
सिनेमा जगत में बॉक्स ऑफिस क्लैश हमेशा से ही फिल्म निर्माताओं, डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहता है। जब भी किसी बड़े सुपरस्टार की फिल्म रिलीज की कतार में होती है, तो अमूमन अन्य निर्माता अपनी फिल्मों के कलेक्शन और स्क्रीन्स की सुरक्षा को देखते हुए रिलीज डेट्स में फेरबदल करने से नहीं कतराते। इन दिनों ऐसा ही एक बड़ा समीकरण बॉलीवुड के किंग कहे जाने वाले शाहरुख खान की बहुप्रतीक्षित एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘किंग’ और आगामी प्रोजेक्ट ‘शक्ति शालिनी’ को लेकर बनता दिख रहा है। सुजॉय घोष के निर्देशन और सिद्धार्थ आनंद के प्रोडक्शन में बन रही शाहरुख खान और सुहाना खान स्टारर फिल्म ‘किंग’ को लेकर इंडस्ट्री में पहले से ही भारी बज बना हुआ है। इसी बीच फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ से जुड़े अभिनेता विशाल जेठवा ने संभावित टकराव और फिल्म की रिलीज रणनीति पर खुलकर अपनी बात रखी है, जिससे ट्रेड गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
शाहरुख खान का बॉक्स ऑफिस कद और ‘किंग’ का खौफ
शाहरुख खान ने अपनी हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्मों से यह साबित कर दिया है कि जब उनका बल्ला बॉक्स ऑफिस पर चलता है, तो रिकॉर्ड्स का टूटना तय हो जाता है। उनकी आगामी फिल्म ‘किंग’ में उनका ग्रे-शेडेड और फुल-ऑन एक्शन अवतार देखने को मिलने वाला है, जिसकी घोषणा के बाद से ही डिस्ट्रीब्यूटर्स ने भारी निवेश की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में किसी भी अन्य प्रोजेक्ट का उसी रिलीज विंडो में आना सीधा रिस्क माना जाता है। जब कोई सुपरस्टार अपनी पूरी भव्यता के साथ थिएटर्स में उतरता है, तो देश भर के मल्टीप्लेक्स चेन्स और सिंगल स्क्रीन थिएटर्स के 80 से 90 प्रतिशत शोज उसी फिल्म के खाते में चले जाते हैं। इसका सीधा नुकसान साथ रिलीज होने वाली छोटी या मीडियम बजट की फिल्मों को उठाना पड़ता है, भले ही उनका कंटेंट कितना भी जानदार क्यों न हो।
विशाल जेठवा का बयान: टकराव से समझदारी बेहतर
‘मर्दानी 2’ और ‘सलाम वेंकी’ जैसी फिल्मों में अपनी जबरदस्त अदाकारी का लोहा मनवा चुके अभिनेता विशाल जेठवा ने ‘शक्ति शालिनी’ को लेकर चल रही इन चर्चाओं पर व्यावहारिक नजरिया पेश किया है। जब उनसे शाहरुख खान की ‘किंग’ के साथ संभावित टकराव के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही सहज और संतुलित तरीके से स्थिति को स्पष्ट किया। विशाल ने कहा कि किसी भी फिल्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होता है कि उसे दर्शकों तक सही तरीके से पहुंचाया जाए। जब सामने शाहरुख खान जैसे वैश्विक सुपरस्टार की फिल्म हो, तो पंगा लेने या अहंकार में टकराव करने का कोई मतलब नहीं बनता। सिनेमा में प्रतिस्पर्धा से ज्यादा जरूरी यह है कि हर फिल्म को खुलकर सांस लेने और स्क्रीन पाने का पूरा स्पेस मिले। अगर रिलीज डेट आगे-पीछे करके फिल्म को बेहतर स्क्रीन और ज्यादा दर्शक मिलते हैं, तो यह डर नहीं बल्कि एक सोची-समझी और व्यावहारिक रणनीति है।
‘शक्ति शालिनी’ का कंटेंट और मेकर्स की सोलो रिलीज पर नजर
विशाल जेठवा का मानना है कि ‘शक्ति शालिनी’ एक ऐसी फिल्म है जिसका दिल उसकी कहानी और मजबूत किरदारों में बसता है। इस तरह के सिनेमा को दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने के लिए समय और पर्याप्त शो काउंट की जरूरत होती है। यदि फिल्म किसी विशालकाय कमर्शियल सुनामी के सामने रिलीज होती है, तो शुरुआती वीकेंड में ही स्क्रीन्स की किल्लत के कारण उसका वर्ड-ऑफ-माउथ दबने का खतरा रहता है। निर्माता-निर्देशक यह भली-भांति समझते हैं कि फिल्म निर्माण में करोड़ों रुपये और सैकड़ों लोगों की मेहनत लगती है, इसलिए बॉक्स ऑफिस पर अनावश्यक टकराव से बचते हुए एक सुरक्षित और सोलो रिलीज विंडो तलाशना ही सबसे समझदारी भरा फैसला माना जाता है।
प्रदर्शकों का गणित और बॉक्स ऑफिस बिजनेस की हकीकत
फिल्म एग्जिबिटर्स और थिएटर मालिकों का समीकरण भी पूरी तरह से आंकड़ों पर टिका होता है। उत्तर भारत के पारंपरिक सर्किट—जैसे दिल्ली-यूपी, पंजाब, बिहार—से लेकर मुंबई और महानगरों तक, थिएटर्स की पहली प्राथमिकता उस फिल्म को शोज देना होती है जो एडवांस बुकिंग में तेजी से टिकट बेच सके। शाहरुख खान की फिल्म के साथ यही सबसे बड़ा फायदा जुड़ा रहता है कि उनकी फिल्मों की एडवांस बुकिंग हफ्तों पहले हाउसफुल की ओर बढ़ने लगती है। ऐसे हालात में किसी भी प्रतिद्वंद्वी फिल्म के लिए प्राइम टाइम शोज (जैसे शाम 6 बजे से रात 10 बजे के स्लॉट) हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण काम बन जाता है। इंडस्ट्री के ट्रेड विश्लेषकों का भी यही मानना है कि ‘शक्ति शालिनी’ की टीम का रुख पूरी तरह से परिपक्वता को दर्शाता है, क्योंकि सिनेमाघरों में दर्शकों का सम्मान और बॉक्स ऑफिस पर सम्मानजनक बिजनेस तभी मुमकिन है जब टकराव के बजाय सही समय का चुनाव किया जाए।
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