शनि के निशाने पर हैं ये 5 राशियां: 10 अक्टूबर को इन 5 अचूक उपायों से तुरंत खुश होंगे शनिदेव

ज्योतिष शास्त्र में न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनिदेव का प्रभाव अत्यंत प्रभावशाली और निर्णायक माना जाता है। व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब-किताब रखने वाले शनि जब किसी राशि पर अपनी वक्र दृष्टि डालते हैं, तो जीवन में अचानक धन हानि, मानसिक तनाव, करियर में रुकावटें और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां घेरने लगती हैं। वर्तमान ग्रह गोचर की स्थिति के अनुसार पांच प्रमुख राशियां ऐसी हैं, जो इस समय शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के सीधे प्रभाव क्षेत्र में चल रही हैं। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या और शनिवार का अत्यंत दुर्लभ एवं फलदायी संयोग बन रहा है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार, शनिवार और अमावस्या के इस पावन दिन पर किए गए विशेष उपाय शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करने और उनकी असीम कृपा पाने के लिए सबसे शक्तिशाली माने गए हैं।

शनि के निशाने पर कौन-सी 5 राशियां हैं?

शनि की चाल बेहद धीमी होती है और वे एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक वास करते हैं। वर्तमान समय में इन पांच राशियों के जातकों को विशेष रूप से सावधान रहने की जरूरत है:

  • मकर राशि: मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम यानी उतरता हुआ चरण चल रहा है। इस चरण में जातक को आर्थिक और करियर से जुड़े फैसलों में काफी संभलकर चलना होता है।

  • कुंभ राशि: कुंभ राशि पर साढ़ेसाती का दूसरा और सबसे प्रभावी शिखर चरण चल रहा है। शनि की यह स्थिति मानसिक दबाव, पारिवारिक उलझनें और शारीरिक थकान बढ़ा सकती है।

  • मीन राशि: मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला यानी चढ़ता हुआ चरण प्रभावी है। इसमें अनावश्यक खर्च, भागदौड़ और अज्ञात भय की स्थिति बन सकती है।

  • कर्क राशि: कर्क राशि के जातकों पर शनि की कंटक ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, जिससे कार्यस्थल पर विवाद और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी रहती है।

  • वृश्चिक राशि: वृश्चिक राशि के जातक भी शनि की अष्टम ढैय्या के दायरे में हैं, जिसके चलते बनते हुए कार्यों में ऐन वक्त पर रुकावट और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

1. सरसों के तेल में छाया दान: शनि दोष काटने का अचूक टोटका

शनिवार, 10 अक्टूबर को सुबह या शाम के समय ‘छाया दान’ करना शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति का सबसे सिद्ध उपाय है। एक लोहे या कांसे की कटोरी में शुद्ध सरसों का तेल लें।

उस तेल में अपना चेहरा स्पष्ट रूप से देखें और मन ही मन शनिदेव से अपने पापों व गलतियों की क्षमा मांगें। इसके बाद उस तेल को कटोरी समेत किसी शनि मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दे दें। शास्त्रों के अनुसार, तेल में अपनी परछाई देखने से शरीर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और शनि का अनिष्ट प्रभाव तेल में समाहित होकर समाप्त हो जाता है।

2. पीपल के वृक्ष के नीचे चौमुखी दीपक और जल अर्पण

पीपल के पेड़ में त्रिदेवों के साथ-साथ शनिदेव का वास भी माना गया है। शनिवार की सुबह स्नान के बाद पीपल की जड़ में थोड़ा कच्चा दूध, जल और काले तिल अर्पित करें।

इसके बाद शाम को सूर्यास्त के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं और उसमें काले तिल व लोहे की एक कील डाल दें। दीपक जलाने के बाद पीपल के तने की सात बार परिक्रमा करें और ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार मानसिक जप करें। यह उपाय कुंडली के भारी से भारी शनि दोष और पितृ दोष को एक साथ शांत करने की क्षमता रखता है।

3. काले कुत्ते और कौवे को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं

शनिदेव के वाहन और उनके प्रिय दूतों में कौवे और काले कुत्ते को सबसे प्रमुख स्थान दिया गया है। 10 अक्टूबर को अमावस्या तिथि होने के कारण यह उपाय दोगुना फल देता है।

घर में बनी ताजी रोटी पर थोड़ा सा सरसों का तेल चुपड़ें और उस पर थोड़ा मीठा या गुड़ रखें। यह रोटी किसी काले कुत्ते को खिलाएं। इसके साथ ही छत पर कौवों के लिए रोटी के टुकड़े या उबले चावल रखें। इन मूक जीवों को तृप्त करने से शनिदेव की वक्र दृष्टि तुरंत शांत होती है और घर में आकस्मिक आने वाले संकट टल जाते हैं।

4. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ: संकटमोचन हरेंगे पीड़ा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के समय हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था। तब शनिदेव ने वचन दिया था कि जो भी भक्त पवनपुत्र हनुमान की शरण में रहेगा, उसे शनि कभी कष्ट नहीं पहुंचाएंगे।

शनिवार की शाम को किसी हनुमान मंदिर में जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाएं और लाल सिंदूर अर्पित करें। इसके बाद एकाग्रचित्त होकर कम से कम 3 बार हनुमान चालीसा या एक बार सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें। हनुमान जी की उपासना करने वाले जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रतिकूल प्रभाव बिल्कुल शून्य हो जाता है।

5. काले तिल, उड़द और जरूरतमंदों को लोहे का दान

शनिदेव न्याय के देवता हैं और वे हमेशा असहाय, गरीब, मजदूर और दिव्यांग लोगों की सेवा करने वालों से प्रसन्न होते हैं। शनिवार के दिन किसी निर्धन या सफाईकर्मी को काले तिल, काली उड़द की दाल, काला कंबल, चमड़े के जूते-चप्पल या लोहे का कोई बर्तन आदरपूर्वक दान करें।

ध्यान रखें कि शनिवार के दिन भूलकर भी खुद लोहा, तेल, नमक या चमड़े की वस्तुएं खरीदकर घर न लाएं, बल्कि केवल इनका दान करें। कार्यक्षेत्र में अपने अधीनस्थों और कमजोर वर्ग के लोगों के साथ मधुर व्यवहार रखें; कर्मों की शुद्धता ही शनिदेव का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

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