
बॉलीवुड के एक्शन स्टार सनी देओल की आगामी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले ही कानूनी पचड़े और भारी विरोध में घिर गई है। फिल्म का टीजर सामने आने के बाद देश भर के चिकित्सा जगत और निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने इसमें दिखाए गए दृश्यों और संवादों पर कड़ा ऐतराज जताया है। विवाद इतना बढ़ गया कि कॉरपोरेट अस्पतालों के चिकित्सकों के संगठन और प्रमुख डॉक्टरों ने सीधे दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। डॉक्टरों का आरोप है कि फिल्म में पूरे मेडिकल प्रोफेशन को आपराधिक, लालची और असंवेदनशील माफिया के तौर पर चित्रित किया गया है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
डायलॉग और ऑर्गन रैकेट के चित्रण पर डॉक्टरों की मुख्य आपत्तियां
विवाद की मुख्य जड़ फिल्म के टीजर में शामिल कुछ तीखे संवाद और दृश्य हैं। डॉक्टरों ने विशेष रूप से उस डायलॉग पर तीखा विरोध दर्ज कराया है जिसमें कहा गया है कि ‘डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन नहीं, कमीशन लिखते हैं’। इसके अलावा फिल्म की कहानी कथित तौर पर एक निजी अस्पताल में ब्रेन-डेथ घोषित कर अवैध तरीके से अंग निकालने (ऑर्गन रैकेट) और मरीजों के शोषण के इर्द-गिर्द घूमती है, जो कि मलयालम फिल्म ‘जोसेफ’ की कहानी पर आधारित बताई जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि व्यावसायिक लाभ और सनसनी फैलाने के लिए पूरे चिकित्सा समुदाय की छवि को ‘कमीशनखोर’ और ‘हत्यारे’ के रूप में दिखाना न केवल भ्रामक है, बल्कि यह उन लाखों ईमानदार डॉक्टरों का अपमान है जो दिन-रात आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाते हैं।
अस्पतालों में डॉक्टरों पर हिंसा और आक्रोश भड़कने की जताई गई आशंका
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और याचिकाकर्ता डॉक्टरों का सबसे बड़ा डर अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर है। याचिका में दलील दी गई है कि पहले से ही देश के विभिन्न हिस्सों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत या जटिलताओं के बाद परिजनों द्वारा डॉक्टरों पर हिंसक हमले की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे तनावपूर्ण माहौल में यदि मुख्यधारा का सिनेमा यह संदेश देगा कि डॉक्टर जानबूझकर मरीजों की जान लेते हैं या कमीशन के लिए इलाज करते हैं, तो आम जनता का चिकित्सा व्यवस्था से भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा। इससे अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात जूनियर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर जनता का आक्रोश बढ़ सकता है और किसी भी अप्रिय घटना में भीड़ हिंसा का रूप ले सकती है।
दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, केंद्र, सीबीएफसी और मेकर्स से मांगा जवाब
इस मामले को लेकर डॉ. निशांत सोनी, डॉ. आशीष तोमर, डॉ. रवि भाटिया और डॉ. शिवम वत्सल ने अधिवक्ता वरुण सिंह के जरिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर टीजर को तुरंत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हटाने की मांग की। अदालत ने सुनवाई के दौरान याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म के निर्माताओं (एमएम मूवीज और जी एंटरटेनमेंट) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने टीजर के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को तय की है। अब सभी की नजरें अदालत में मेकर्स के जवाब और 20 नवंबर को प्रस्तावित फिल्म की रिलीज पर टिकी हुई हैं।
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