‘सद्दाम के इराक और किम के नॉर्थ कोरिया में नहीं होती एंटी-इंकम्बेंसी’: राहुल गांधी का मोदी-BJP पर तीखा हमला

निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक मतभेदों और वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मचे घमासान के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने चुनावी नतीजों और सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency) के पैटर्न पर सवाल खड़े किए। उन्होंने भारत के मौजूदा चुनावी माहौल की तुलना सद्दाम हुसैन के इराक और किम जोंग उन के उत्तर कोरिया से कर डाली।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दुनिया के किसी भी लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता कि किसी पार्टी या नेता के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर पूरी तरह गायब ही हो जाए। उन्होंने दावा किया कि देश की चुनावी प्रणाली में ‘वोट चोरी’ और गड़बड़ी के जरिए लोकतंत्र की बुनियादी नींव को खत्म किया जा रहा है।

‘इंदिरा गांधी को झेलनी पड़ी थी एंटी-इंकम्बेंसी, फिर मोदी-शाह को क्यों नहीं?’

राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए भारत के राजनीतिक इतिहास और अपने पारिवारिक अनुभवों का हवाला दिया:

  • लोकतंत्र की स्वाभाविक ताकत: उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ‘एंटी-इंकम्बेंसी’ एक स्वाभाविक और बुनियादी ताकत होती है जो समय के साथ किसी भी सरकार के खिलाफ जनता में पैदा होती है। यह कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों, क्षेत्रीय दलों और हर बड़े नेता के साथ होता आया है।

  • इंदिरा गांधी का उदाहरण: राहुल ने कहा, “इंदिरा गांधी ने बांग्लादेश का युद्ध जीता, वह अपनी लोकप्रियता के चरम पर थीं, लेकिन इसके बावजूद एक-दो साल के भीतर उनके खिलाफ भी भारी सत्ता विरोधी लहर और दबाव देखने को मिला था। लेकिन पता नहीं क्यों, नरेंद्र मोदी, अमित शाह और भाजपा के साथ कभी एंटी-इंकम्बेंसी होती ही नहीं।”

  • तानाशाहियों का दिया हवाला: उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “एंटी-इंकम्बेंसी केवल सद्दाम हुसैन के इराक में नहीं थी या फिर किम जोंग उन के उत्तर कोरिया में नहीं होती। इस पूरे ग्रह पर ऐसा कोई लोकतंत्र नहीं है जहां एंटी-इंकम्बेंसी गायब हो जाए। यह हमारे लिए सबसे बड़ा पहेलीनुमा सवाल है। हम किसी नेता की लोकप्रियता या सरकार के काम को समझ सकते हैं, लेकिन यह कैसे समझें कि जनता का असंतोष ही खत्म हो गया?”

हरियाणा, महाराष्ट्र और यूपी के चुनावी पैटर्न पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने देश के प्रमुख राज्यों के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि दशकों से स्विंग स्टेट (बदलाव वाले राज्य) रहे सूबों में अचानक बदलाव थम सा गया है:

  1. हरियाणा: 50 साल तक लगातार एक पार्टी से दूसरी पार्टी में सत्ता बदलती रही, लेकिन अचानक वहां सत्ता विरोधी लहर गायब हो गई।

  2. महाराष्ट्र और यूपी: महाराष्ट्र में हमेशा राजनीतिक बदलाव देखे गए, उत्तर प्रदेश कभी सपा तो कभी बसपा की तरफ गया, लेकिन अब वहां भी वही पैटर्न दिखाया जा रहा है।

  3. मध्य प्रदेश और गुजरात: इन राज्यों में भी लंबे शासन के बाद भी किसी तरह के स्वाभाविक जनआक्रोश का चुनावी नतीजों में न दिखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

‘वोट चोरी से कानून चोरी और संस्थाओं का विनाश’

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा प्रहार करते हुए पूरी संवैधानिक व्यवस्था पर खतरा बताया:

  • संवैधानिक कड़ी टूटने का दावा: उन्होंने कहा कि हमारे संविधान को ताकत जनता के वोट से मिलती है। संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों से हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएं खड़ी होती हैं। यदि वोट की सुरक्षा ही खत्म हो गई और वोट चोरी हो गया, तो इसका सीधा मतलब है कि संविधान नष्ट हो गया।

  • कानूनों की वैधता पर सवाल: राहुल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सांसद ‘चोरी किए गए वोट’ के आधार पर संसद में बैठे हैं, तो उनके द्वारा बनाए जाने वाले कानून भी गैर-कानूनी हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में संस्थाएं अर्थहीन रह जाती हैं।

  • सीईसी पर सीधा हमला: उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई और दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों (संधू और जोशी) द्वारा उठाए गए सवाल इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि चुनाव मशीनरी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।

बीजेपी का पलटवार: ‘हार के डर से लोकतंत्र को बदनाम कर रहे राहुल’

राहुल गांधी के इस आक्रामक बयान के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने भी कड़ा पलटवार किया है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी जब भी चुनाव हारते हैं या अपनी राजनीतिक जमीन खोते हैं, तो वे ईवीएम, चुनाव आयोग और देश के संवैधानिक संस्थानों को गाली देने लगते हैं। भाजपा प्रवक्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी नीतियों और सुशासन के कारण जनता बार-बार भाजपा पर भरोसा जताती है, जिसे कांग्रेस पचा नहीं पा रही है।

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