वाराणसी में छह दिनों की राहत के बाद गंगा में फिर शुरू हुआ धीमा बढ़ाव, काशी के घाटों पर अलर्ट; प्रयागराज में थमी जलस्तर की रफ्तार

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्य मैदानी क्षेत्रों में नदियों के बदलते जलस्तर ने एक बार फिर प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। धर्मनगरी काशी (वाराणसी) में पिछले छह दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार दर्ज हो रही गिरावट के बाद अब अचानक धीमी गति से बढ़ाव का नया सिलसिला शुरू हो गया है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगभग 0.5 सेंटीमीटर प्रति घंटे की धीमी रफ्तार से ऊपर चढ़ रहा है। हालांकि बढ़ाव की गति बेहद मंद है, लेकिन नदी किनारे बसे मोहल्लों और विश्वप्रसिद्ध घाटों पर एक बार फिर सतर्कता बढ़ा दी गई है। दूसरी ओर, तीर्थराज प्रयागराज से राहत भरी खबर सामने आई है, जहां गंगा और यमुना दोनों प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे बना हुआ है और संगम के कछारी इलाकों में बाढ़ का सीधा खतरा फिलहाल टल गया है।

वाराणसी में गंगा के जलस्तर में फिर दर्ज हुआ धीमा बढ़ाव, काशी के घाटों पर सतर्कता तेज

वाराणसी में शनिवार को केंद्रीय जल आयोग के मापक केंद्र पर गंगा का जलस्तर 68.02 मीटर दर्ज किया गया। यद्यपि यह स्तर चेतावनी बिंदु (70.262 मीटर) और खतरे के निशान (71.262 मीटर) से अभी नीचे है, लेकिन नदी के रुख में आए इस बदलाव ने घाटवासियों और नाविकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। गंगा में पानी बढ़ने के कारण घाटों का आपस में संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। अस्सी घाट से लेकर नमो घाट तक पक्के घाटों की सीढ़ियां जलमग्न हैं और कई जगहों पर कीचड़ व गाद जमने से पर्यटकों व श्रद्धालुओं के आवागमन को सीमित कर दिया गया है।

दशाश्वमेध घाट पर होने वाली विश्वप्रसिद्ध दैनिक संध्या गंगा आरती को सुरक्षा के लिहाज से पहले ही आरती प्रबंधन समिति के कार्यालय की छत पर स्थानांतरित कर दिया गया था। जलस्तर में ठहराव न आने के कारण आरती अब भी छत से ही संपन्न कराई जा रही है। वहीं मोक्षदायिनी मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट पर निचले शवदाह स्थल जलमग्न होने के चलते शवदाह के लिए परिजनों को छतों और संकरी गलियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

गंगा में बढ़ाव का सीधा प्रभाव सहायक वरुणा नदी पर भी दिखाई दे रहा है। गंगा के बैकफ्लो (पलट प्रवाह) के कारण वरुणा का पानी किनारे के रिहायशी इलाकों जैसे कोनिया, सलारपुर, चमेलिया बस्ती और नक्खीघाट के निचले हिस्सों में पहले से भरा हुआ है। हालांकि पानी की रफ्तार बहुत धीमी है, लेकिन नगर निगम और जिला प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों में जाने की सलाह दी है।

प्रयागराज में गंगा और यमुना का मिजाज शांत, कछारी इलाकों में बाढ़ का खतरा टला

काशी के विपरीत, प्रयागराज में बाढ़ की आशंकाओं के बीच स्थिति तेजी से सामान्य हो रही है। प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों प्रमुख नदियां खतरे के निशान (84.734 मीटर) से कई मीटर नीचे सुरक्षित स्तर पर बह रही हैं। फाफामऊ, छतनाग और नैनी तीनों प्रमुख जल निगरानी केंद्रों पर जलस्तर या तो स्थिर है या उसमें हल्की गिरावट का क्रम बना हुआ है।

संगम तट पर स्थित प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के आसपास पिछले दिनों जो जलस्तर बढ़ गया था, वह अब काफी पीछे हट चुका है। इससे संगम क्षेत्र में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों ने राहत की सांस ली है। प्रयागराज के कछारी मोहल्लों जैसे सलोरी, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, राजापुर, दारागंज और रसूलाबाद—जहां बड़ी संख्या में प्रतियोगी छात्र किराए के मकानों में रहते हैं—वहां से भी पानी घुसने का डर लगभग खत्म हो गया है।

सिंचाई विभाग के बाढ़ प्रखंड के अनुसार, मध्य प्रदेश से आने वाली टोंस और केन-बेतवा नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश थमने के बाद यमुना के प्रवाह में स्थिरता आई है, जिसके चलते प्रयागराज के सभी तटबंध और सुरक्षा बांध पूरी तरह सुरक्षित हैं।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और सितंबर में मानसूनी बारिश का अलर्ट

मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर प्रदेश के वायुमंडल में नमी का स्तर 85 से 90 प्रतिशत के बीच बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 31 अगस्त के बाद मानसून का एक नया चक्र सक्रिय हो सकता है, जिसके प्रभाव से 1 से 4 सितंबर के दौरान पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बादलों की गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पहाड़ी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश होती है, तो बैराजों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने पर गंगा-यमुना के जलस्तर में एक बार फिर बड़ा उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। इसी आशंका के चलते केंद्रीय जल आयोग अगले 48 घंटों तक गंगा के जलस्तर में मामूली वृद्धि जारी रहने का अनुमान जता रहा है।

प्रशासन अलर्ट मोड पर: एनडीआरएफ, जल पुलिस और नगर निगम की टीमें मुस्तैद

वाराणसी और प्रयागराज दोनों जनपदों के जिला प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए बहुस्तरीय योजना लागू कर रखी है। वाराणसी में जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें गंगा में लगातार मोटरबोट्स से गश्त कर रही हैं, और पर्यटकों व कांवड़ियों को गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। सुरक्षा को देखते हुए छोटी व मध्यम नावों के संचालन पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं।

जलभराव और सीलन के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए वाराणसी नगर निगम ने कोनिया, सरायमोहाना और वरुणा पार के इलाकों में कीटनाशक दवाओं, ब्लीचिंग पाउडर और चूने के छिड़काव के साथ फॉगिंग अभियान तेज कर दिया है। वहीं प्रयागराज में बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे एक्टिव मोड में काम कर रहा है और कंट्रोल रूम के जरिए हर घंटे नदियों के स्तर की मॉनिटरिंग की जा रही है।

तटवर्ती इलाकों के निवासियों से अपील की गई है कि वे जलस्तर को लेकर किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल जिला प्रशासन तथा केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन पर ही विश्वास करें।

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