
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों दलित और शोषित वर्ग की राजनीति को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती द्वारा नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर नाम लेकर किए गए सीधे हमले के ठीक बाद आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के तेवर और ज्यादा आक्रामक नजर आए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल जिले के चंदौसी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने युवाओं और समर्थकों में नया जोश फूंका। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इतिहास गवाह है कि यहां मांगने से कभी अधिकार नहीं मिले; मांगने से केवल भीख मिलती है, हक तो लड़कर छीनना पड़ता है। चंद्रशेखर की इस गर्जना ने न केवल सत्ता पक्ष बल्कि विपक्षी दलों के खेमे में भी खलबली मचा दी है।
संभल में उमड़े भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान के जरिए शोषितों और वंचितों को जो ताकत दी है, उसी की बदौलत आज वे हुंकार भर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर अपने हक की लड़ाई में मेरी जान भी चली जाए या मेरी हड्डियों की जरूरत पड़े, तो उनका भी इस्तेमाल कर लेना लेकिन अपने अधिकारों से कभी समझौता मत करना। चंद्रशेखर ने साफ किया कि वह राजनीति में किसी पद की लालसा लेकर नहीं आए हैं, बल्कि बाबा साहेब के अधूरे मिशन को पूरा करने और गरीबों के आंसुओं को पोंछने के लिए मैदान में उतरे हैं।
‘अच्छे दिन सिर्फ उद्योगपतियों के आए, नौजवानों के हाथों में थमा दिए पेपर लीक’
चंद्रशेखर आजाद ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार द्वारा किए गए ‘अच्छे दिन’ के वादे पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे दिन केवल सत्ताधारी दल के करीबी लोगों और बड़े उद्योगपतियों के आए हैं, जबकि गरीब, किसान, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक आज भी बुनियादी जरूरतों और महंगाई की मार से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार का ऐसा संकट है कि ऐसी कोई सरकारी भर्ती परीक्षा नहीं बची है जिसका पेपर लीक न हुआ हो। सरकार युवाओं को रोजगार और सम्मान देने के बजाय उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
सांसद ने धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जब जनता रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की मांग करती है, तो सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए विवादित बयानबाजी शुरू कर देती है। उन्होंने कहा कि आज सरकार मस्जिदों में मंदिर खोजने और समाज को आपस में लड़ाने का काम कर रही है, जबकि उसका असली दायित्व युवाओं को नौकरी देना और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करना है। चंद्रशेखर ने दो टूक कहा कि उनकी लड़ाई किसी धर्म या जाति के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था और जुल्म के खिलाफ है जो गरीबों का उत्पीड़न करती है।
नीले झंडे की ताकत और मायावती के आरोपों पर अप्रत्यक्ष जवाब
गौरतलब है कि हाल ही में बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहली बार चंद्रशेखर आजाद का नाम लेते हुए उन पर निशाना साधा था और उनके चुनाव जीतने पर सवाल खड़े किए थे। संभल की धरती से चंद्रशेखर ने बिना किसी का नाम लिए इसका करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी यह पूछते थे कि ‘चंद्रशेखर कौन है’, आज जनता ने उन्हें मेरी असली ताकत और पहचान बता दी है। उन्होंने कहा कि जब-जब किसी कमजोर और लाचार पर जुल्म होता है, तो सबसे पहले नीले झंडे वाले सिपाही ही सीना तानकर खड़े होते हैं।
चंद्रशेखर ने अपने ऊपर हुए पुराने हमलों और गोली लगने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि विरोधियों ने उन्हें डराने और रास्ते से हटाने की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन वे न कभी झुके हैं और न कभी झुकेंगे। उन्होंने कहा कि वह जनता के बेटे और भाई हैं और जब तक उनके शरीर में सांस है, वे गरीबों और मजलूमों की आवाज को दिल्ली से लेकर लखनऊ के गलियारों तक उठाते रहेंगे। जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि जनता का यह प्यार देखकर विरोधियों की नींद उड़ना तय है।
बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण और 2027 का सियासी संकल्प
संभल के चंदौसी में जनसभा को संबोधित करने के बाद चंद्रशेखर आजाद का काफिला मौलागढ़ स्थित आंबेडकर पार्क पहुंचा। वहां उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण किया और उनके बताए मार्ग पर चलने की शपथ ली। इस दौरान आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के हजारों कार्यकर्ता हाथों में नीले झंडे लेकर उनके समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते दिखाई दिए। आंबेडकर पार्क में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद चंद्रशेखर वाहनों के लंबे काफिले के साथ बहजोई की ओर रवाना हो गए।
कार्यकर्ताओं से एकजुट रहने की भावुक अपील करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि आने वाले समय में समाज को शिक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर बनाना ही उनका मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे आपसी मतभेदों को भुलाकर गांव-गांव जाएं और लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करें। उन्होंने दावा किया कि जब प्रदेश में शोषितों और मजलूमों की अपनी सरकार बनेगी, तभी गरीबों पर होने वाले जुल्म और धार्मिक आस्था के नाम पर होने वाली राजनीति पर स्थायी विराम लगेगा। संभल में चंद्रशेखर के इस कड़े तेवर ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन आंदोलन की कमान को लेकर जंग अब आर-पार के मोड़ पर पहुंच चुकी है।
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