
तीर्थराज प्रयागराज में गंगा और यमुना दोनों प्रमुख नदियां एक बार फिर अपने रौद्र रूप में आ गई हैं। ऊपरी पहाड़ी इलाकों और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के साथ-साथ विभिन्न बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण संगम नगरी में दोनों नदियों का जलस्तर अप्रत्याशित गति से बढ़ रहा है। बीते 12 घंटों के भीतर जलस्तर में 93 सेंटीमीटर की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। संगम के विस्तृत रेतीले तट, प्रमुख स्नान घाट और संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। जलस्तर में इस अचानक आए उछाल के बाद कछारी इलाकों और तटीय मोहल्लों में रहने वाले लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई है और बाढ़ के पानी से घिरने के डर से परिवारों ने अपना जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित ऊंचे स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
संगम के घाट जलमग्न और कछारी इलाकों में घुसा पानी
नदियों में आए उफान का सबसे सीधा असर संगम क्षेत्र के तीर्थ पुरोहितों, छोटे दुकानदारों और नाविकों पर पड़ा है। जहां कुछ दिन पहले तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और पूजा-पाठ की चौकियां सजी थीं, वहां अब कई फीट गहरा पानी हिलोरें मार रहा है। संगम नोज का संपर्क मुख्य रास्तों से पूरी तरह कट चुका है और प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर गहरे पानी में जाने तथा नौका संचालन पर सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं। छोटा बघाड़ा, सलोरी, राजापुर, बेली कछार, बघाड़ा, दारागंज और गऊघाट जैसे निचले रिहायशी इलाकों में पानी तेजी से नालों के जरिए उल्टी दिशा (बैकफ्लो) में बहने लगा है। कई मकानों के भूतल और गलियों में पानी भर जाने से वहां रहने वाले छात्रों, किराएदारों और परिवारों को सुरक्षित निकलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लोग छतों पर डेरा डालने या रिश्तेदारों के घरों में शरण लेने को विवश हैं।
बैराजों से पानी छोड़े जाने से खतरे के निशान की ओर नदियां
केंद्रीय जल आयोग (CWC) और सिंचाई विभाग की बाढ़ नियंत्रण इकाई द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, गंगा नदी का जलस्तर फाफामऊ और छतनाग दोनों गेज स्टेशनों पर लगातार खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है, जबकि यमुना का जलस्तर नैनी स्टेशन पर तेजी से चढ़ रहा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नदियों—जैसे केन, बेतवा और चंबल—से आने वाले अतिरिक्त पानी के चलते यमुना में भारी मात्रा में जलप्रवाह दर्ज किया जा रहा है। वहीं, हरिद्वार, नरौरा और कानपुर बैराज से छोड़े जा रहे पानी के प्रयागराज पहुंचने से गंगा का वेग भी प्रचंड बना हुआ है। जल आयोग के जानकारों का अनुमान है कि अगर अगले 24 से 48 घंटों तक जलस्तर के बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही, तो दोनों नदियां चेतावनी बिंदु (Warning Level) को पार कर खतरे के निशान (Danger Level) के करीब पहुंच सकती हैं।
राहत-बचाव अभियान तेज और एनडीआरएफ अलर्ट पर
हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रयागराज जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित तहसीलों के उपजिलाधिकारियों (SDM), नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित कछारी क्षेत्रों में बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और तटीय इलाकों में लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की मुनादी कराई जा रही है। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मोटरबोट्स के साथ संवेदनशील इलाकों में तैनात कर दिया गया है ताकि जलभराव में फंसे लोगों को समय रहते निकाला जा सके। इसके अलावा, नगर निगम द्वारा स्थापित बाढ़ राहत शिविरों में बिजली, पेयजल, सूखा राशन और जरूरी दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है ताकि विस्थापित परिवारों को किसी तरह की मानवीय त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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