो वे अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देंगे।

‘बिना कागज-टेलीप्रॉम्प्टर गाएं, दे दूंगा इस्तीफा’: प्रियांक खरगे का चैलेंज

प्रियांक खरगे ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा:

“भाजपा हर बात पर राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने लगती है। मैं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक को खुली चुनौती देता हूं कि वे कैमरे के सामने बिना किसी कागज के टुकड़े या टेलीप्रॉम्प्टर को देखे, जुबानी याद से ‘वंदे मातरम्’ के सभी अंतरे गाकर दिखाएं। अगर वे ऐसा कर देते हैं, तो मैं उसी क्षण अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा। मैं देखना चाहता हूं कि क्या भाजपा के नेता मेरी यह चुनौती स्वीकार करने का साहस जुटा पाते हैं।”

क्या है विवाद की मुख्य वजह?

कर्नाटक में यह पूरा सियासी बवाल राज्य सरकार के एक प्रशासनिक आदेश के बाद शुरू हुआ है:

  • कर्नाटक सरकार का आदेश: राज्य सरकार ने निर्देश जारी किया कि कर्नाटक के सभी आधिकारिक और सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले 2 अंतरे ही गाए जाएंगे। हालांकि, जिन कार्यक्रमों में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल मौजूद रहेंगे, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है।

  • कांग्रेस का 1937 का प्रस्ताव: कांग्रेस पार्टी का तर्क है कि कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने वर्ष 1937 में ही यह ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया था कि पार्टी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो छंद गाए जाएंगे।

  • भाजपा का तुष्टीकरण का आरोप: भाजपा ने राज्य सरकार के इस कदम को राष्ट्रगीत का अपमान और ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ की राजनीति करार दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गौरव के प्रतीकों के पूरे सम्मान का नियम बनाया है, ऐसे में कांग्रेस सरकार जानबूझकर राष्ट्रगीत को छोटा कर रही है।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला, गरमाई सियासत

विवाद सिर्फ राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह मामला अब कानूनी चौखट तक भी पहुंच गया है। कर्नाटक सरकार द्वारा केवल दो अंतरे गाने के आदेश को कर्नाटक हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) के जरिए चुनौती दी गई है, जिसमें इस सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग की गई है।

प्रियांक खरगे के इस्तीफे वाले चैलेंज के बाद कर्नाटक का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। कांग्रेस जहां इसे ऐतिहासिक परंपरा और भाजपा के ‘खोखले राष्ट्रवाद’ की परीक्षा बता रही है, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि कांग्रेस अपनी गलतियों को छिपाने के लिए बेतुकी बयानबाजी का सहारा ले रही है।

Check Also

कौन हैं आलोक डिमरी? ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान पहुंचे भारतीय राजनयिक, लाहौर देखने की जताई इच्छा

भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक हलचलों और तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक नाम अचानक …